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नासा को चंद्रयान-2 के नतीजों का बेसब्री से इंतजार क्यों है?

Wed, 24 Jul 2019 06:36 PM IST
अमर शर्मा जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 24 Jul 2019 06:36 PM IST
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Why NASA is eagerly waiting for results of chandrayaan-2 lunar mission artemis mission to the moon
चंद्रयान-2 - फोटो : ISRO
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग कर एक इतिहास तो रच दिया, लेकिन इससे नासा में हलचल बढ़ गई है। उसे चंद्रयान-2 के नतीजों का बेसब्री से इंतजार क्यों है, क्या नासा को यह चिंता सता रही है कि जब चंद्रयान-2 चांद के डार्क हिस्से कहे जाने वाले साउथ पोल पर लैंड करेगा तो ऐसा करने वाला भारत पहला देश बन जाएगा। दूसरा, नासा को चंद्रयान-2 के नतीजों की रिपोर्ट साझा करने की जल्दबाजी इसलिए है कि वह अर्टेमिस मिशन के जरिए अगले कुछ वर्षों में साउथ पोल पर अपना अंतरिक्ष यात्री भेजने की तैयारी कर रहा है। उसे चंद्रयान-2 की खोज से अपने मिशन में बहुत मदद मिलने की उम्मीद है। 
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भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आने वाली स्वायत्त संस्था विज्ञान प्रसार के प्रमुख वैज्ञानिक निमिष कपूर का कहना है कि चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग को लेकर नासा कुछ संदेह की स्थिति में था। इसके पीछे कई वजह रही हैं। पहली तो यही है कि साउथ पोल पर अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा के अलावा, चीन और रूस की एजेंसी भी नहीं पहुंच सकी हैं। नासा को यह उम्मीद नहीं थी कि इस बार भारत अपने 'बाहुबली रॉकेट' जीएसएलवी III-एम1 के जरिए चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग करा देगा। 
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इससे पहले चंद्रयान-1 मिशन में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था। चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं। इनके जरिए भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर उतारेगा। यह लैंडिंग चांद के साउथ पोल पर होगी। इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्पेस क्रॉफ्ट उतारने वाला पहला देश बन जाएगा।
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क्यों है नासा को चंद्रयान-2 के नतीजों का इंतजार?

कपूर के मुताबिक, अभी तक अमेरिका और रूस के पास चंद्रमा की सतह को लेकर जितनी भी रिपोर्ट हैं, उनमें कंकरीट तौर पर ज्यादा कुछ नहीं मिला है। चंद्रयान पर कभी 80 डिग्री तो कभी -180 डिग्री तापमान हो जाता है। इसके अलावा वहां भूकंप क्यों आते हैं, उनकी तीव्रता क्या है, अंतराल की स्थिति आदि के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है। जब चंद्रयान-1 की रिपोर्ट आने लगी कि वहां पानी की संभावना है तो नासा ने उस पर अपनी मुहर लगाने में देर नहीं लगाई। 

चंद्रयान-2, जिसमें ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल हैं, की मदद से चंद्रमा की स्थिति का बहुत अच्छे से पता लगा सकता है। मिट्टी जांच से लेकर तापमान, पानी और कंपन का अध्ययन किया जा सकेगा। ऑक्सीजन की स्थिति, पृथ्वी और चांद की उत्पत्ति जैसी जानकारियां भी मिलेंगी। यही वजह है कि सफल लॉन्चिंग के बाद नासा ने यह ट्वीट किया था कि 'चांद के अध्ययन के लिए चंद्रयान-2 को लॉन्च करने पर इसरो को बधाई। अपने डीप स्पेस नेटवर्क के जरिए मिशन के कम्युनिकेशन के लिए सहयोग करने पर हमें गर्व है। चांद के साउथ पोल से आपको मिलने वाली जानकारी को लेकर हम आशान्वित हैं, जहां हम अर्टेमिस मिशन के जरिए अगले कुछ वर्षों में अपना अंतरिक्ष यात्री भेजने वाले हैं। 

कुछ ही देर बाद नासा को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उसने दोबारा से ट्वीट कर कहा, 'हमने हमेशा से ही अंतरिक्ष खोज अभियानों में सहयोग देकर और इस दौरान मिली सीख पर गर्व महसूस किया है। वैश्विक सहयोग का सिद्धांत हमारे मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक रहा है। ब्रह्माण्ड में हमारे स्थान से जुड़े अनसुलझे सवालों का जवाब देकर मानवीय समझ के विस्तार के लिए इस तरह का सहयोग जरूरी है। 

साउथ पोल पर प्राकृतिक संपदा की जानकारी तो चंद्रयान-2 ही देगा: अरविंद राणाडे

विज्ञान प्रसार संस्था से जुड़े दूसरे वरिष्ठ वैज्ञानिक अरविंद राणाडे कहते हैं, चंद्रयान-2 के साउथ पोल पर उतरने की वजह से दुनिया की नजर भारत पर टिकी है। नासा भले ही यह कहे कि आने वाले कुछ सालों में वह इस पोल पर अपना अंतरिक्ष यात्री भेजेगा, लेकिन सच यह भी है कि अभी तक वहां की स्थिति के बारे में कोई ठोस जानकारी नासा के पास नहीं है। 


अंतरिक्ष खोजों के मामले में चंद्रयान-2 मील का पत्थर साबित होगा। प्राकृतिक सम्पदा, कितने रूपों में है और वह कितनी पुरानी है, सौर मंडल के बनने की सही स्थिति एवं समय व पानी की खोज, अगर इन सब बातों को पता लगाने में चंद्रयान-2 सफल होता है तो अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारत का नाम सुनहरी अक्षरों में लिखा जाएगा।
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