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क्यूआर कोड की मदद से चंद सेकेंडों में होगी नकली दवा की पहचान
Thu, 21 Feb 2019 04:18 AM IST
आसिम खान
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Thu, 21 Feb 2019 04:18 AM IST
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सरकार ने दवाओं की नकल पर अंकुश लगाने के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया है। इससे असली और नकली दवा की पहचान महज चंद सेकेंडों में की जा सकेगी। उपभोक्ता टैबलेट से लेकर कफ सीरप तक किसी भी दवा पर मौजूद क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन कर दवा की हकीकत के बारे में आसानी से जान सकेगा। फार्मास्युटिकल मंत्रालय के अनुसार, सरकारी अस्पतालों, जन औषधि केंद्रों पर आपूर्ति की जाने वाली दवाओं पर आगामी एक अप्रैल से क्यूआर कोड अनिवार्य है। वहीं बाजार में बिकने वाली अन्य सभी दवाओं के लिए यह व्यवस्था एक अप्रैल, 2020 से लागू करने का आदेश है।
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दवा कंपनियों ने मंत्रालय के आदेश के अनुपालन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। क्यूआर कोड से उपभोक्ताओं के साथ सीधे तौर पर कंपनियों को भी फायदा मिलेगा। नकल से हर साल कई हजार करोड़ रुपये का नुकसान देश में व्यापार करने वाली दवा कंपनियों को होता है। दूसरी ओर मरीज को नकली दवा असर नहीं करती और उसका मर्ज बढ़ जाता है। मंत्रालय के मुताबिक, क्यूआर कोड में दवा की पूरी जानकारी छिपी होगी। इसमें बैच नंबर, सॉल्ट, कंपनी का नाम, कीमत, हेल्पलाइन नंबर, जारी करने की तिथि और खराब होने की तिथि शामिल होगी।
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असंभव होगी नकल
मंत्रालय के मुताबिक, दवा की नकल बाजार में उतारने वालों के लिए क्यूआर कोड की नकल तैयार करना असंभव है, क्योंकि यह हरेक बैच नंबर के साथ बदलेगा। ऐसे में देश को नकली दवाओं से पूरी तरह से मुक्ति मिलेगी। मौजूदा समय असली और नकली दवा की पहचान करना उपभोक्ताओं के लिए टेढ़ी खीर है।
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4,000 करोड़ का है नकल बाजार
एसोचैम के मुताबिक, भारत में करीब 25 फीसदी दवाइयां नकली बिकती हैं। हमारा देश इस मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है, जहां यह व्यापार करीब चार हजार करोड़ रुपये का है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, भारत में दस में से एक दवा नकली है। उद्योग जगत भी लंबे समय से इस समस्या का हल खोज रहा था, जो तकनीक ने निकाल दिया। गौरतलब है कि देशभर के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर नकली दवाओं का जखीरा आए दिन पकड़ा जाता है। ऐसे में नकली दवा उद्योग से निजात दिलाने में क्यूआर कोड व्यवस्था भविष्य में मील का पत्थर साबित होगी।