अमर उजाला-यूनिसेफ की दो दिवसीय वर्कशॉप, हेल्थ रिपोर्टिंग के मानदंडों पर होगा विचार मंथन
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हेल्थ रिपोर्टर क्या सावधानियां बरतें कि उनकी कलम अफवाहों और अंधविश्वासों का शिकार न बने? भारतीय मीडिया की, खासतौर पर भाषाई अखबारों और न्यूज वेबसाइटों की हेल्थ रिपोर्टिंग को किस तरह अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के मुताबिक ढाला जाए?
इन्हीं सवालों के जवाब रेखांकित करने के लिए यूनिसेफ, आईआईएमसी और स्वास्थ्य मंत्रालय के शीर्ष विशेषज्ञ आज दिल्ली में एक दो दिवसीय वर्कशॉप आरंभ करेंगे। अमर उजाला अखबार के कई प्रमुख संस्करणों में कार्यरत हेल्थ रिपोर्टर इसमें हिस्सा ले रहे हैं। अमर उजाला डॉटकाम और अमर उजाला टीवी के पत्रकार भी इसमें शामिल होंगे।
वर्कशॉप का मुख्य थीम हैः स्वास्थ्य पत्रकारिता-आलोचनात्मक मूल्यांकन के तरीके हैं। मोटे तौर पर इस थीम के तहत उन विश्वसम्मत सिद्धांतों पर बात की जाएगी जिनके जरिए स्वास्थ्य के विषय पर लिखी गई प्रत्येक न्यूज रिपोर्ट को परखा जाना चाहिए।
टीकाकरण अभियानों की रिपोर्टिंग में क्या सावधानियां बरती जानी चाहिए
खासतौर पर महामारी रोकने वाले टीकाकरण अभियानों की रिपोर्टिंग में क्या सावधानियां बरती जानी चाहिए, इस पर भी चर्चा होगी। आलोचनात्मक मूल्यांकन दक्षता (क्रीटिकल एप्रेजल स्किल) सिद्धांतों के तहत यूनिसेफ, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, आईआईएमसी व अमर उजाला ने मिलकर पत्रकारों के लिए एक अल्पकालिक प्रशिक्षण कोर्स विकसित किया है। वर्कशॉप में उसी प्रशिक्षण कोर्स के अनुसार काम होगा।
देश के कई हिस्सों में टीकाकरण अभियानों को संगठित विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अफवाहों और सोशल मीडिया की फेक न्यूज का निशाना भी ये अभियान बनते हैं। दवा कंपनियां भी अपने उत्पादों को भुनाने के लिए प्रोपेगंडा का सहारा लेती हैं।
दवाओं के फायदों या बीमारियों के असर को लेकर होने वाले सर्वेक्षणों और अध्ययनों पर भी आए दिन सवालिया निशान लग रहे हैं। इन सबके बीच जिम्मेदार हेल्थ रिपोर्टिंग के लिए क्या चुनौतियां पैदा हो गईं हैं, और किस तरह उनका सामना किया जाए, इसी पर दो दिन का विचार मंथन केंद्रित होगा।