फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   why the intentions of government getting weakened?, centre lateral entry U-turn Update

Lateral Entry: लेटरल एंट्री से रोल बैक, क्यों कमजोर पड़ रहे मजबूत सरकार के इरादे?

Tue, 20 Aug 2024 05:03 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 20 Aug 2024 05:03 PM IST
विज्ञापन
सार
केंद्र सरकार ने मंगलवार को यूपीएसी को एक निर्देश जारी कर लेटरल एंट्री की भर्तियों को तत्काल रोकने के लिए कह दिया है। यूपीएससी ने लेटरल एंट्री के जरिए 45 भर्तियों का एक विज्ञापन निकाला था, जिसके बाद इसका विरोध शुरू हो गया था। 
loader
why the intentions of government getting weakened?, centre lateral entry U-turn Update
लेटरल एंट्री से रोल बैक, क्यों कमजोर पड़ रहे मजबूत सरकार के इरादे? - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपने मजबूत इरादों के लिए मशहूर रही मोदी सरकार को यूपीएससी में लेटरल एंट्री से भर्ती करने के निर्णय से अपने कदम वापस खींचने पड़े हैं। विपक्ष के दबाव, सहयोगी दलों की नाराजगी और आगामी चुनावों में नुकसान होने की आशंका देख केंद्र सरकार ने मंगलवार को यूपीएसी को एक निर्देश जारी कर लेटरल एंट्री की भर्तियों को तत्काल रोकने के लिए कह दिया है। यूपीएससी ने लेटरल एंट्री के जरिए 45 भर्तियों का एक विज्ञापन निकाला था, जिसके बाद इसका विरोध शुरू हो गया था। विपक्ष इसे एससी/एसटी वर्गों के आरक्षण के अधिकारों पर 'डाका' करार दे रहा था।  


दरअसल, कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के दौरान यह मुद्दा जोरशोर से उठाया था कि भाजपा के चुनाव जीतने पर संविधान को बदला जा सकता है। पार्टी ने अनुसूचित जाति-जनजाति के मतदाताओं के बीच यह मुद्दा भी खूब उछाला था कि यदि भाजपा चुनाव जीतती है, तो वह आरक्षण को भी समाप्त कर सकती है। भाजपा कांग्रेस के इस नैरेटिव की काट नहीं खोज सकी और उसे इसका नुकसान हुआ। 


हरियाणा में भाजपा को मिल रही कड़ी चुनौती
चुनाव आयोग ने अब हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का एलान कर दिया है। इसी वर्ष के अंत में झारखंड और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इसके बाद अगले वर्ष में दिल्ली और बिहार में भी विधानसभा चुनाव होने तय हैं। मेट्रोपोलिटन शहर दिल्ली को छोड़ दें तो शेष राज्यों में जातिगत आरक्षण एक संवेदनशील मुद्दा माना जाता है। हरियाणा में भाजपा को कांग्रेस से बेहद कड़ी चुनौती मिल रही है। पार्टी को यहां अग्निवीर योजना के कारण भी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में यदि ठीक चुनावों के बीच ही लेटरल एंट्री के कारण अनुसूचित जातियों को नुकसान होने का मुद्दा गरमाता है तो भाजपा को नुकसान हो सकता है।

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण है कड़ी चुनौती
महाराष्ट्र में भी जल्द ही विधानसभा चुनाव होने तय हैं। यहां पहले ही सरकार के सामने मराठा आरक्षण की कड़ी चुनौती है। इससे निपटने में ही सरकार के पसीने छूट रहे हैं। इसे में यदि इसी बीच लेटरल एंट्री की आंच भी पड़ती है तो इससे सरकार को बड़ा नुकसान हो सकता है। बिहार जातिगत राजनीति का अखाड़ा माना जाता है। लालू यादव इसी दम पर लंबे अरसे से बिहार में राजनीति करते रहे हैं और तेजस्वी इसी दम पर भाजपा को हराने का दावा कर रहे हैं। यदि लोकजनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने इस पर अपना कड़ा विरोध जताया था तो उनका विरोध बिहार की इसी राजनीति से जोड़कर देखा जा सकता है। 

