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West Bengal: केंद्रीय मंत्री पर हमले को लेकर बोले राज्यपाल- कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर मूकदर्शक नहीं बना रहूंगा

Sun, 26 Feb 2023 10:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 26 Feb 2023 10:27 PM IST
सार

विरोध प्रदर्शनों को लोकतंत्र का हिस्सा बताते हुए बोस ने कहा, हिंसा सभ्य आचरण का हिस्सा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा।

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Will not be a mute witness West Bengal Guv seeks report over attack on Union Minister
CV Anand Bose - फोटो : Twitter/@KeralaGovernor

विस्तार

केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक पर हमले को निंदनीय करार देते हुए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने रविवार को कहा कि वह कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर 'मूकदर्शक' नहीं बने रहेंगे। राजभवन की ओर से जारी एक बयान में बोस ने कहा कि उन्होंने शनिवार को हुई घटना के बारे में गृह राज्य मंत्री प्रमाणिक से बात की।

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उन्होंने कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि इस तरह की घटनाएं एक ऐसे देश में हो रही हैं जो अपनी पवित्र संस्कृति और सभ्य आचरण के शानदार इतिहास के लिए जाना जाता है। बयान में कहा गया है कि राज्यपाल राज्य में कहीं भी, कभी भी कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूती से हस्तक्षेप किया जाएगा कि शांति और सद्भाव बहाल हो।
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पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के दिनहाटा इलाके में प्रमाणिक के काफिले पर कथित तौर पर टीएमसी समर्थकों ने हमला किया था। प्रमाणिक ने दावा किया था कि काफिले पर न केवल पथराव किया गया, बल्कि गोलियां भी चलाई गईं और बम भी फेंके गए। हालांकि, इन आरोपों से टीएमसी ने इनकार करते हुए कहा कि भाजपा राज्य का माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है।
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राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर राज्यपाल बोस का यह पहला बयान है।  उन्होंने नवंबर में कार्यभार संभाला था। उन्होंने  कार्यभार संभालने के बाद से अब तक अपने पूर्ववर्ती जगदीप धनखड़ के विपरीत टीएमसी सरकार के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखा है। तृणमूल समर्थकों ने प्रमाणिक को उस समय काले झंडे दिखाए, जब वह भाजपा के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे। इसी दौरा दोनों दलों के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कई लोग घायल हो गए।

विरोध प्रदर्शनों को लोकतंत्र का हिस्सा बताते हुए बोस ने कहा, हिंसा सभ्य आचरण का हिस्सा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा। हिंसा को खत्म किया जाएगा। संविधान को उन सभी लोगों के द्वारा बरकरार रखा जाना चाहिए, जो ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बंगाल हर अधिकारी से उम्मीद करता है कि वह बिना किसी भय या पक्षपात के अपना कर्तव्य निभाए, चााहे  वह पुलिस विभाग में हो या मजिस्ट्रेट या शासन की किसी भी शाखा में। 

उन्होंने कहा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी तरह की ढिलाई अव्यवस्था और अराजकता को जन्म देगी, जिसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसी भी परिस्थिति में असामाजिक तत्वों को समाज को बंधन बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, राज्यपाल के रूप में यह सुनिश्चित करना मेरा कर्तव्य है कि पश्चिम बंगाल एक नरम राज्य बन जाए। मखमल के दस्ताने में लोहे की मुठ्ठी के साथ कानून का शासन स्थापित किया जाएगा। लोकतंत्र को भीड़तंत्र में तब्दील नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, जिम्मेदार कानून प्रवर्तन अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई रिपोर्ट मांगी जाती है। 

 
उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कहा, राज्यपाल भाजपा के कुछ नेताओं की टिप्पणियों का जिक्र करना भूल गए, जो लोगों को भड़का रहे हैं, जिससे हिंसा हो रही है।  टीएमसी के प्रवक्ता जय प्रकाश मजूमदार ने कहा, दिलीप घोष और सौमित्र खान जैसे लोग बार-बार ऐसी टिप्पणियां कर रहे हैं, लेकिन राज्यपाल या तो नोटिस करने में विफल रहे हैं या उन्होंने उन्हें नजरअंदाज करने का फैसला किया है। 

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