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Haryana: हरियाणा में 'आप' के साथ से क्या डगमगा जाएगा कांग्रेस का 'हाई कॉन्फिडेंस', भाजपा जैसी न हो जाए बगावत?

Fri, 06 Sep 2024 02:07 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 06 Sep 2024 02:07 PM IST
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सार
इस गठबंधन से कांग्रेस को कुछ फायदा नहीं होगा। इस गठबंधन में 'दिल्ली' भी अहम है। यानी दिल्ली में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव, यह मुद्दा भी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के ध्यान में है। दिल्ली में कांग्रेस पार्टी का खाता नहीं खुल सका है। ऐसे में हरियाणा का चुनावी गठबंधन, दिल्ली में कांग्रेस व आप के गठबंधन की राह तय करेगा।
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Will Congress high confidence be shaken by alliance with AAP in Haryana may there be a rebellion like BJP
हरियाणा की राजनीति - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर भले ही कांग्रेस पर बढ़त हासिल कर ली हो, मगर उसे टिकट न मिलने वाले नेताओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है। पूर्व मंत्री एवं विधायक सहित भाजपा के कई नेता पार्टी से किनारा कर रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी की अभी तक पहली सूची जारी नहीं हो सकी है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 'हाई कॉन्फिडेंस' का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चुनाव लड़ने के लिए 25 सौ से अधिक आवेदन मिले हैं। आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का गठबंधन होने की खबरें चल रही हैं।



विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, इसे लेकर पार्टी की राज्य इकाई में रोष व्याप्त है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस चुनाव में पार्टी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी। पार्टी के इंटरनल सर्वे में भी यह बात सामने आ चुकी है। ऐसे में 'आप' के साथ गठबंधन करने का मतलब, कांग्रेस के 'हाई कॉन्फिडेंस' को डगमगाना है। प्रदेश की सभी 90 सीटों पर कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार हैं। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का गठबंधन होता है तो पार्टी को कई सीटों पर भाजपा जैसी बगावत का सामना करना पड़ सकता है। 


कांग्रेस पार्टी की प्रदेश इकाई से जुड़े सूत्रों ने बताया, दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ इस विषय पर चर्चा जारी है कि आम आदमी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन किया जाए या नहीं। हालांकि कांग्रेस हाईकमान द्वारा जब इस संबंध में प्रदेश इकाई के नेताओं से पूछा गया तो सभी ने एक स्वर में 'आप' से गठबंधन नहीं करने की सलाह दी थी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दस में से 'आप' को एक सीट दी थी। उस सीट पर आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। फिलहाल हरियाणा विधानसभा में 'आप' का खाता नहीं खुल सका है। ऐसे में आप का प्रयास है कि इस चुनाव में अगर उसे पांच से दस सीटें मिल जाती हैं तो वह अच्छा कर सकती है। 

दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के नेताओं का मानना है कि उसे 'आप' के साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए। इससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। कांग्रेस के जिन नेताओं की सीट पर 'आप' उम्मीदवार उतारे जाएंगे, वहां बगावत संभव है। हरियाणा में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 43 फीसदी वोट मिले थे, जबकि भाजपा के खाते में 46 फीसदी वोट आए थे। प्रदेश की राजनीति के जानकार रविंद्र कुमार बताते हैं, आज कांग्रेस पार्टी मजबूत स्थिति में है। गठबंधन की घोषणा अभी नहीं हुई है। अगर गठबंधन की घोषणा होती है तो देखने वाली बात यह होगी कि 'आप' को सीटें कौन सी दी जाती हैं।

प्रदेश के लोग कांग्रेस की स्थिति से अवगत हैं। ऐसे में यह अलायंस, कांग्रेस पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। पांच साल से चुनाव की तैयारी में जुटे वे नेता बगावत कर सकते हैं, जिनकी टिकट कटेगी। अगर कोई ऐसी सीट है, जहां पर कांग्रेस कमजोर है तो उसे 'आप' को देते हैं तो नुकसान नहीं होगा। यदि 'आप' ऐसी सीट की मांग करती है, जहां पर कांग्रेस पार्टी कड़ी टक्कर देने की स्थिति में है तो वहां बगावत संभव है। इसका नुकसान कांग्रेस पार्टी के खाते में जाएगा। 

हरियाणा में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टन अजय यादव ने भी कहा है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को गठबंधन करने की जरुरत नहीं है। सूत्रों ने बताया, खुद पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा, इस गठबंधन के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि आप के साथ गठबंधन किया जाए। राहुल गांधी ने इसके लिए सहमति दी है। हरियाणा में 5 अक्टूबर को वोटिंग होनी है, जबकि नतीजे 8 अक्टूबर को आएंगे।

कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने बताया, हरियाणा में आप का कोई वजूद नहीं है। उनका कोई भी विधायक नहीं है। अगर कांग्रेस से गठबंधन कर 'आप' को दो चार सीट भी मिल जाती हैं तो वह उसके लिए एक बड़ी जीत होगी। दूसरी ओर, इस गठबंधन से कांग्रेस को कुछ फायदा नहीं होगा। इस गठबंधन में 'दिल्ली' भी अहम है। यानी दिल्ली में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव, यह मुद्दा भी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के ध्यान में है। दिल्ली में कांग्रेस पार्टी का खाता नहीं खुल सका है। ऐसे में हरियाणा का चुनावी गठबंधन, दिल्ली में कांग्रेस व आप के गठबंधन की राह तय करेगा।

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