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पेगासस जांच मामला: जस्टिस रवींद्रन बोले- अभी तक नहीं मिला है आदेश, नहीं कर सकता टिप्पणी
Thu, 28 Oct 2021 07:23 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 28 Oct 2021 07:23 PM IST
सार
बुधवार को सीजेआई एन वी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपों की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों का तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त किया था।
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पेगासस जासूसी कांड
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन ने गुरुवार को कहा कि उन्हें अभी तक पेगासस मामले की जांच का आदेश नहीं मिला है इसलिए वह इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते। जस्टिस नवींद्रन को भारत में निगरानी के लिए इजरायली स्पाइवेयर पेगासस के कथित उपयोग की जांच की निगरानी का काम सौंपा गया है।
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अभी तक नहीं मिला आदेश
जांच के दायरे से जुड़े एक सवाल के जवाब में जस्टिस रवींद्रन ने कहा कि मुझे नहीं पता क्योंकि मुझे आदेश नहीं मिला है। 75 वर्षीय कानूनी विद्वान ने कहा कि जब तक मुझे शीर्ष अदालत से आदेश नहीं मिल जाता, तब तक मुझे कुछ भी पता नहीं चलेगा।
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तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त
बुधवार को याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीजेआई एन वी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपों की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों का तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त किया था। जस्टिस रवींद्रन को राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले की जांच की निगरानी का काम सौंपा।
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सीजेआई ने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली, पालन की जाने वाली प्रक्रिया और जांच रिपोर्ट तैयार करने के संबंध में समिति के कामकाज की देखरेख करेंगे। सुप्रीम कोर्ट इजरायली फर्म एनएसओ के स्पाइवेयर पेगासस के इस्तेमाल से भारतीय नागरिकों की जासूसी के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर ये आदेश दिया था।
प. बंगाल में जारी रहेगी जांच
पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर पश्चिम बंगाल के विभिन्न व्यक्तियों के कथित फोन टैपिंग की जांच के लिए ममता बनर्जी सरकार द्वारा गठित दो सदस्यीय आयोग पहले की ही तरह काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने बुधवार के आदेश में पैनल को लेकर कुछ नहीं कहा है। इसके सदस्यों में से एक जस्टिस (सेवानिवृत्त) ज्योतिर्मय भट्टाचार्य ने ये बात कही।
शीर्ष अदालत ने बुधवार को भारत में कुछ लोगों की निगरानी के लिए इजरायली सॉफ्टवेयर पेगासस के कथित इस्तेमाल की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों का तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त किया था। जस्टिस (सेवानिवृत्त) भट्टाचार्य ने गुरुवार को कहा कि चूंकि बुधवार के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हमारा (दो सदस्यीय आयोग) जिक्र नहीं किया गया है, इसलिए हमारी गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगी है।