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Arvind Kejriwal: क्या अब जेल से चलेगी केजरीवाल सरकार, क्या कहता है देश का कानून?

Tue, 07 Nov 2023 05:21 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 07 Nov 2023 05:21 PM IST
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सार
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार दुबे ने अमर उजाला से कहा कि संविधान में कहीं ऐसी कोई बात नहीं कही गई है जिससे यह कहा जा सके कि जेल जाने के पहले मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री अपने अन्य मंत्रियों के समकक्ष लेकिन उनके अगुवा या प्रधान की तरह होते हैं...
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Will Arvind Kejriwal government now run from jail, what indian law said
Arvind Kejriwal - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

आम आदमी पार्टी बेशक यह दावा कर रही है कि अगर प्रवर्तन निदेशालय अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करता है, तब भी वह अपने पद से इस्तीफ़ा नहीं देंगे और जेल से ही अपनी सरकार चलाएंगे, लेकिन यह कानूनी तौर पर कितना संभव है, यह सवाल सियासी गलियारों में उठने लगा है। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने कथित तौर पर विधानसभा में बैठक कर यह प्रस्ताव पारित किया है। दिल्ली सरकार की वरिष्ठ मंत्री आतिशी मार्लेना और सौरभ भारद्वाज ने यह जानकारी मीडिया को दी है।

लेकिन आतिशी के इस दावे के बाद से ही सवाल उठ रहा है कि देश का संविधान ऐसी परिस्थितियों में क्या कहता है? क्या अरविंद केजरीवाल जेल से सरकार चलाकर एक नई परंपरा की शुरुआत करेंगे? ऐसी स्थिति में उनकी ईमानदार राजनीति करने के दावे का क्या होगा?

मंत्रियों के मामले में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन इसके बाद भी वे अपने पद पर लंबे समय तक बने रहे। इस मामले में महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री के साथ-साथ दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन भी शामिल रहे हैं, जो जेल मंत्री रहते हुए भी तिहाड़ जेल में बंद थे।

लेकिन जब-जब किसी मुख्यमंत्री के गिरफ्तार होने की स्थिति आई है, मुख्यमंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफ़ा देकर नैतिकता के मापदंड को बरकरार रखा है। लालू प्रसाद यादव को जब चारा घोटाले में जेल जाना पड़ा, तो उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। इसी प्रकार जे. जयललिता ने जेल जाने से पहले ओ. पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाया। बाद में जमानत पर आने के बाद ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद स्वीकार किया।

'कानून नहीं, लेकिन परंपरा स्पष्ट'

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार दुबे ने अमर उजाला से कहा कि संविधान में कहीं ऐसी कोई बात नहीं कही गई है जिससे यह कहा जा सके कि जेल जाने के पहले मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री अपने अन्य मंत्रियों के समकक्ष लेकिन उनके अगुवा या प्रधान की तरह होते हैं। यदि किसी मंत्री के जेल जाते समय यह बाध्यता नहीं है कि वह अपने पद से इस्तीफा दे, तो यही कानूनी स्थिति किसी मुख्यमंत्री के लिए भी लागू होती है, यानी कानूनन उसे इस्तीफा देना अनिवार्य नहीं है।

लेकिन, अदालत हो या सरकार, इन्हें चलाने में परंपराओं और नैतिकता का बहुत बड़ा महत्त्व होता है। किसी कानून को बनाये जाने से पहले भी उनसे संबंधित प्रचलित परंपराओं को संज्ञान में लिया जाता है। इस मामले में अब तक परंपरा यही रही है कि मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफ़ा देकर जेल जाते रहे हैं। राजनीतिक तौर पर इसका उन्हें लाभ भी मिलता है। ऐसे में यदि केजरीवाल के जेल जाने की संभावना बनती है, और वे अपने पद से इस्तीफ़ा नहीं देते हैं तो वे अलोकप्रिय हो सकते हैं। विपक्ष उन्हें उनके ही तथाकथित 'ईमानदारी के सर्टिफिकेट' पर घेर सकता है, जिसका उन्हें नुकसान होगा।    

दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू होने की संभावना कितनी है? 

अश्विनी कुमार दुबे ने कहा कि एक मुख्यमंत्री जेल में रहते हुए राज्य का प्रशासन नहीं चला सकता। सेबी ने एक घोटाले में देश के एक बड़े उद्योगपति को गिरफ्तार किया था। उद्योगपति ने अपने कामकाज को जारी रखने के लिए जेल में अपना एक छोटा ऑफिस चालू रखने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने उन्हें यह अनुमति दे दी थी। लेकिन एक राज्य को चलाना और एक कंपनी को चलाने में बहुत फर्क है। कोई अदालत इस तरह की अनुमति नहीं दे सकती, जिसमें कोई मुख्यमंत्री जेल से ही अपनी सरकार चलाए। अदालतों के निर्णय भी संविधान की किसी धारा या परंपरा से प्रेरित होते हैं। अदालतें भी इससे अलग हटकर कोई निर्णय नहीं देतीं। ऐसे में इस बात की संभावना कम ही है कि कोई अदालत केजरीवाल को जेल से सरकार चलाने की अनुमति दे।

लेकिन ऐसी स्थिति में इस बात की संभावना बहुत अधिक है कि दिल्ली के उपराज्यपाल मुख्यमंत्री के सार्वजनिक कार्य के लिए उपलब्ध न होने के आधार पर राजधानी में कानून-व्यवस्था के संकट में होने की रिपोर्ट दे दें। ऐसी स्थिति में गेंद राष्ट्रपति के माध्यम से केंद्र सरकार के पाले में आ जाएगी। अब यह केंद्र सरकार के विवेक पर निर्भर करेगा कि इस तरह की परिस्थिति में वह क्या निर्णय लेती है।

पीड़ित के रूप में न पेश करें केजरीवाल- भाजपा    

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता और मीडिया इंचार्ज प्रवीण शंकर कपूर ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल स्वयं को पीड़ित के रूप में दिखाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि उनके पहले भी लालू प्रसाद यादव और जयललिता भ्रष्टाचार के ही मामले में जेल जा चुके हैं। ऐसे में उन्हें स्वयं को किसी पीड़ित के रूप में पेश करने से बचना चाहिए। भाजपा नेता कपूर ने कहा कि जनता यह जानती है कि अरविंद केजरीवाल 368 करोड़ रुपये के शराब घोटाले के 'मास्टर माइंड' हैं। उन्हें उन पैसों का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पहला मामला नहीं है। अभी मुख्यमंत्री आवास में हुए घोटाले की जांच भी जारी है। उस मामले में भी मुख्यमंत्री को जेल की हवा खानी पड़ सकती है।   

सरकार गिराने की साजिश- आप

दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार झूठे आरोप लगाकर दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को गिराना चाहती है। विधायकों के बाद अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के पार्षदों के साथ भी बैठक करने वाले हैं, जहां पार्षद उनसे इस्तीफ़ा न देने की अपील करेंगे। इसे अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक दांव पेंच के रूप में देखा जा रहा है।

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