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Supreme Court: 'यूएपीए के प्रावधानों के खिलाफ झूठे मुकदमेबाजी की नहीं देंगे अनुमति', शीर्ष अदालत की टिप्पणी

Wed, 14 Feb 2024 09:52 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 14 Feb 2024 09:52 PM IST
सार

Supreme Court: शीर्ष अदालत ने कहा कि यूएपीए के प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाले झूठे मुकदमों पर सुनवाई की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने कहा कि वह केवल उन्हीं लोगों की आतंकवाद रोधी कानून की शक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जो व्यक्तिगत रूप से इससे पीड़ित हैं।

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Won't allow proxy litigation against UAPA provisions, will hear those aggrieved: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के कई प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस आतंकवाद रोधी कानून को चुनौती देने वाले झूठे मुकदमों पर सुनवाई की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने कहा कि वह केवल उन्हीं लोगों की अधिनियम की शक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जो व्यक्तिगत रूप से इससे पीड़ित हैं।  

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न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी से कहा कि केवल निजी रूप से प्रभावित लोग ही कानून की संवैधानिकता को चुनौती दे सकते हैं। पीठ ने कहा कि वहीं व्यक्ति इस अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती दे सकता है जो पीड़ित हो और जिसके अधिकारों का उल्लंघन किया गया हो। तभी इस विधायी प्रावधान की शक्ति को चुनौती देने का सवाल उठ सकता है। 

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अहमदी ने कहा कि याचिकाकर्ता ने यूएपीए के प्रावधानों को खारिज किया है। यह कानून आतंकवाद, आतंकवादी गतिविधियों जैसे शब्दों को परिभाषित करता है और किसी इकाई को आतंकवादी संगठन केरूप में नामित करने की केंद्र की शक्ति को परिभाषित करता है। वरिष्ठ वकील ने कहा कि लोग, लोगों और संगठन बनाने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाले कानून की शक्ति को चुनौती देने के लिए जनहित याचिकाएं दायर कर सकते हैं।  

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इसके बाद न्यायमूर्ति मित्तल ने कहा, क्या यह झूठी मुकदमेबाजी नहीं होगी? जनहित याचिका के मामलों में लोकस स्टैंडी का सिद्धांत सही मायनों में लागू नहीं हो सकता है। हालांकि, जहां एक कानून की शक्ति को चुनौती दी जाती है, वहां उसमें भागीदारी की एक झलक होनी चाहिए। नहीं तो अन्य लोगों की ओर से झूठे मुकदमे होंगे, जो आगे नहीं आना चाहते हैं। इसकी अनुमति नहीं होगी। हमें इस तरह के झूठे मुकदमे की अनुमति देने के बारे में सावधान रहना होगा। लोकस स्टैंडी कानून में एक स्थिति है, जिसके तहत कानूनी उपाय चाहने वाले पक्ष को अदालत को यह दिखाना होता है कि मामले में उस पार्टी की भागीदारी का समर्थन करने के लिए कानून को दी गई चुनौती से उनका पर्याप्त संबंध है और उनका नुकसान है। 

इसके बाद अहमदी ने जवाब दिया कि आखिरकार कानून के सवाल को अदालत को ही देखना होगा। पीठ ने अहमदी को इस मामले में आगे सुनने से इनकार कर दिया। पीठ ने उनसे कहा कि वह बाद में इस मुद्दे पर अदालत की मदद करें। पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि वे आगे आएं और अपने मामलों की दलीलें सामने रखें। 

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