Shaktipeeth Stir: महाराष्ट्र में शक्ति पीठ एक्सप्रेसवे पर विवाद, मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने जताई साजिश की आशंका
महाराष्ट्र में शक्ति पीठ एक्सप्रेसवे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने आशंका जताई कि राज्य को अस्थिर करने की साजिश हो रही है। उन्होंने परियोजना को जरूरी बताते हुए कहा कि जैसे कोयना डैम और समृद्धि महामार्ग ने विकास में योगदान दिया, वैसे ही यह एक्सप्रेसवे भी अहम है। उन्होंने कहा कि किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महाराष्ट्र में शक्ति पीठ एक्सप्रेसवे को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में शुक्रवार को महाराष्ट्र के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में बार-बार सरकार को अस्थिर करने और अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई ताकतें जानबूझकर राज्य में अस्थिरता फैलाने में लगी हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सांगली में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी राज्य में कोई घटना होती है, तो कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसा लगता है कि कोई छिपी ताकतें अराजकता फैलाना चाहती हैं।
शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का विरोध
जब पत्रकारों ने शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे को लेकर हो रहे विरोध पर सवाल किया, तो मंत्री पाटिल ने कहा कि जैसे कोयना डैम के बिना राज्य को बिजली और सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पाती, वैसे ही यह एक्सप्रेसवे भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर समृद्धि महामार्ग नहीं बना होता, तो क्या नागपुर से मुंबई तक 8 घंटे में खेती का माल पहुंच पाता?
ये भी पढ़ें:- Congress Vs BJP: '1 लाख करोड़ रुपये का जुमला - सीजन 2', पीएम मोदी की नई रोजगार योजना पर राहुल गांधी का तंज
हालांकि दूसरी ओर उन्होंने ये भी माना कि कोयना प्रोजेक्ट से प्रभावित कुछ लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शक्तिपीठ महामार्ग से प्रभावित किसानों को पूरा मुआवजा और पुनर्वास मिलना चाहिए। किसान विरोध बंद करें और सही मुआवजा पाने पर ध्यान दें।
परियोजना की जानकारी
सरकारी जानकारी के मुताबिक, शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे 12 जिलों से गुजरेगा और इसके लिए 8,024 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। इसमें 7,625 हेक्टेयर निजी खेत, 262 हेक्टेयर सरकारी और 123 हेक्टेयर जंगल की जमीन शामिल है। जमीन मापन का काम लगभग पूरा हो गया है वर्धा, यवतमाल और सिंधुदुर्ग में, सोलापुर में काम ठीक चल रहा है, जबकि नांदेड़, हिंगोली, परभणी, बीड और धाराशिव में धीरे-धीरे हो रहा है। वहीं लातूर, सांगली और खासकर कोल्हापुर में भारी विरोध हो रहा है।
ये भी पढ़ें:- Congress: गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप गुजरात में लाखों फर्जी वोटर, चुनाव आयोग पर दबाव में काम करने का दावा
कोल्हापुर में किसानों का विरोध प्रदर्शन
बता दें कि शक्ति पीठ एक्सप्रेसवे को लेकर कोल्हापुर में किसानों का बड़ा विरोध देखने को मिला। किसानों ने 'हमारे खेतों में तिरंगा, शक्ति पीठ नहीं चाहिए' के नारे के साथ प्रतीकात्मक आंदोलन किया। कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने भुदरगड़ और कागल तालुका में मोर्चा निकाला, वहीं स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के प्रमुख राजू शेट्टी ने हाटकनंगले और शिरोल तालुका में आंदोलन का नेतृत्व किया। किसानों का कहना है कि यह परियोजना कोल्हापुर की सबसे उपजाऊ जमीन निगल जाएगी, जहां छोटे किसान खेती करते हैं। उन्होंने सरकार से परियोजना को रद्द करने की मांग की।