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किसान खाट आंदोलन को तुरुप का पत्ता मान रही है कांग्रेस

Tue, 06 Sep 2016 07:17 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 06 Sep 2016 07:17 PM IST
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Will Kisan Khat andolan bring change for Cong?
राहुल गांधी - फोटो : amar ujala

राजनीतिक अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर के फार्मूले से देवरिया और कुशीनगर से लेकर 24 अकबर रोड तक कांग्रेस गदगद है। पार्टी के एक राष्ट्रीय महासचिव ने इसे जहां खाट आंदोलन की संज्ञा दे दी, वहीं कांग्रेस के नेता मीम अफजल इसे कांग्रेस की काफी दूरदर्शी रणनीति बता रहे हैं। मीम अफजल यात्रा के दौरान लगातार राहुल गांधी के साथ हैं।

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बतौर मीम, खाट किसान नहीं ले गए।  दरअसल कुशीनगर में खाट का इंताम अखिलेश प्रताप सिंह ने किया था। अखिलेश प्रताप सिंह का यह इलाका है। वहीं कुशीनगर में पूर्व गृहराज्यमंत्री और कांग्रेस के नेता आरपीएन सिंह ने खाट का प्रबंध किया था।
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खाट पंचायत की शुरूआत प्रशांत किशोर की रणनीति के अनुरुप ही हुई। पहले राहुल गांधी ने भीड़ में से एक दो किसानों को अपनी बात कहने के लिए कहा और इसके बाद उन्होंने अपनी बात रखी। जाहिर है सबकुछ तय कार्यक्रम के अनुसार और जैसे ही कार्यक्रम समाप्त हुआ, स्थानीय नेता ने किसानों को खाट ले जाने का ईशारा कर दिया।

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माल्या ले गए नौ हजार करोड़

Will Kisan Khat andolan bring change for Cong?
vijay mallya

किसानों के खाट ले जाते ही टीवी चैनल इसे खाट लूट की संज्ञा देने लगे और भाजपा ने पलटवार करना शुरू किया। जवाब में मीम अफजल कहते हैं कि यही किसान भाजपा की खाट खड़ी कर देंगे।

भाजपा किसानों का अपमान कर रही है, क्योंकि किसानों ने खाट लूटी नहीं है बल्कि उन्हें ले जाने को कहा गया है। अफजल ने जोरदार ताना कसा है।

वह कहते हैं कि विजय माल्या नौ हजार करोड़ रुपये लूटकर विदेश भाग गए। तब भाजपा नेता कुछ नहीं बोले और अब एक खाट के लिए किसान की बेइज्जती कर रहे हैं।

खाट की राजनीति

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खाट वार्ता करते राहुल गांधी

भाजपा के पैटर्न पर कांग्रेस ने चुनावी पहल की है। यह वैसी ही है जैसे उ.प्र. के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 18 लाख लैपटॉप बाटने के बाद युवाओं को स्मार्ट फोन देने का राजनीतिक दांव फेका है।

कांग्रेस का भी नारा है-कर्जा माफ, बिजली बिल हाफ, समर्थन मूल्य का हिसाब लेंगे।

कांग्रेस सूत्रों की माने तो यह अभी शुरुआत भर है। दिल्ली तक 2500 किमी की यात्रा पूरी होने तक बहुत कुछ बदल जाएगा। पिछले साल तक लोगों की भीड़ के लिए तरसने वाली पार्टी को आगे भारी जनसमर्थन मिलने की उम्मीद है।

क्यों चुनी किसानों की खाट

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खाट वार्ता - फोटो : ANI

सूत्र बताते हैं यह निर्णय काफी ठोंक बजाकर हुआ है। इसके पीछे राहुल गांधी का यूपीए सरकार के समय में भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास कानून के लिए संघर्ष करना, 2014 के आम चुनाव के पहले ही किसानों को बाजार मूल्य का पांच गुना मुआवजा दिलाने का वादा रहा।

भूमि अधिग्रहण कानून में ऐसा हुआ भी और उ.प्र. में राजमार्गों, सड़कों के लिए हुए अधिग्रहण में किसानों को इसी हिसाब से मुआवजा देना पड़ा है।

ऐसे में किसान उ.प्र. चुनाव 2017 में कांग्रेस के लिए तुरुप का पत्ता है।

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