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Central Govt: क्या कैबिनेट सचिव की ये सलाह मानेंगे मंत्रालयों के नौकरशाह, कम हो रहा कर्मचारियों का विश्वास!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 15 Jul 2025 10:20 PM IST
सार

कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों में आम लोगों से मिलने को लेकर 'हिचकिचाहट' की भावना पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुलाकातें जमीनी हालात को समझने, गलतफहमियों को दूर करने और सरकारी नीतियों की वास्तविक स्थिति जानने में मदद कर सकती हैं।

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Will the bureaucrats of the ministries follow this advice of Cabinet Secretary
सी. श्रीकुमार, महासचिव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार में कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी. सोमनाथन ने 9 जुलाई को भारत सरकार के सभी सचिवों को एक महत्वपूर्ण डीओ पत्र लिखा था। इसमें सरकारी कर्मियों की एक चिंता का समाधान करने की बात कही गई है। पत्र में कहा गया है कि सचिव और वरिष्ठ अधिकारी, गैर-सरकारी व्यक्तियों, जिनमें मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों और महासंघों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, से मिलने में अनिच्छा जताते हैं। कैबिनेट सचिव ने अपने पत्र में ट्रेड यूनियन नेताओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से जुड़ने के महत्व पर जोर दिया है। एआईडीईएफ (अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया है। साथ ही उन्होंने कहा, अगर यह पहल सही मायने में जमीन पर उतरती है तो सरकार के प्रति कम हो रहा कर्मियों का विश्वास मजबूत हो सकता है। अब देखना ये है कि क्या विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ नौकरशाह, कैबिनेट सचिव की सलाह मानते हैं या नहीं।  
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श्रीकुमार के अनुसार, कैबिनेट सचिव के पत्र का भाव यह है कि इस तरह के जुड़ाव से सरकार को विभिन्न मुद्दों की जमीनी हकीकत समझने में मदद  मिलती है। सरकारी नीतियों के बारे में गलतफहमियों को दूर करने में मदद मिलती है। नए विचारों और सुधार के लिए जगह बनती है। इस सकारात्मक कदम पर सी श्रीकुमार ने सतर्क आशावाद व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार और रक्षा असैन्य कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक ट्रेड यूनियन नेता के रूप में अपनी 43 वर्षों की सेवा में, उन्होंने पहली बार सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों में मान्यता प्राप्त यूनियन प्रतिनिधियों से मिलने में इतनी व्यापक अनिच्छा देखी है।
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श्रीकुमार ने कहा, अतीत में, कैबिनेट सचिव और वरिष्ठ नौकरशाह जैसे टीएन शेषन, एनएन वोहरा, टीएसआर सुब्रमण्यम और आरके सिंह हमेशा, कर्मियों के मुद्दों को लेकर एक्टिव रहे हैं। उस दौरान यहां तक कि अनौपचारिक, अनिर्धारित बैठकों से भी अक्सर कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित मुद्दों को सुलझाने में मदद मिल जाती थी। सचिव, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र (जेसीएम) के तहत विभागीय परिषद के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य करते हैं। नियमानुसार, साल में कम से कम तीन बार बैठकें आयोजित करने के लिए बाध्य हैं।

मौजूदा समय में इन बैठकों के अभाव के कारण परामर्श तंत्र में कर्मचारियों का विश्वास कम हुआ है। लालफीताशाही लगातार फल-फूल रही है। कई मुद्दे वर्षों तक अनसुलझे रहते हैं। इससे कर्मचारियों को महंगे कानूनी उपायों का सहारा लेना पड़ता है। श्रीकुमार ने कहा, यहां तक कि जब कर्मचारी अदालत में जीत भी जाते हैं, तब भी सरकार अक्सर मामलों को सर्वोच्च न्यायालय में घसीट ले जाती है। फैसलों को केवल याचिकाकर्ताओं के लिए ही लागू किया जाता है, जिससे समान मामलों पर मुकदमों की संख्या बढ़ जाती है।


श्रीकुमार द्वारा उजागर की गई हालिया शिकायतों में से एक आयुध कारखानों के निगमीकरण के बाद के दौर में सरकार का अनुकंपा नियुक्तियों से इनकार करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद, इस बाबत पिछले एक साल में कोई ठोस आदेश जारी नहीं किए गए हैं। 2016 से, बार-बार अनुरोध के बावजूद, रक्षा मंत्रालय में विभागीय परिषद की संयुक्त परामर्शदात्री समिति की कोई बैठक नहीं बुलाई गई है। यह उदासीनता मंत्रियों तक भी फैल गई है, जो कभी यूनियनों और नौकरशाहों के बीच संवाद को सुगम बनाने में सक्रिय भूमिका निभाते थे।

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श्रीकुमार ने कहा, सरकार और अफसरों के इस व्यवहार से केवल सेवारत कर्मचारी ही प्रभावित नहीं हैं। पेंशनभोगियों को भी पेंशन, सेवांत लाभ और सीजीएचएस चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जब तक नियमित बैठकें नहीं होंगी, कई अनसुलझे मुद्दे वैसे ही बने रहेंगे। इनमें आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का मामला भी शामिल है। यह आयोग कब काम शुरू करेगा, किसी को नहीं मालूम। श्रीकुमार ने कहा, हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार के सचिव, कैबिनेट सचिव की सलाह पर ध्यान देंगे। वे ट्रेड यूनियन व फेडरेशनों के साथ नियमित परामर्श शुरू करेंगे, ताकि शिकायतों का समय पर समाधान किया जा सके।
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