महिलाओं ने दी चुनौती, अगर 33 फीसदी आरक्षण नहीं मिला तो लोकसभा चुनाव में दबेगा 'नोटा'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महिला संगठनों ने 2019 के लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले सभी राजनीतिक दलों को चुनौती दी है कि टिकट वितरण में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण नहीं मिला तो वे मतदान के वक्त 'नोटा' दबाने से पीछे नहीं हटेंगी। करीब 18 सौ महिला संगठनों को साथ लेकर देशभर की महिलाओं से मन की बात करने वाली महिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि राजनीतिक दल संसद में जानबूझकर महिला आरक्षण बिल को पास नहीं होने दे रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं महिलाएं दो कदम आगे न निकल जाएं। महिला संगठनों ने तकरीबन सभी राजनीतिक दलों की घोषणा पत्र कमेटी के अध्यक्षों को 11 सूत्रीय मांगपत्र सौंप दिया है।
'नेशनल अलायंस फॉर वूमेंस रिजर्वेशन बिल' संगठन की पदाधिकारी डॉ. रंजना कुमारी ने बुधवार को एक कार्यक्रम में बताया कि इस चुनाव में महिलाओं की बड़ी भूमिका रहेगी। वे तय करेंगी कि संसद में कौन बैठेगा। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिलाने के लिए विभिन्न महिला संगठन 23 साल से लड़ाई लड़ रहे हैं। यह कोई नहीं कहता कि वे इस बिल के पक्ष में नहीं हैं। सभी आश्वासन देते हैं कि यह बिल पास होना चाहिए, लेकिन राजनीतिक दल साथ में कोई न कोई बहाना भी लगा देते हैं।
जैसे कोई कहता है कि हमारे पास तो पूर्ण बहुमत नहीं है तो कोई दूसरा दल यह कह कर दूर हट जाता है कि सहयोगी पार्टियां अभी इस पर एकमत नहीं हैं। भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है और इस पार्टी ने 2014 में अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहा भी था कि वह महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देगी। भाजपा ने महिलाओं के साथ धोखा किया है। रंजना कुमारी के मुताबिक, एक सोची-समझी रणनीति के तहत महिलाओं को घर की चाहरदीवारी के भीतर बैठाने का प्रयास किया जा रहा है। अब हमारी लड़ाई 33 प्रतिशत नहीं, बल्कि संसद में 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व कराने के लिए होगी।
खुद का वेतन बढ़ाने वाला बिल तो मिनटों में पास हो जाता है : पद्मिनी कुमार
ज्वाइंट वीमेन प्रोग्राम (जेडब्लूपी) की पदाधिकारी पद्मिनी कुमार ने कहा, मौजूदा समय में केवल 12 फीसदी महिलाएं संसद में हैं। जब भी आरक्षण बिल आता है तो सांसद उसे अनदेखा कर देते हैं। अगर उनका वेतन बढ़ाने वाला बिल आता है तो वह चंद मिनटों में पास हो जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को पांच हजार से ज्यादा पत्र लिखे गए, मगर उन्होंने मिलने का समय नहीं दिया। एनडीए सरकार के पास दो तिहाई बहुमत है, वह चाहती तो महिला आरक्षण बिल आसानी से पास हो सकता था।
अगर सभी राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र में महिला आरक्षण बिल को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाते हैं तो लोकसभा चुनाव में 'नोटा' का इस्तेमाल करने का विकल्प महिलाओं के पास है। पिछले साल चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी महिलाओं ने पुरुषों की बजाए अधिक वोट डाले थे। अब हमारी लड़ाई 33 फीसदी के लिए नहीं, बल्कि पचास फीसदी आरक्षण के लिए होगी। ज्वाइंट वीमेन प्रोग्राम के 11 सूत्रीय एजेंडे में स्वास्थ्य, शिक्षा, संसद और विधानसभाओं में बराबर का प्रतिनिधित्व, सुरक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
भारत में महिलाओं की स्थिति पर एक नजर
जॉर्ज टाउन इंस्टिट्यूट ग्लोबल रैंकिंग ऑफ वूमेन इंक्लूजन एंड वेल बीइंग, की रिपोर्ट में भारत का नंबर 131वां है। इस सर्वे रिपोर्ट में कुल 152 देश शामिल किए गए हैं। शीर्ष पांच देशों में आयरलैंड, नार्वे, स्विट्जरलैंड, सलोवेनिया और स्पेन हैं। भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति को देखें तो पाकिस्तान 150, अफगानिस्तान 152, बांग्लादेश 127, म्यांमार 119, भूटान 108, नेपाल 85, चीन 87 और श्रीलंका 97वें स्थान पर है। साल 2012 के दौरान भारत में एक लाख महिलाओं के पीछे अपराध होने की दर 41.7 फीसदी थी, जबकि 2016 में यह दर बढ़ कर 55.2 फीसदी हो गई है। अगर दस साल पहले यानी 2007 की बात करें तो भारत में हर घंटे 21 महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं होती थी, 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 39 हो गया है।
साल महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं
2013 309546
2014 339457
2015 329243
2016 338954
भारत में अभी तक राष्ट्रीय विधायिका में केवल 12 फीसद महिलाएं
महिलाओं का विधायिका में प्रतिनिधित्व, यदि इस मुद्दे पर बात की जाए तो भारत में केवल 12 फीसदी महिलाएं ही राष्ट्रीय विधायिका में स्थान पा सकी हैं। खास बात है कि जनसंख्या में महिलाओं का प्रतिशत 48 है। आयरलैंड, नार्वे, स्विट्जरलैंड, सलोवेनिया और स्पेन की विधायिका तीस फीसदी सीटों पर महिलाएं हैं। न्यूजीलैंड में 38 फीसदी महिलाओं का संसदीय सीटों पर कब्जा है। अमेरिका में सीनेट के दोनों सदनों को देखें तो महिलाओं का प्रतिशत 22 है। भारत में फिलहाल लोकसभा की 542 सीटों में से 64 पर महिलाएं हैं, जबकि उपरी सदन यानी राज्यसभा में 237 सीटों में से 27 पर महिलाएं हैं।
ये आंकड़े भी कुछ कहते हैं
मातृ-मृत्यु दर - 130/एक लाख जीवित जन्म पर
शिशु मृत्यु दर - 34/एक हजार जीवित जन्म पर
लिंगानुपात - 943
शिशु लिंगानुपात - 919
महिला साक्षरता दर - 65.46
साक्षरता दर में लिंग भेद - 16.8
महिलाओं का भूमि पर स्वामित्व - 12.8 फीसदी से कम
महिला रोजगार दर - 25.3 फीसद
महिला रोजगार में गिरावट 10 साल में - 30.2 प्रतिशत से 25.3 पर
महिला विधानसभा सदस्यों की भागीदारी - 9 फीसदी
महिला सांसदों की भागीदारी - 11.8 फीसदी