मायावती और अखिलेश सरकार पर कर चुके हैं वार
भाजपा के लिए परेशानी यह भी है कि विपक्ष अभी भी अपने जातिगत जनगणना दांव को भुनाने की कोशिश कर रहा है। राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संविधान पर सम्मेलन को संबोधित करने वाले हैं। वे यहां संविधान-आरक्षण के मुद्दे पर जोरदार हमला कर सरकार पर एक बार फिर मजबूत दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं। लेटरल एंट्री का विवाद उन्हें और ऊर्जा प्रदान कर सकता है।मायावती और अखिलेश यादव जैसे नेता भी लेटरल एंट्री के मुद्दे पर सरकार को घेर चुके हैं और इसी समय उत्तर प्रदेश में उपचुनाव भी चल रहे हैं। यदि यह मुद्दा गरमाता तो भाजपा को इसका नुकसान हो सकता था। संभवतः यही कारण है कि सरकार ने इससे रोल बैक कर लेना ही ठीक समझा। यह अलग बात है कि इतना विवाद भी सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को पर्याप्त ऊर्जा दे चुका है।   

'देश के लिए यह निर्णय ठीक नहीं'    
राजनीतिक विश्लेषक कुमार राकेश ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार का लेटरल एंट्री के निर्णय से अपने कदम वापस खींचना सही कदम नहीं है। इस निर्णय से कोई बड़ा लाभ-नुकसान नहीं है, लेकिन इससे जो संकेत निकल रहे हैं, वे देश की राजनीति के लिए शुभ नहीं हैं। कुमार राकेश ने कहा कि सरकार का कदम वापस खींचना यह दिखाता है कि अब विपक्ष और सहयोगी दल जातिगत राजनीति के दबाव में सरकार को कोई भी ऐसा निर्णय नहीं करने देंगे जिसे वे ठीक न समझें। 

यह सरकार के सामने नीतिगत अपंगता पैदा कर सकता है और उसे किसी भी सुधारवादी कदम से अपना पैर वापस खींचना पड़ सकता है। कृषि कानूनों की वापसी के मामले में हम यह पहले भी देख चुके हैं। अब कमजोर सरकार विपक्ष-सत्ता के अन्य सहयोगी दलों के अधिक दबाव में आकर कोई भी कड़े फैसले नहीं ले सकेगी, यह दिखाई पड़ रहा है।    

उन्होंने कहा कि यह बात सर्वविदित है कि पंडित जवाहरलाल नेहरु के जमाने से ही सरकारों ने समय-समय पर विशेषज्ञों को लाकर देश के हित में बेहतर काम करने का प्रयास किया है। यह प्रयास पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक भी जारी रहा है। ऐसे में यह आरोप लगाना कि केवल यही सरकार इस तरह का काम कर रही है, बिलकुल गलत है और यह देश हित में नहीं है। 

'आरक्षण के उद्देश्यों की समीक्षा आवश्यक' 
राजनीतिक विश्लेषक विवेक सिंह ने कहा कि आरक्षण के माध्यम से सरकारी नौकरी देने को सामाजिक असमानता और भेदभाव को समाप्त करने का एक माध्यम मान लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस बात का अध्ययन होना चाहिए कि आरक्षण के कारण दलित वर्गों का कितना सामाजिक उत्थान हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने में असफल साबित हुई है तो इसे जारी रखने के औचित्य पर विचार करते हुए ऐसे उपाय खोजे जाने चाहिए जो सामाजिक-आर्थिक भेदभाव को कम करने में प्रभावी हो सकें। 

'सामाजिक भेदभाव समाप्त करने के नए उपाय आवश्यक' 
उन्होंने कहा कि बाजार ने जातिगत भेदभाव और छुआछूत को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब बाजार में जाने के बाद कोई भी उपभोक्ता वेटर से यह नहीं पूछता कि वह किस जाति का है, कोई उत्पाद खरीदते समय भी कोई उसके निर्माता या श्रमिकों का धर्म-वर्ग नहीं पूछता। यहां तक कि कंपनियों में सामान कामकाज के स्तर पर भी लोगों के बीच भेदभाव में बहुत कमी आई है। इसके पीछे समान स्तर पर हर वर्गों के काम करने की आवश्यकता और तकनीकी ने बड़ी भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि लेटरल एंट्री से विशेषज्ञों को लाकर देश को आगे बढ़ाने की नीति अमेरिका सहित दुनिया के तमाम देशों में विद्यमान है। इसे में लेटरल एंट्री का विरोध करने की बजाय सत्ता पक्ष, विपक्ष और सिविल सोसाइटी के लोगों को मिलजुलकर ऐसी व्यवस्था को बढ़ाने पर विचार करना चाहिए जो देश और समाज को आगे बढ़ाने का विचार रखता हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed