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बीजू पटनायक को क्यों नहीं भूल पाता इंडोनेशिया

Wed, 30 May 2018 03:46 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Wed, 30 May 2018 03:46 PM IST
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 Why not Indonesia forget Bijayananda Patnaik
बिजयानंदा पटनायक को लोग प्यार से बीजू पटनायक कहते थे।बीजू पटनायक की पहचान एक स्वतंत्रता सेनानी, साहसी पायलट और बड़े राजनेता के रूप में रही है।
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उन्हें आधुनिक ओडिशा का शिल्पकार भी माना जाता है।इसके अलावा पटनायक को एक वाकये के लिए हमेशा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर याद किया जाता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया के दौरे पर हैं और इंडोनेशिया की आजादी में बीजू पटनायक की अहम भूमिका रही थी। भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में जवाहरलाल नेहरू और बीजू पटनायक की दोस्ती काफी भरोसेमंद मानी जाती थी।

प्राचीन समय से ही भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंध रहे हैं इसलिए नेहरू की दिलचस्पी इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की लड़ाई में भी थी। आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू उपनिवेशवाद के खिलाफ थे और उन्होंने बीजू पटनायक को इंडोनेशिया को डचों से मुक्त कराने में मदद करने की जिम्मेदारी दी थी।
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वो इंडोनेशियाई स्वतंत्रता सेनानियों को बचाने पहुंचे थे...

नेहरू ने इंडोनेशियाई लड़ाकों को डचों से बचाने के लिए कहा था।नेहरू के कहने पर बीजू पटनायक पायलट के तौर पर 1948 में ओल्ड डकोटा एयरक्राफ्ट लेकर सिंगापुर से होते हुए जकार्ता पहुंचे थे। यहां वो इंडोनेशियाई स्वतंत्रता सेनानियों को बचाने पहुंचे थे।डच सेना ने पटनायक के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही उन्हें मार गिराने कोशिश की थी।

पटनायक को जर्काता के पास आनन-फानन में उतरना पड़ा था।वहां उन्होंने जापानी सेना के बचे ईंधन का इस्तेमाल किया था।इसके बाद उन्होंने कई विद्रोही इलाकों में दस्तक दी और वो अपने साथ प्रमुख विद्रोही सुल्तान शहरयार और सुकर्णो को लेकर दिल्ली आ गए थे और नेहरू के साथ गोपनीय बैठक कराई थी।

इसके बाद डॉ।सुकर्णो आजाद देश इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति बने।इस बहादुरी के काम के लिए पटनायक को मानद रूप से इंडोनेशिया की नागरिकता दी गई और उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान 'भूमि पुत्र' से नवाजा गया था।

शायद ही यह पुरस्कार किसी विदेशी को दिया जाता है।1996 में इंडोनेशिया ने 50वां स्वतंत्रता दिवस मनाया और बीजू पटनायक को सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार 'बिंताग जसा उताम' से सम्मानित किया गया था। जिस दिन सुकर्णो की बेटी पैदा हुई उस दिन तेज़ बारिश हो रही थी और बादल गरज रहे थे, यही वजह थी कि बीजू पटनायक ने नाम सुझाया..मेघावती।

पटनायक ने तिब्बत और भारत को हवाई संपर्क से जोड़ने की कोशिश की थी।ऐसा उन्होंने तिब्बत के 1951 में चीन के कब्जे से पहले ही किया था, लेकिन सरकार से पूरी मदद नहीं मिलने के कारण वो नाकाम रहे थे।

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