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Foreign Policy: विदेश नीति में बदलाव के साथ वैश्विक पटल पर तेजी से बढ़ा भारत का दबदबा
Mon, 19 Sep 2022 05:31 AM IST
Amit Mandal
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 19 Sep 2022 05:31 AM IST
सार
अगले साल वैश्विक कूटनीति में भारत का कद और मजबूत होगा। भारत को एससीओ के बाद इसी साल दिसंबर में जी-20 और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भी मिलेगी।
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एससीओ समिट में पीएम मोदी
- फोटो : ANI
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विस्तार
उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर में हुई शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में भारत की बदली विदेश नीति और बढ़ते कूटनीतिक धमक की झलक मिली। बैठक में भारत ने चीन से दूरी बनाई, तो यूक्रेन युद्ध मामले में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नसीहत देने से भी परहेज नहीं किया। दरअसल बीते कुछ सालों में भारत की विदेश नीति में अहम बदलाव आया है। भारत की विदेश नीति अब ताकतवर देश या इससे जुड़े समूह केंद्रित न हो कर कंट्री टू कंट्री केंद्रित होती जा रही है।
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अगले साल वैश्विक कूटनीति में भारत का कद और मजबूत होगा। भारत को एससीओ के बाद इसी साल दिसंबर में जी-20 और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भी मिलेगी। अगले ही साल भारत में जी-20 और एससीओ की अहम बैठकें होंगी। इसके अलावा अगले ही साल भारत को जी-7 देशों के समूह में प्रवेश मिलने की मजबूत संभावना बन रही है। इसके सम्मेलन में बतौर मेजबान भारत को आमंत्रित करने वाले जर्मनी के साथ कुछ और सदस्य देश इस समूह में भारत को शामिल करना चाहते हैं।
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बीते दो तीन सालों में भारत की विदेश नीति में अहम बदलाव आया है। वैश्विक मुद्दों पर भारत अपने हित में स्वतंत्र रुख अपना रहा है। हालिया ताइवान-चीन तनाव, यूक्रेन युद्ध जैसे अहम मुद्दे पर भारत ने स्वतंत्र रुख अपनाया। अमेरिका सहित कई देशों के दबाव को दरकिनार कर न सिर्फ रूस की सार्वजनिक निंदा नहीं की, बल्कि उससे तेल आयात भी जारी रखा।
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नफा-नुकसान के मुताबिक फैसले
सरकारी सूत्र ने कहा कि विदेश नीति में बदलाव स्वतंत्र विदेश नीति की ओर बढ़ने का इशारा है। भारत ने हाल ही में इसकी कई बानगी पेश की है। हम किसी मुद्दे पर अपने नफा-नुकसान के आधार पर स्टैंड ले रहे हैं। वैश्विक समूहों में भी भारत अपनी अलग छवि बना रहा है। एक तरफ वह एससीओ का अहम सदस्य है, जिसे अमेरिका विरोधी कहा जा रहा है। दूसरी ओर वह क्वाड का सदस्य है, जिसे चीन विरोधी मंच माना जाता है। इसके अलावा भारत उस जी-20 समूह का भी सदस्य है जिसके अमेरिका-चीन जैसे परस्पर विरोधी देश भी सदस्य हैं।
नए साल में मिलेगी नई कूटनीतिक ताकत
वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भारत के लिए अगला वर्ष बेहद अहम साबित होगा। इस साल भारत बतौर अध्यक्ष जी-20, एससीओ सम्मेलनों की मेजबानी करेगा। इन समूहों की अध्यक्ष होने के नाते भारत को मनपसंद देशों को इन सम्मेलनों में बुलाने का अधिकार मिलेगा। ऐसे में कूटनीति के स्तर पर अपना कद बढ़ाने का उसे बड़ा मौका हाथ लगेगा। जी-20 सम्मेलन में भारत ने बांग्लादेश, नीदरलैंड, मिस्र, मॉरिशस, संयुक्त अरब अमीरात, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन को बुलाने की योजना तैयार की है।
जैसे को तैसा के अंदाज में जवाब
सरकारी सूत्र का कहना है कि हम जैसे को तैसा के अंदाज में जवाब दे रहे हैं। चीन को संदेश है कि अगर उसे हमारे हितों की चिंता नहीं है तो हम भी उसके हितों की चिंता नहीं करते। चीन को लगता था कि दोकलम विवाद की तरह पूर्वी लद्दाख एलएसी विवाद को खत्म करने की मामूली पहल को भारत हाथों हाथ लेगा। इसी तरह रूस की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी भारत को रास नहीं आ रही।