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कोविड-19 का संक्रमण और मोदी सरकार 2.0 की सालगिरह, क्या इस बार कुछ फीकी रहेगी?

Fri, 22 May 2020 07:00 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 22 May 2020 07:00 PM IST
सार

  • 2014 से बड़ी जीत लेकर सत्ता में लौटे थे प्रधानमंत्री
  • 30 मई 2019 को 57 मंत्रियों (24 केंद्रीय, 9 स्वतंत्र प्रभार और 24 राज्यमंत्री) के साथ ली थी शपथ
  • अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाना, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर को अलग केंद्र शासित राज्य बनाया
  • नागरिकता संशोधन कानून बना
  • अमेरिका और चीन के राष्ट्रपतियों के साथ संबंधों को नया आयाम दिया, पाकिस्तान अलग-थलग पड़ा

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will PM modi celebrate first anniversary of modi second term in the wake of pandemic
pm modi swearing ceremony - फोटो : पीटीआई (सांकेतिक)

विस्तार

कोविड-19 के संक्रमण देश में लगातार बढ़ रहा है, इसके साथ ही प्रधानमंत्री के दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने की तारीख 30 मई 2019 भी नजदीक आ रही है।

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24 केंद्रीय, 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 24 राज्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री ने शपथ लेकर पिछले एक साल में कई एतिहासिक कदम उठाए हैं, लेकिन क्या इस बार सालगिरह कुछ फीकी ही रहने वाली है?
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अभी केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों में इसको लेकर कोई खास पहल नहीं दिखाई दे रही है। एक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस बार देश महामारी से जूझ रहा है। पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान ने तबाही मचाई है, अभी पहले इससे तो निबट लें।

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कोविड-19 संक्रमण से पार पाना आसान नहीं

कोविड-19 से निबटने में केंद्र सरकार के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल नीति आयोग के सदस्य के अनुसार संक्रमण से पार पाना बहुत आसान नहीं है। प्रधानमंत्री ने राहत पैकेज के रूप में 20 लाख करोड़ रुपये की घोषणा की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कुछ खास नहीं होने वाला है।


देश के पांच राज्यों में संक्रमण के मामले काफी बड़ी संख्या (हर रोज 6 हजार के करीब) में सामने आने लगे हैं। मौत का भी आंकड़ा प्रतिदिन 150 के करीब पहुंच रहा है।

वहीं गरीब मजदूरों, प्रवासियों के जिला, ब्लाक, गांव तक पहुंचने, राज्यों, क्षेत्रों, बाजारों में सामाजिक दूरी, सावधानी के उपायों का पालन न हो पाने के कारण संक्रमण बढऩे के ही आसार हैं।

अनुमान है कि जून और जुलाई में इसका पीक देखने को मिल सकता है।

पश्चिम बंगाल, उड़ीसा में चक्रवाती तूफान

पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान अम्फान ने भारी तबाही मचाई है। उड़ीसा में भी तूफान के कारण लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखकर प्रधानमंत्री ने संक्षिप्त टीम के साथ खुद पश्चिम बंगाल राज्य का दौरा करके लोगों के दुख-दर्द को जानने, समझने की कोशिश की है।

उन्होंने फौरी राहत के तौर पर राज्य सरकार को एक हजार करोड़ रुपये की सहायता और तूफान में मारे गए लोगों के परिजनों को 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है।

प्रधानमंत्री के एतिहासिक फैसले ने बढ़ाई देश की साख

पिछले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों ने भारत की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय छवि में काफी निखार लाया था।

पुलवामा में आतंकी हमले के बाद शीर्ष नेतृत्व ने आतंकी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक का निर्णय लेकर पड़ोसी देश पाकिस्तान को आतंकवाद बर्दाश्त न करने का संदेश दिया था। प्

रधानमंत्री के कार्यकाल में यह भारत की दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक थी। अपने पांच साल के कामकाज के बल पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा को लोकसभा चुनाव-2019 में 2014 से भी अधिक सीटें मिलीं।

दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने, राज्य को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने और लद्दाख को इससे अलग करके नया केंद्र शासित प्रदेश की मान्यता दिलाई।

केंद्र सरकार के इस एतिहासिक और साहसिक निर्णय ने भारत की एक नई तस्वीर पेश की। केंद्र सरकार ने नागरिक संशोधन कानून का रास्ता साफ किया।

इसके तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश के गैरमुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता साफ हो सका।

हालांकि केंद्र सरकार के इस निर्णय को लेकर देश भर में अल्पसंख्यक समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन सरकार सभी के सवालों का जवाब दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी कामयाबी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आए। गुजरात के मोटेरा स्टेडियम में उनका भव्य स्वागत हुआ। इससे भारत और अमेरिका के बीच में रिश्ते की नई केमिस्ट्री बनी दिखाई पड़ रही है।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महाबलिपुरम में अनौपचारिक भेंट कार्यक्रम के साथ रिश्तों को नया आयाम दिया। प्रधानमंत्री ने इस तरह की बैठकों का दौर अपने पहले कार्यकाल में शुरू किया था।

दूसरे कार्यकाल में भी प्रधानमंत्री पाकिस्तान आतंकवाद के विरुद्ध अतंरराष्ट्रीय दबाव बनाने में सफल रहे हैं। पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने पर मुंह की खानी पड़ी है।

कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए भारत ने अपने नागरिकों को जनवरी 2020 में ही चीन के वुहान प्रांत से वापस लाने का साहस दिखाया। वंदे भारत मिशन के तहत दुनिया भर के देशों से भारतीय नागरिकों को वापस लाने का क्रम जारी है। इससे विदेशों में रह रहे भारतीयों को बड़ा बल मिला है।

प्रधानमंत्री के सातवें साल में  होगी कई चुनौतियां  

प्रधानमंत्री के रूप में छह वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके नरेंद्र मोदी के लिए सातवां साल कई बड़ी, कठिन चुनौती लेकर आ रहा है। कोविड-19 संक्रमण के कारण देश को सामाजिक, आर्थिक रूप से बड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है।

कारोबार, रोजगार, शिक्षा, उद्योग जगत से लेकर बाजार, किसान, खेत, खलिहान तक बड़ी चुनौतियों के उभरने के संकेत हैं। इससे पार पाना प्रधानमंत्री मोदी के लिए बहुत आसान नहीं होगा।

कोविड-19 संक्रमण में प्रवासी मजदूरों के अपने घर-गांव लौटने के प्रयास ने केंद्र सरकार और राज्यकारों की क्षमता, प्रबंधन, तैयारी के कौशल की पूरी पोल खोलकर रोक दी है।

इससे गांवों में भी सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को लेकर काफी दबाव बढ़ा है। देखना है प्रधानमंत्री आगे कैसे इससे पार पाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय चुनौती भी कम नहीं

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दुनिया बदल रही है। समीकरण भी बदल रहा है। भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन में बड़ी सफलता पाई है। अमेरिका का साथ भी मिल रहा है। यूरोप से भारत के लिए सहयोग की खबर है तो रूस तटस्थ बना हुआ है।

लेकिन पाकिस्तान, अफगानिस्तान में भारत के लिए चिंता के तमाम कारक खड़े हो रहे हैं। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद नासूर बना है, तो अफगानिस्तान में तालिबान की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।



पड़ोसी देशों को लेकर भारत के चारों ओर घेरा बढ़ रहा है। बांग्लादेश के साथ नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पहली बार अप्रत्याशित व्यवहार देखने को मिला, आगे इसे संतुलित करने का दबाव बढ़ रहा है।

इसी तरह से चीन भारत की सीमाओं में लगातार घुसपैठ, तनाव का दबाव बढ़ा रहा है। नेपाल ने भी आक्रामक तरीके से भारत के साथ सीमा विवाद का मुद्दा उठाने की पहल की है।

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