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वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील का इस्तीफा: सरकार नहीं ले रही थी सही निर्णय, इसलिए बाहर हुए साइंटिफिक एडवाइजर ग्रुप के चेयरमैन

Mon, 17 May 2021 01:08 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 17 May 2021 01:08 PM IST
सार

शाहिद जमील ने न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे एक लेख में लिखा था कि डाटा के आधार पर निर्णय नहीं लिए जा रहे हैं। यही वजह है कि महामारी नियंत्रण से बाहर हो गई है...

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Why Senior virologist shahid jameel has resigned from the chair of scientific advisory group of indian sars cov2 genomics consortium
वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील - फोटो : वीडियो ग्रैब इमेज

विस्तार

देश में कोरोना वायरस के बदलते स्वरूप और उसके लक्षणों की पहचान करने वाले देश के कंसोर्टियम के साइंटिफिक एडवाइजर ग्रुप के अध्यक्ष शाहिद जमील ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शाहिद पर वायरस के जीनोम स्ट्रक्चर की पहचान की जिम्मेदारी थी। शाहिद के इस्तीफे के साथ वैज्ञानिकों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन हाल में ही केंद्र सरकार के साथ अंदरूनी टकराव को उनके इस्तीफे की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

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न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखा था लेख

शाहिद जमील ने कुछ समय पहले अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स में एक लेख लिखा था, जिसमें कोविड को लेकर उनके कुछ सुझाव थे, लेकिन देश में पॉलिसी के चलते उन्हें लागू नहीं किया जा रहा है। शाहिद ने अपने लेख में स्पष्ट लिखा था कि डाटा के आधार पर निर्णय नहीं लिए जा रहे हैं। यही वजह है कि महामारी नियंत्रण से बाहर हो गई। हालांकि उन्होंने अपने इसी लेख में इस बात का जिक्र किया था कि उनके सुझावों को लेकर उन्हें अपने साथियों का पूरा सहयोग है और ये लोग मानते हैं कि कोविड से लड़ने में उनके सुझाव उपयोगी हैं। लेकिन सरकार ने उनके सुझावों पर अमल नहीं किया था।

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कोरोना की रोकथाम को लेकर की थी सरकार की आलोचना

यही नहीं शाहिद जमील ने कोरोना की रोकथाम को लेकर सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने पहली लहर के बाद यह मान लिया था कि कोरोना महामारी खत्म हो गई है। जबकि ऐसा नहीं था। वैज्ञानिकों के समूह ने बताया था कि अभी बहुत सजग रहने की जरूरत है। लेकिन सरकार नहीं चेती और उसी दौरान कोरोना को लेकर बनाए गए अस्थायी अस्पताल और बाकी चीजों को बंद कर दिया गया था।

शाहिद के साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शाहिद का इस्तीफा देना एक सामान्य प्रक्रिया तो नहीं है। हालांकि असलियत शाहिद ही बेहतर बता सखेंगे, लेकिन अभी भी सरकार बहुत सी योजनाओं को तय की गई रूप रेखा के मुताबिक आगे बढ़ा सकती है। जिसका असर कोविड नियंत्रण में ज्यादा प्रभावकारी रूप से दिखेगा।

अपने मुखर व्यक्तित्व के कारण ही शाहिद ने सुप्रीम कोर्ट की भी एक बार आलोचना की थी। शाहिद जमील ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की भी आलोचना की थी, जिसमें कोर्ट ने ऑक्सीजन सप्लाई के लिए टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया था।

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