बनारस के गंगा की तरह यमुना दिल्ली की पहचान क्यों नहींः वित्त मंत्री
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समुद्र या नदियों के किनारे बसे शहर की पहचान उसके समुद्री तट या रीवर फ्रंट बन जाते हैं। गंगा बनारस (वाराणसी) और इलाहाबाद (प्रयाग) की पहचान बन गई है। पूरी दुनिया से लोग उसे देखने और घूमने आते हैं। लेकिन दिल्ली की यमुना उसकी पहचान नहीं बन सकी। बल्कि यमुना में पैदा हुआ प्रदूषण दिल्ली के लिए परेशानी का सबब बन गया। केंद्रीय वित्त मंत्री का कहना है कि अब यमुना दिल्ली की पहचान बनेगा और बनारस के गंगा की तरह यमुना का प्रदूषण भी दूर किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए विभिन्न स्तर पर योजना बना ली है और आने वाले समय में यमुना पूर्ण स्वच्छ होगी।
देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के रूप में बजट पेश करने के बाद रविवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि तीन नंबरों के लॉक सिस्टम की तरह दिल्ली का विकास करने के लिए तीन सही नंबरों की चाबी लगानी पड़ेगी। केंद्र के रूप में पहला नंबर सही लगा दिया गया है, एमसीडी के रूप में तीसरा नंबर भी सही लगा दिया गया है। लेकिन बीच का नंबर (दिल्ली सरकार) सही नहीं लगाया गया है जिसके कारण दिल्ली का विकास नहीं हो रहा है। अगर दिल्ली वाले दिल्ली सरकार के स्तर पर भी सही नंबर का इस्तेमाल करेंगे तो इसका भी सही विकास हो जाएगा।
इस अवसर पर बोलते हुए राज्यसभा सांसद विजय गोयल ने कहा कि दिल्ली के कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटीज का निर्माण लगभग 1980 के आसपास हुआ। लेकिन चालीस साल बीत जाने के बाद भी आज तक उसमें सुविधाओं का अभाव है। केवल एक पानी के कनेक्शन के कारण लोगों को पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। पुरानी इमारतों को तोड़कर उनकी जगह नई इमारतें बनाने की जरूरत है, लेकिन तमाम नियमों की आड़ में ऐसा नहीं होने दिया जा रहा है। गोयल ने कहा कि अब लोगों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा और कोआपरेटिव सोसाइटीज को नया रूप दिया जायेगा। इसके लिए सभी जरूरी एजेंसियों की सहमती ली जा रही है।