शीतकालीन सत्र का पहला दिन: पीएम मोदी ने अटल को तो पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने नेहरू को याद किया
- सोमवार से शुरू हुआ संसद का शीतकालीन सत्र
- राज्यसभा के ऐतिहासिक 250 वें सत्र में चले व्यंग बाण
- वर्तमान और पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने हिसाब से गिनाई उपलब्धियां
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छे वक्ता हैं। जहर बुझे तीर और राजनीति का हर तरह का फ्लेवर छोड़ने में उनका जवाब नहीं है। प्रधानमंत्री की इस छवि के बरक्स पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बिल्कुल उलट स्वभाव के हैं। प्रधानमंत्री बिना पढ़े आत्मविश्वास के साथ हिंदी में बोलते हैं, तो वहीं पूर्व प्रधानमंत्री अंग्रेजी में लिखा हुआ भाषण पढ़ते हैं।
ऐसा कम हुआ है, प्रधानमंत्री के प्रत्युत्तर में पूर्व प्रधानमंत्री उतरे हों, लेकिन सोमवार को संसद में राज्यसभा के 250 वें एतिहासिक सत्र के दौरान यह क्षण देखने को मिला। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में रीतियों-नीतियों पर खूब चर्चा की। साथ ही राजनीतिक कटाक्ष करते हुए तालियां भी बजवाई तो जवाब में पूर्व प्रधानमंत्री भी पीछे नहीं रहे।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का नाम भी उनके जुबान पर आया। राज्यसभा के पहले सभापति सर्वपल्ली राधा कृष्णन, डॉ. भीमराव अंबेडकर, अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा राज्यसभा को लेकर कहे गए वक्तव्यों का हवाला दिया, लेकिन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का कहीं भी उन्होंने उल्लेख नहीं किया।
राज्यसभा और लोकसभा को समान मानते थे पंडित नेहरू: पूर्व पीएम
पीएम मोदी के संबोधन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने संबोधन में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को याद किया। उन्होंने कहा कि नेहरू जी राज्यसभा और लोकसभा को समान मानते थे।
पं. नेहरू का हवाला देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं और देश का देश का संविधान संसद के दोनों सदनों के बीच में पारस्परिक सहयोग से ही अच्छी तरह आगे बढ़ सकता है। अपने संबोधन में मनमोहन सिंह ने राज्यसभा के पहले सभापति एस राधाकृष्णन, डॉ. भीमराव अंबेडकर, अयंगर और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा किए गए सुधार कार्यों का उल्लेख किया।
पीएम मोदी ने अपने अनुभव को याद किया। बताया कि राज्यसभा में उन्हें कितना सुंदर अनुभव देखने को मिला। उन्होंने राज्यसभा से पारित तीन तलाक, आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, जीएसटी, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति का जैसे जटिल विधेयक पारित किए जाने का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि राज्यसभा में कितना 'स्मूथ' तरीके से कामकाज हुआ। प्रधानमंत्री ने बताया कि राज्यसभा का 250वां सत्र, पहले सत्र से केवल बीता हुआ समय नहीं विचार एक विचार यात्रा रही। इसमें उन्होंने भारत की विकास यात्रा का प्रतिबिंब देखा। राज्यसभा को सेकेंड्री सदन नहीं, बल्कि सपोर्टिव सदन बताया।
प्रधानमंत्री के तुरंत बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बोलने खड़े हुए। मनमोहन सिंह ने लोकसभा में विधेयक को संसद की स्थाई समिति के पास चर्चा के लिए भेजे जाने से परहेज किए जाने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि 16वीं लोकसभा में 15वीं और 14वीं की तुलना में क्रमश: 60 और 71 फीसदी बिल संसदीय समितियों के पास नहीं भेजे गए। 16वीं लोकसभा में पेश किए गए विधेयकों में से केवल 25 फीसदी को ही समितियों के पास भेजा गया। उन्होंने मनी बिल के रूप में लाए गए बिलों को शक्ति का दुरुपयोग बताया और इस तरह के प्रयास से बचने की सलाह दी।