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अंग्रेजों से दो बार युद्ध करने वाली महाराजा रणजीत सिंह की पत्नी इस तरह जेल से भागी थीं

Thu, 02 Aug 2018 12:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 02 Aug 2018 12:56 PM IST
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wife of Maharaja Ranjit Singh Jindan Kaur escaped from British Prison and led two war against them
महारानीजिंदन कौर
1 अगस्त 1863 को पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह की पत्नी जिंदन कौर का निधन हो गया था। अपने निधन के 155 साल बाद पंजाब के आखिरी सिख शासक की पत्नी को एक किताब और फिल्म के जरिए दोबारा याद किया जा रहा है। उस दौरा में महारानी को अंग्रेजों ने जबरन उनके बेटे दुलीप सिंह से अलग करके जेल में बंद कर दिया था। इसके बावजूद वह ना केवल वहां से भाग निकलीं बल्कि उन्होंने दो बार अंग्रेजों से युद्ध भी किया। अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक उन्होंने घुटने टेकने से मना कर दिया।  
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साल 2010 में अमेरिकी फिल्म निर्माता माइकल सिंह ने जिंदन कौर पर 37 मिनट की अवॉर्ड विनिंग फिल्म रिबेल क्वीन को लिखा और निर्देशित किया था। अतंर्राष्ट्रीय दर्शकों का ध्यान इस तरफ फरवरी 2018 में गया जब इस फिल्म की यूनाइटेड किंगडम में स्क्रिनिंग की गई। लेखक और निर्देशक सिंह इस समय राइडिंग टाइगर: द सिख मसैकर्स 1984 पर काम कर रहे हैं। युवावस्था के दौरान सिंह ने इन दंगों को देखा है। लेकिन जिंदन कौर की फिल्म बनाने का असली श्रेय बिकी सिंह को जाता है।
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बिकी आईआईटी दिल्ली से ग्रैजुएट हैं। वह दक्षिणी कैलिफॉर्निया में एक आईटी कंपनी चलाते हैं और उनके पास लगभग 500 पगड़ियों का संग्रह है। महारानी की कहानी सुनने के बाद बिकी ने फिल्म के निर्माण के लिए 2010 में 25,000 डॉलर दान में दिए थे। फिल्म पर माइकल सिंह ने बताया कि कौर की फिल्म महिलाओं के आत्म सम्मान का कड़ा संदेश देती है। इतिहासकार प्रोफेसर इंदु बंगा ने कहा कि अंग्रेजों ने महारानी को उनके बेटे दुलीप से अलग रखा और उनकी छवि को खराब करते हुए उन्हें धोखाधड़ी वाला बताया है। 
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बंगा ने बताया कि जिंदन भाई महाराज सिंह के संपर्क में थीं, जो अंग्रेजों के दुश्मन थे। बहुत से इतिहासकारों ने सिखों की लड़ाई को स्वतंत्रता के लिए लड़ी गई पहली लड़ाई बताया है। जिंदन अब एक हीरो वाली आकृति बन गई हैं। साल 2016 में आई विलियम डालरिम्पले और अनीता आनंद की किताब कोहीनूर: द स्टोरी ऑफ द वर्ल्ड्स मोस्ट इनफेमस डायमंड में भी जिंदन का जिक्र मिलता है। इसमें 19 अप्रैल, 1849 को उनके द्वारा चुनार किले से भाग जाने का वाकया है। किताब के अनुसार, 'भिखारियों के फटे-पुराने कपड़े पहनकर वह अंधेरे में भाग गईं थीं।'


कौर ने जेल की सुरक्षा करने वालों के लिए जमीन पर पैसे गिरा दिए और एक नोट छोड़ा। जिसमें लिखा था, 'तुमने मुझे पिंजरे में रखा और कैद कर दिया। तुम्हारे सभी पिंजरों और संतरियों से बचकर मैं जादू से बाहर आ गई। मैंने तुमसे बहुत आराम से कहा था कि मुझे इतना तंग मत करो लेकिन यह मत सोचना कि मैं भाग गई हूं। इस बात को समझो कि मैं खुद और बिना सहायता के निकली हूं। यह मत समझना कि मैं चोरों की तरह गई हूं।' महाराजा की सबसे छोटी पत्नी का 1 अगस्त, 1863 को नींद में निधन हो गया था। उन्हें पश्चिमी लंदन में दफनाया गया था क्योंकि उस दिनों अंतिम संस्कार को अवैध माना जाता था।
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