Women Reservation: महिला आरक्षण पर 47 दलों को चिट्ठी, के. कविता के इस दांव से कितनी बदलेगी नई संसद की तस्वीर
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विस्तार
संसद का विशेष सत्र बुलाने के साथ ही इस बात के अनुमान लगाए जा रहे हैं कि सरकार नई संसद में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देकर नया इतिहास रचने की कोशिश कर सकती है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी एक कार्यक्रम इस बात का समर्थन कर इन संभावनाओं को बल दे दिया है। ऐसे में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) नेता के. कविता ने देश के 47 बड़े राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर महिला आरक्षण के मुद्दे का समर्थन देने का अनुरोध किया है। इससे इस मुद्दे पर सरकार को एक बड़े और प्रभावशाली विपक्षी दल का साथ मिल गया है, जिससे उसका मनोबल ऊंचा हो गया है, वहीं विपक्षी खेमे में इस मुद्दे पर आंतरिक गतिरोध सामने आ सकता है।
पत्र में क्या कहा
के. कविता ने सभी राजनीतिक दलों को भेजे पत्र में कहा है कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही राज्यसभा से पास हो चुका है, जहां सरकार के पास बहुमत नहीं है। लेकिन पहले से ही राज्यसभा में पास होने के कारण अब इसकी कोई आवश्यकता भी नहीं है। सरकार के पास लोकसभा में मजबूत बहुमत है, जहां उसे इस विधेयक को पास करने में कोई परेशानी सामने नहीं आने वाली है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों को इस विधेयक को पास कराने में साथ देना चाहिए, जिससे महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके।
भाजपा को उसी के जाल में फंसाया
राजनीतिक विश्लेषक संजय शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि सरकार ने अभी विशेष सत्र के एजेंडे को साफ नहीं किया है, लेकिन अलग-अलग चैनलों से यह शिगूफा अवश्य छोड़ा जा रहा है कि सरकार महिला आरक्षण विधेयक पास कर लोकसभा चुनाव 2024 में अपनी जीत अजेय बनाने की कोशिश कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो यह एतिहासिक और बड़ा निर्णय होगा और इस बात में भी कोई संदेह नहीं कि सरकार को इसका लाभ चुनावों में मिल सकता है।
संजय शर्मा ने कहा कि इस मुद्दे पर विरोध करने से विपक्षी दलों को नुकसान हो सकता है क्योंकि इससे उनके महिला विरोधी होने का संदेश जा सकता है। भाजपा इसे मुद्दा बनाने से पीछे नहीं हटेगी। जबकि के. कविता ने भाजपा को उसी के जाल में उलझाने का काम किया है। अब यदि सरकार इस मुद्दे पर दो कदम आगे बढ़ाने के बाद अपने कदम पीछे खींचती है, तो उसे ही महिला मतदाताओं की नाराजगी उठानी पड़ सकती है। वही, यदि सरकार इस मुद्दे को पास कर देती है, तो इस स्टैंड के कारण तेलंगाना विधानसभा में बीआरएस को लाभ मिल सकता है।