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क्या तेलंगाना में लागू नहीं होगा VB-G RAM G एक्ट?: मंत्री बोले- खजाने पर पड़ेगा बोझ, SC जाएगी रेवंत सरकार

Sun, 28 Jun 2026 09:46 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 28 Jun 2026 09:46 AM IST
सार

तेलंगाना सरकार ने केंद्र के प्रस्तावित VB-G RAM G एक्ट का विरोध करते हुए उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना जताई है। राज्य सरकार का कहना है कि वह मौजूदा स्वरूप में इस कानून को स्वीकार नहीं करेगी। सरकार अन्य राज्यों के साथ साझा कानूनी रणनीति बनाने पर भी विचार कर रही है। इस मुद्दे पर अंतिम फैसला 2 जुलाई को राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया जाएगा।

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Will VB G RAM G Act not implemented in Telangana Minister says it burden exchequer Revanth government move SC
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने शनिवार को कहा है कांग्रेस सरकार VB-G RAM G एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है। यह नया कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लाने का प्रस्ताव है।

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सरकार ने नए कानून पर जताई आपत्ति
इस मुद्दे पर गठित राज्य मंत्रिमंडल की उप-समिति के अध्यक्ष एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने स्पष्ट कहा कि तेलंगाना सरकार 'विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (VB-G RAM G)' को उसके मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगी। शनिवार को मंत्री ने कैबिनेट उप-समिति के अन्य सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। बैठक में प्रस्तावित कानून के कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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कर्नाटक और केरल से समन्वय की तैयारी
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, उप-समिति ने कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्रियों से बातचीत करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य यह जानना है कि क्या दोनों राज्य राज्यों के अधिकारों और वित्तीय हितों की रक्षा के लिए कोई साझा कानूनी रणनीति या अन्य समन्वित कदम उठाने को तैयार हैं। उप-समिति का मानना है कि प्रस्तावित कानून के व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभावों के बारे में आम लोगों को अभी तक पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई है।
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2 जुलाई को कैबिनेट लेगी अंतिम फैसला
समिति ने इस पूरे मुद्दे को 2 जुलाई को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में रखने का निर्णय लिया है। उम्मीद है कि कैबिनेट इस पर अंतिम फैसला करेगी कि तेलंगाना केंद्र के प्रस्तावित ढांचे को अपनाए, अपना अलग कानून बनाए, सुप्रीम कोर्ट का रुख करे या फिर कानूनी और प्रशासनिक उपायों का संयुक्त रास्ता अपनाए।


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खजाने पर पड़ेगा 2,500 करोड़ रुपये का बोझ 
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस बीच कई नागरिक समाज संगठनों ने तेलंगाना सरकार से अपील की है कि वह केंद्र के प्रस्तावित ढांचे को लागू करने के बजाय संविधान के तहत अपना अलग रोजगार गारंटी कानून बनाए। उनका तर्क है कि यदि केंद्र का प्रस्तावित ढांचा अपनाया गया तो राज्य के खजाने पर करीब 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।

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