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ब्रिक्स की महिला सांसदों ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ एक दूसरे की मदद जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो/जयपुर
Updated Sun, 21 Aug 2016 02:37 AM IST
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ब्रिक्स
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ब्रिक्स देशों की महिला सांसदों के दो दिवसीय सम्मेलन में आतंकवाद, ग्लोबल वार्मिंग जैसे पर्यावरणीय मुद्दे छाए रहे। सांसदों की ओर से कहा गया कि आतंकवाद जैसी वैश्विक समस्या के समाधान के लिए सभी देश एक-दूसरे की मद्द करें। आपसी सहयोग के बिना आतंकवाद से निपटना काफी मुश्किल है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में शनिवार से ब्रिक्स देशों की महिला सांसदों का दो दिवसीय सम्मेलन राजस्थान विधानसभा में शुरू हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने किया।
ब्रिक्स देशों में शामिल ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, पांच देशों की 42 महिला सांसद इस सम्मेलन में शिरकत कर रही हैं। तकनीकी सत्र में आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए ब्राजील की सांसद ने कहा कि दुनिया में आतंकवाद से सभी प्रभावित हो रहे हैं। इसके खिलाफ सभी देशों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।
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राजस्थान की राजधानी जयपुर में शनिवार से ब्रिक्स देशों की महिला सांसदों का दो दिवसीय सम्मेलन राजस्थान विधानसभा में शुरू हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने किया।
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ब्रिक्स देशों में शामिल ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, पांच देशों की 42 महिला सांसद इस सम्मेलन में शिरकत कर रही हैं। तकनीकी सत्र में आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए ब्राजील की सांसद ने कहा कि दुनिया में आतंकवाद से सभी प्रभावित हो रहे हैं। इसके खिलाफ सभी देशों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।
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चिपको आंदोलन को भी जाता है श्रेय
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उद्घाटन अवसर पर सुमित्रा महाजन ने पर्यावरण संरक्षण और विश्व शांति की बात भी कही। जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक असमानता जैसे विषय ब्रिक्स देशों के बीच साझा चुनौतियां हैं। राजस्थान में 18वीं सदी में जब पर्यावरण पर संकट आया तो यहां की अमृता देवी विश्नोई ने चिपको आंदोलन कर महिला नेतृत्व क्षमता की मिसाल पेश की थी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण परिवर्तन का सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को ही है। इस कारण आयुर्वेद के अनुसार हमारे घरों में तुलसी का पौधा लगाने और बरगद पूजन की परंपरा रही है, जिसका निर्वहन महिलाएं लम्बे समय से करती आ रही हैं। मौजूदा हालात में पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने आह्वान किया कि महिलाएं अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने रास्ते खुद बनाएं।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण परिवर्तन का सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को ही है। इस कारण आयुर्वेद के अनुसार हमारे घरों में तुलसी का पौधा लगाने और बरगद पूजन की परंपरा रही है, जिसका निर्वहन महिलाएं लम्बे समय से करती आ रही हैं। मौजूदा हालात में पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने आह्वान किया कि महिलाएं अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने रास्ते खुद बनाएं।