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कांग्रेस की बेचैनी में दिख रही भाजपा को उम्मीद, मुस्लिम मतों में बिखराव पर ही टिकी है आस

Thu, 14 Apr 2016 02:11 AM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, दिल्ली।
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, दिल्ली। Updated Thu, 14 Apr 2016 02:11 AM IST
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With eye on 2016 polls, BJP woos Muslims in Assam
महिलाओं के बीच भी भाजपा के प्रति रूझान - फोटो : PTI

पूर्वोत्तर का द्वार असम में भाजपा को पहली बार कमल खिलने की उम्मीद है। मगर यह उम्मीद विधानसभा चुनाव हर हाल में जीतने के आत्मविश्वास से नहीं बल्कि कांग्रेसी खेमे में छाई बेचैनी से पैदा हुई है। खासतौर से अंतिम चरण में मुसलिम बहुल इलाकों में हुए रिकार्ड मतदान के कारण पार्टी नेताओं में चिंता भी है।

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पार्टी नेताओं को डर है कि अंतिम चरण के अंतिम दो-तीन घंटों के दौरान हुए ताबड़तोड़ मतदान कहीं कांग्रेस के पक्ष में अल्पसंख्यकों के ध्रुवीकरण का नतीजा तो नहीं था? चूंकि पार्टी के रणनीतिकार बिहार विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के साथ-साथ राजद-जदयू के परंपरागत मतों का एक दूसरे में सफल स्थानांतरण का हश्र देख चुकी है, इसलिए असम में हर हाल में जीत का सार्वजनिक दावा करने से पार्टी बच रही है।
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पार्टी के नेता मानते हैं कि भाजपा गठबंधन को बहुमत मिलना इस पर निर्भर करेगा कि मुस्लिम मत कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी में बंटी या नहीं। प्रथम चरण के मतदान के बाद भाजपा खेमे में खासा उत्साह था। उत्साह का कारण कांग्रेसी खेमे से आ रही बेचैनी की सूचना थी। मगर अंतिम चरण में हुए ताबड़तोड़ मतदान ने भाजपा की भी बेचैनी बढ़ाई है। 

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मुस्लिम मतों में बिखराव पर ही टिकी है आस

With eye on 2016 polls, BJP woos Muslims in Assam
assam assembly election - फोटो : PTI

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक अंतिम तीन घंटे में इतनी जबर्दस्त वोटिंग हुई कि मुसलिम बहुल क्षेत्र में मतदान का आंकड़ा 90 फीसदी को पार कर गया। पार्टी को डर है कि कहीं अंतिम समय में मुस्लिम मतदाता भाजपा को हराने की नीयत से तो इतनी बड़ी संख्या में बाहर नहीं निकले।

पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि अगर अजमल की पार्टी मुस्लिम मतों में ठीक ठाक बंटवारा नहीं कर पाई तो भाजपा गठबंधन बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाएगा। क्योंकि राज्य की करीब करीब 50 फीसदी विधानसभा सीटें मुस्लिम बहुल हैं।

भाजपा की चिंता का एक बड़ा कारण अंतिम चरण के मतदान के बाद कांग्रेसी खेमे में छाई चुप्पी भी है। पहले चरण के मतदान के बाद राज्य कांग्रेस के कई नेताओं की ओर से पार्टी के प्रदर्शन के संदर्भ में निराशाजनक बयान आए थे। मगर अंतिम चरण के बाद कांग्रेसी खेमे में भी चुप्पी है। भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि कांग्रेस भी अंतिम चरण में ताबड़तोड़ वोटिंग का कारण तलाशने में जुटी है।

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