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सीट का समीकरण: बीते तीन चुनाव में तीन अलग दलों को रुधौली ने चुना; ऐसा है इस विधानसभा का सियासी इतिहास
Thu, 10 Sep 2026 07:19 PM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 10 Sep 2026 07:19 PM IST
सार
बस्ती की रुधौली विधानसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई सीट का नाम बाद में रामनगर हुआ और 2008 के परिसीमन के बाद फिर रुधौली बना। 2012 में कांग्रेस, 2017 में भाजपा और 2022 में सपा ने यहां से जीत दर्ज की।
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रुधौली सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में नजर आने लगी है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा बस्ती जिले की रुधौली विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।
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पहले जानते हैं रुधौली विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला बस्ती है। जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें- हर्रैया, कप्तानगंज, रुधौली, बस्ती सदर और महादेवा शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम रुधौली विधानसभा सीट की बात करेंगे। रुधौली विधानसभा सीट का इतिहास थोड़ा अलग रहा है। दरअसल यह विधानसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी। उस समय कांग्रेस के अब्दुल मोइज खान यहां के पहले विधायक बने थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। 1967 के बाद 1969 में चुनाव हुए। इस चुनाव में भारतीय क्रांति दल के मोहम्मद नबी विजयी हुए, उन्होंने कांग्रेस के अब्दुल मोइज को 4,440 वोटों के अंतर से हराया।
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हालांकि इन दो चुनावों के बाद 1972 के परिसीमन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलकर 'रामनगर विधानसभा क्षेत्र' कर दिया गया था। 1974 से लेकर 2007 तक के चुनाव इसी नाम (रामनगर) से लड़े गए। साल 2008 के नए परिसीमन के तहत रामनगर सीट को समाप्त कर इसका नाम दोबारा रुधौली विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। नए स्वरूप में इस सीट पर पहला चुनाव 2012 में कराया गया था।
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रुधौली विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
इस क्षेत्र के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, अनुसूचित और कुर्मी आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 22% हैं। इसके बाद अनुसूचित मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 18% और कुर्मी मतदाताओं की करीब 18% है, जबकि ब्राह्मण मतदाता लगभग 10% हैं। वहीं, यादव मतदाताओं की संख्या करीब 7% और ठाकुर मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 5% है। बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों से हैं।
इस क्षेत्र के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, अनुसूचित और कुर्मी आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 22% हैं। इसके बाद अनुसूचित मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 18% और कुर्मी मतदाताओं की करीब 18% है, जबकि ब्राह्मण मतदाता लगभग 10% हैं। वहीं, यादव मतदाताओं की संख्या करीब 7% और ठाकुर मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 5% है। बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों से हैं।
2012 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
रुधौली विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
2012 का नतीजा
2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रुधौली विधानसभा सीट से कांग्रेस के संजय प्रताप जायसवाल विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 5,843 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संजय प्रताप जायसवाल को 55,950 वोट मिले, जबकि राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 50,107 वोट प्राप्त हुए। वहीं, तीसरे स्थान पर सपा के प्रत्याशी राम ललित चौधरी रहे, जिन्हें चुनाव में 38,476 से अधिक वोट मिले। रांजेद्र प्रसाद चौधरी 2007 में रामनगर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर जीते थे।
2012 का नतीजा
2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रुधौली विधानसभा सीट से कांग्रेस के संजय प्रताप जायसवाल विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 5,843 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संजय प्रताप जायसवाल को 55,950 वोट मिले, जबकि राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 50,107 वोट प्राप्त हुए। वहीं, तीसरे स्थान पर सपा के प्रत्याशी राम ललित चौधरी रहे, जिन्हें चुनाव में 38,476 से अधिक वोट मिले। रांजेद्र प्रसाद चौधरी 2007 में रामनगर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर जीते थे।
2017 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2017: भाजपा ने जीता चुनाव
2012 के बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव हुए। इन चुनावों में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा, क्योंकि राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इसका असर बस्ती की रुधौली विधानसभा सीट पर भी देखने को मिला। चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय प्रताप जायसवाल विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 21,805 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में संजय प्रताप जायसवाल को 90,228 वोट मिले, जबकि राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 68,423 वोट प्राप्त हुए। वहीं, कांग्रेस के सईद अहमद खान 51,743 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। संजय की रुधौरी में ये लगातार दूसरी जीत थी। हालांकि, ये जीत दल बदलकर मिली थी।
2012 के बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव हुए। इन चुनावों में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा, क्योंकि राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इसका असर बस्ती की रुधौली विधानसभा सीट पर भी देखने को मिला। चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय प्रताप जायसवाल विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 21,805 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में संजय प्रताप जायसवाल को 90,228 वोट मिले, जबकि राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 68,423 वोट प्राप्त हुए। वहीं, कांग्रेस के सईद अहमद खान 51,743 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। संजय की रुधौरी में ये लगातार दूसरी जीत थी। हालांकि, ये जीत दल बदलकर मिली थी।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2022: सपा ने मारी बाजी, राजेंद्र ने लगातार दो बार मिली हार के बाद की वापसी
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रुधौली विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के राजेंद्र प्रसाद चौधरी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संगीता देवी उर्फ संगीता प्रताप जायसवाल को 15,226 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 86,360 वोट मिले, जबकि संगीता देवी उर्फ संगीता प्रताप जायसवाल को 71,134 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अशोक कुमार 37,618 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रुधौली विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के राजेंद्र प्रसाद चौधरी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संगीता देवी उर्फ संगीता प्रताप जायसवाल को 15,226 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 86,360 वोट मिले, जबकि संगीता देवी उर्फ संगीता प्रताप जायसवाल को 71,134 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अशोक कुमार 37,618 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।