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Manipur: असम राइफल्स के खिलाफ घाटी के पांच जिलों में महिला संगठन का प्रदर्शन, कानूनी नोटिस वापस लेने की मांग

Sat, 02 Sep 2023 09:04 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 02 Sep 2023 09:04 PM IST
सार

Manipur: असम राइफल्स ने हाल ही में बल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और उसके मनोबल को गिराने के आरोप में मणिपुर के एक नेता को कानूनी नोटिस भेजा था। इस नोटिस के खिलाफ एक महिला संगठन ने विरोध प्रदर्शन किया। 

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Women's body holds protest against Assam Rifles' legal notice to Manipur politician
Manipur Clash - फोटो : Social Media

विस्तार

असम राइफल्स ने हाल ही में बल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और उसके मनोबल को गिराने के आरोप में मणिपुर के एक नेता को कानूनी नोटिस भेजा था। इस नोटिस के खिलाफ एक महिला संगठन के सदस्यों ने घाटी के पांच जिलों में प्रदर्शन किया और इसे वापस लेने की मांग की। 

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अर्धसैनिक बल ने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-अठावले) के राष्ट्रीय सचिव महेश्वर थोउनाओजाम को कानूनी नोटिस भेजा था। असम राइफल्स के खिलाफ विरोध प्रदर्शन समिति के प्रतिनिधियों ने धरना दिया।

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इंफाल पश्चिम जिले के उरीपोक, सिंगजामेई, कीसमपत, कीसमथोंग और इंफाल पूर्व के वांगखेई और खुरई में बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतरीं। थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में भी प्रदर्शन हुए और इस दौरान महिलाओं ने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं और अर्धसैनिक बल के खिलाफ नारेबाजी की।

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समिति की सदस्य एन शर्मिला ने उरीपोक में संवाददाताओं बताया, 'यह प्रदर्शन जन अवज्ञा आंदोलन का हिस्सा है। हम केंद्र और राज्य सरकारों के सभी कर्मचारियों से अनुरोध कर रहे हैं कि वे मणिपुर में तीन मई से जारी हिंसा पर उचित ध्यान देने में सरकारों की विफलता के जवाब में कार्यालयों में काम करना बंद कर दें।'
 

इंफाल पूर्व के बामोन लेइकाई में एक प्रदर्शन में भाग लेने वाली ए शांतिलता ने कहा, 'हम असम राइफल्स द्वारा थोउनाओजाम को दिए गए कानूनी नोटिस का कड़ा विरोध करते हैं। वह एकमात्र राजनेता और लोगों के प्रतिनिधि हैं, जिन्होंने मैतई ग्रामीणों पर बिना उकसावे के हमलों का मुद्दा लगातार उठाया है।'

असम राइफल्स ने 18 अगस्त को थोउनाओजाम को 'बल की प्रतिष्ठा' को नुकसान पहुंचाने और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल को हतोत्साहित करने के लिए कानूनी नोटिस भेजा था।
 

थोउनाओजाम ने इससे पहले 'पीटीआई-भाषा' से कहा था कि वह माफी नहीं मांगेंगे और भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। असम राइफल्स ने 'झूठे आरोप और मानहानि' के लिए लिखित और सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए उनसे 30 जून को दिल्ली में मैतई शहीदों की संवेदना में दिए गए बयान को वापस लेने को कहा।

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