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पाकिस्तान को चुभता है उड़ी मिलिट्री बेस, इन वजहों से आतंकियों ने बनाया निशाना
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 20 Sep 2016 01:40 PM IST
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- फोटो : Getty Images
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कश्मीर के उड़ी स्थित मिलिट्री बेस पर आतंकियों के हमले ने सेना के साथ ही देश के रणनीतिकारों को झकझोर कर रख दिया है। सामरिक और भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण इस सैन्य ठिकाने पर 4 आतंकियों ने हमला कर सेना के 18 जवानों की जान ले ली। उड़ी मिलिट्री बेस कैंप पर हमला इसकी रणनीतिक और सामरिक महत्ता को दर्शााता है। इसी मिलिट्री बेस से सेना एलओसी पर निगरानी रखती है, जोकि पाकिस्तान के साथ भारत की वास्तविक नियंत्रण रेखा है। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों उड़ी मिलिट्री बेस इतना महत्वपूर्ण है।
सेना का यह बेस कैंप दो वजहों से बहुत महत्वपूर्ण है। एक तो यह कि इसके जरिए सेना पाकिस्तान की आक्रामकता को कुंद करती है और आतंकियों की घुसपैठ पर नजर करती है। यह सिलसिला 1989 में कश्मीर में हिंसा भड़कने के बाद से चलता आ रहा है।
सेना का यह ठिकाना सीमा से लगा हुआ है और इस क्षेत्र में एलओसी पर निगरानी रखने के सैन्य और साजो सामान की सप्लाई यही से होती है। उड़ी का यह बेस कैंप रणनीतिक रूप से भारतीय सेना के लिए 1947 से महत्वपूर्ण रहा है।
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सेना का यह बेस कैंप दो वजहों से बहुत महत्वपूर्ण है। एक तो यह कि इसके जरिए सेना पाकिस्तान की आक्रामकता को कुंद करती है और आतंकियों की घुसपैठ पर नजर करती है। यह सिलसिला 1989 में कश्मीर में हिंसा भड़कने के बाद से चलता आ रहा है।
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सेना का यह ठिकाना सीमा से लगा हुआ है और इस क्षेत्र में एलओसी पर निगरानी रखने के सैन्य और साजो सामान की सप्लाई यही से होती है। उड़ी का यह बेस कैंप रणनीतिक रूप से भारतीय सेना के लिए 1947 से महत्वपूर्ण रहा है।
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LoC से तीन रास्तों के जरिए जुड़ता है उड़ी मिलिट्री बेस
उड़ी बेस कैंप ठिकाना सेना के ब्रिगेड हेडक्वार्टर के रूप में काम करता है। यहां एक समय में लगभग 12000 से 13000 हजार सैनिक रहते हैं। यह सैन्य ठिकाना इतना महत्वपूर्ण है कि इसके जरिए पूरे बॉर्डर के आर पार हमला किया जा सकता है। एलओसी से तीन रास्तों के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। एक रास्ता, तो एलओसी से मात्र 6 किलोमीटर लंबा है।
हो सकता है कि आतंकियों ने इस रास्ते का फायदा उठाया हो। इस बात की संभावना इसलिए ज्यादा है कि आतंकियों ने 5.30 बजे सुबह कैंप पर हमला कर दिया। आतंकियों ने बंदूक और ग्रेनेड के जरिए सैनिकों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों ओर से शुरू हुई गोलीबारी घंटों तक चलती रही।
सेना का यह बेस समतल भूमि पर स्थित है और ऊंची पहाड़ियों पर स्थित पाकिस्तानी आर्मी पोस्ट लगातार इस पर नजर रखती है। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय हाइड्रो पॉवर कॉरपोरेशन ने भी अपना एक प्रोजेक्ट स्थापित किया है। हालांकि यह मूल रूप से जमीन के भीतर है, ताकि युद्ध की स्थिति में नुकसान से बचा जा सके।
हो सकता है कि आतंकियों ने इस रास्ते का फायदा उठाया हो। इस बात की संभावना इसलिए ज्यादा है कि आतंकियों ने 5.30 बजे सुबह कैंप पर हमला कर दिया। आतंकियों ने बंदूक और ग्रेनेड के जरिए सैनिकों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों ओर से शुरू हुई गोलीबारी घंटों तक चलती रही।
सेना का यह बेस समतल भूमि पर स्थित है और ऊंची पहाड़ियों पर स्थित पाकिस्तानी आर्मी पोस्ट लगातार इस पर नजर रखती है। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय हाइड्रो पॉवर कॉरपोरेशन ने भी अपना एक प्रोजेक्ट स्थापित किया है। हालांकि यह मूल रूप से जमीन के भीतर है, ताकि युद्ध की स्थिति में नुकसान से बचा जा सके।
आतंकियों ने एडमिनिस्ट्रेटिव बेस को बनाया निशाना
उड़ी - छिटपुट सी भारत विरोधी भावना वाला एक सैन्य शहर है जोकि आतंक के ठेकेदारों की निगाह में चुभता रहा है। यह पहली बार नहीं है जब इस मिलिट्री बेस कैंप पर हमला हुआ है। उड़ी के समीप ही दिसंबर 2014 में 8 जवान और तीन पुलिसकर्मी मारे गए थे।
एक सैन्य अधिकारी ने कहा कि आतंकी हमला 12 ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर नहीं हुआ, बल्कि आतंकियों ने ब्रिगेड से सटे रियर एडमिनिस्ट्रेटिव बेस को निशाना बनाया। रियर एडमिनिस्ट्रेटिव बेस वह जगह होती है, जहां एलओसी पर तैनात सैनिक अपने गैर सैन्य साजोसामान और दूसरे एडमिनिस्ट्रेटिव स्टोर रखते हैं।
अधिकारी ने कहा कि आर्मी यहां कुछ जवानों को तैनात करती है, जोकि इसकी निगरानी करते हैं। कहा जा सकता है कि यह एक ऐसी जगह जहां सैनिकों की संख्या कम होती है।
कश्मीर में जीओसी 15 कॉर्प्स के पूर्व रिटायर्ड जनरल सैयद अता हसनैन ने ट्वीट कर कहा कि चौकी का रियर हिस्सा काफी अहम होता है, क्योंकि ज्यादातर सैनिक आगे रहते हैं। इस तरह की जगहें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं।
एक सैन्य अधिकारी ने कहा कि आतंकी हमला 12 ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर नहीं हुआ, बल्कि आतंकियों ने ब्रिगेड से सटे रियर एडमिनिस्ट्रेटिव बेस को निशाना बनाया। रियर एडमिनिस्ट्रेटिव बेस वह जगह होती है, जहां एलओसी पर तैनात सैनिक अपने गैर सैन्य साजोसामान और दूसरे एडमिनिस्ट्रेटिव स्टोर रखते हैं।
अधिकारी ने कहा कि आर्मी यहां कुछ जवानों को तैनात करती है, जोकि इसकी निगरानी करते हैं। कहा जा सकता है कि यह एक ऐसी जगह जहां सैनिकों की संख्या कम होती है।
कश्मीर में जीओसी 15 कॉर्प्स के पूर्व रिटायर्ड जनरल सैयद अता हसनैन ने ट्वीट कर कहा कि चौकी का रियर हिस्सा काफी अहम होता है, क्योंकि ज्यादातर सैनिक आगे रहते हैं। इस तरह की जगहें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं।