एक्सप्लेनर: एआई के बाद अब रोबोट की बारी, 2050 तक दुनिया में हो सकते हैं एक अरब ह्यूमनॉइड रोबोट!
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विस्तार
जनरेटिव एआई आने के बाद हमने मशीनों को सोचने, समझने और याद रखने की ताकत देने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। चैटबॉट अब सवालों के जवाब दे सकते हैं, डॉक्यूमेंट्स को पढ़ सकते हैं, तस्वीरों को अच्छे से समझ सकते हैं और इंसानों की भाषा में बातचीत कर सकते हैं। दिन प्रतिदिन एआई का यह डिजिटल दिमाग तेजी से ताकतवर हो रहा है। वहीं अब अगली बड़ी चुनौती कुछ और है इस दिमाग को शरीर देना।
आसान भाषा में कहें तो अब बारी मशीनों की मसल पावर की है। यही वजह है कि ह्यूमनॉइड रोबोट को लेकर चर्चाएं इन दिनों खूब हो रही हैं। ह्यूमनॉइड रोबोट को लेकर दुनिया की टेक कंपनियों और निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। लक्ष्य सिर्फ ऐसा रोबोट नहीं बनाना है, जो केवल इंसानों की तरह दिखे। असली उद्देश्य एक ऐसा सिस्टम तैयार करना है जो आसपास की दुनिया को देख सके, समझ सके, फैसला ले सके और फिर अपने हाथ-पैर से उस फैसले को जमीन पर अंजाम दे सके।
ह्यूमनॉइड रोबोट आखिर इतना खास क्यों है?
अब तक ज्यादातर रोबोट एक खास काम करने के लिए बनाए जाते रहे हैं। कोई रोबोट कार के एक हिस्से को जोड़ता है, कोई सामान उठाता है और कोई वेल्डिंग करने का काम करता है। इन रोबोट्स की सबसे बड़ी ताकत इनकी तेजी और सटीकता है। ये रोबोट उसी काम को अच्छे से करते हैं, जिसके लिए इन्हें डिजाइन किया गया है। ह्यूमनॉइड रोबोट इस मॉडल को बदलने की कोशिश कर रहा है।
ह्यूमनॉइड रोबोट की सबसे बड़ी खास बात यह है कि उसे सिर्फ एक तय काम तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। मान लीजिए किसी फैक्ट्री में आज उसे सामान उठाकर एक जगह रखना है और कल उसी रोबोट को पैकिंग के काम में लगाया जाता है। अगर वह इंसान की तरह चल सकता है, चीजों को पहचान सकता है और अपने हाथों से उन्हें पकड़ सकता है, तो ऐसे में वह अलग-अलग काम सीख सकता है।
यहां एआई की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। एआई रोबोट को यह समझने में मदद करता है कि उसके सामने क्या है, उसे क्या करना है और किस तरह से करना है। यानी पहले रोबोट को हर छोटे काम के लिए अलग-अलग तरीके से प्रोग्राम किया जाता था। वहीं एआई के साथ कोशिश यह है कि रोबोट काम को समझे और परिस्थितियों के हिसाब से खुद कदम उठाए। यही बदलाव ह्यूमनॉइड रोबोट को बाकी रोबोट्स से अलग बनाता है।
चीन में अब रोबोट बनाने की रफ्तार भी बदल रही है
इसी बदलाव की झलक चीन में दिखाई देती है। यूबीटेक रोबोटिक्स ने एक खास तरह की ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने वाली फेक्ट्री खोली है। यह फैक्ट्री हर साल 10 हजार ह्यूमनॉइड रोबोट का उत्पादन कर रही है। सबसे दिलचस्प बात इसकी असेंबली लाइन है, जिसमें दावा किया गया है कि यहां लगभग हर 10 मिनट में एक रोबोट तैयार हो रहा है।
इस कंपनी में हर रोबोट को अपना एक सीरियल नंबर और अलग काम दिया गया है। खास बात यह है कि रोबोट बनाने वाली इस फेक्ट्री को एक डिजिटल सिस्टम संचालित करता है। फेक्ट्री में क्या बनाना है इसको तय करने से लेकर जो रोबोट तैयार किए गए हैं उनकी गुणवत्ता की जांच करने तक अधिकतर काम यही डिजिटल सिस्टम करता है। यहां इंसानों की दखल न के बराबर है।
असली बदलाव सिर्फ रोबोट की फैक्ट्री में नहीं एआई में है
यहां एक चीज समझनी जरूरी है। ह्यूमनॉइड रोबोट को सिर्फ लोहे, मोटर और कैमरों से नहीं बनाया जा सकता। उसे अपने आसपास की दुनिया को समझना भी होगा। इसे एक उदाहरण से समझिए अगर रोबोट के सामने फर्श पर कोई सामान पड़ा है तो उसे पहचानना होगा, यह समझना होगा कि उसे उठाना है या उसके पास से निकलना है और फिर अपने हाथ-पैर को उसी हिसाब से चलाना होगा।
यही वह जगह है जहां आधुनिक एआई महत्वपूर्ण हो जाता है। Goldman Sachs की पिछली रिसर्च में भी एआई की तेज प्रगति और एंड-टू-एंड एआई को ह्यूमनॉइड रोबोट के विकास में महत्वपूर्ण कारकों में गिना गया था। अब इंडस्ट्री का फोकस इस बात पर है कि एआई सिर्फ स्क्रीन पर जवाब न दे, बल्कि वास्तविक दुनिया में भी काम कर सके।
2050 तक ह्यूमनॉइड रोबोट का बाजार 5 ट्रिलियन डॉलर से आगे जा सकता है
Goldman Sachs की रिपोर्ट के मुताबिक 2035 तक ह्यूमनॉइड रोबोट की सालाना शिपमेंट का अनुमान लगभग 65 लाख यूनिट है। 2030 का अनुमान भी 2.56 लाख से बढ़कर करीब 8.9 लाख यूनिट और 2026 का अनुमान 51 हजार से बढ़कर करीब 75 हजार यूनिट का है। इसके अलावा 2035 तक ह्यूमनॉइड रोबोट के बाजार का अनुमान करीब 138 अरब डॉलर का लगाया गया है।
वहीं मोर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक ह्यूमनॉइड रोबोट का बाजार 5 ट्रिलियन डॉलर से आगे जा सकता है। अनुमान है कि तब तक 1 अरब से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट मौजूद होंगे, जिनमें करीब 90 प्रतिशत उद्योग और कारोबार में काम करेंगे।
ह्यूमनॉइड रोबोट को बनाने में एक महत्वपूर्ण चीज का उपयोग किया जाता है वह है सेमीकंडक्टर चिप। हर रोबोट को चलाने के लिए कंप्यूटिंग, मेमोरी, सेंसर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की जरूरत होती है। भविष्य में अगर लाखों की संख्या में रोबोट बाजार में आते हैं, तो चिप की मांग भी बहुत बड़े स्तर पर बढ़ सकती है। यही वजह है कि ह्यूमनॉइड रोबोट की कहानी सिर्फ रोबोट बनाने वाली कंपनियों की कहानी नहीं है। इसके पीछे चिप, सेंसर, मोटर, बैटरी, ऑटोमेशन और मैन्युफैक्चरिंग की पूरी सप्लाई चेन खड़ी होगी।