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कांग्रेस का सवाल, मोदी जाते-जाते बजट पेश करने की परंपरा क्यों तोड़ रहे हैं
Thu, 24 Jan 2019 07:21 PM IST
टीम डिजिटल
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: टीम डिजिटल
Updated Thu, 24 Jan 2019 07:21 PM IST
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मनीष तिवारी
- फोटो : AmarUjala
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क्या एनडीए सरकार एक फरवरी को पूर्ण वित्तीय बजट पेश करने जा रही है, कांग्रेस पार्टी ने पीएम मोदी से यह सवाल पूछा है। पार्टी नेता मनीष तिवारी का कहना है, हमें पता चला है कि सरकार ऐसा कर रही है। मोदी सरकार की मंशा है कि पांच साल में छठी बार बजट पेश कर दिया जाए। नया वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2019 से लेकर 31 मार्च 2020 तक है, जबकि सरकार का कार्यकाल 26 मई तक है।
तिवारी ने सवाल किया कि मात्र 56 दिन की कोई सरकार 365 दिन का बजट कैसे बना सकती है। यह संसदीय प्रणाली और मान्यताओं के साथ खिलवाड़ होगा। अगर सरकार ऐसा करती है तो कांग्रेस पार्टी संसद के अंदर और बाहर, इसका विरोध करेगी।
वीरवार को एक प्रेसवार्ता में मनीष तिवारी ने कहा, सरकार जो करने जा रही है, वह पिछले सत्तर साल में किसी ने नहीं किया। एनडीए-भाजपा सरकार अपने पांच बजट पेश कर चुकी है।मात्र 56 दिन के कार्यकाल में किसी भी सरकार को सालभर का वित्तीय बजट पेश करने का अधिकार नहीं है। चुनावी अवसरवाद से प्रेरित होकर यदि केंद्र सरकार ऐसा कदम उठाती है तो उसकी कोई वैद्यता नहीं होगी।बजट पेश करने के बाद उसे 75 दिन में पास कराना होता है। अब सरकार के पास इतना समय ही नहीं है।
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बजट को स्टेंडिंग कमेटी के पास कब भेजा जाएगा, छंटनी कमेटी उसे कब देखेगी, स्थायी समिति की रिपोर्ट कब आएगी और इन सबके बाद वह बजट पेश होगा। इस दौरान वोट ऑन अकाउंट में जो प्रक्रियाएं होती हैं, वे कब पूरी की जाएंगी।मसलन, खर्च का ब्यौरा, कितना राजस्व एकत्रित हुआ और नए वित्तीय संसाधन, कॉंटेजेन्सी फंड जैसी औपचारिकताओं का क्या होगा। कांग्रेस नेता ने कहा, सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है।
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तिवारी ने सवाल किया कि मात्र 56 दिन की कोई सरकार 365 दिन का बजट कैसे बना सकती है। यह संसदीय प्रणाली और मान्यताओं के साथ खिलवाड़ होगा। अगर सरकार ऐसा करती है तो कांग्रेस पार्टी संसद के अंदर और बाहर, इसका विरोध करेगी।
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वीरवार को एक प्रेसवार्ता में मनीष तिवारी ने कहा, सरकार जो करने जा रही है, वह पिछले सत्तर साल में किसी ने नहीं किया। एनडीए-भाजपा सरकार अपने पांच बजट पेश कर चुकी है।मात्र 56 दिन के कार्यकाल में किसी भी सरकार को सालभर का वित्तीय बजट पेश करने का अधिकार नहीं है। चुनावी अवसरवाद से प्रेरित होकर यदि केंद्र सरकार ऐसा कदम उठाती है तो उसकी कोई वैद्यता नहीं होगी।बजट पेश करने के बाद उसे 75 दिन में पास कराना होता है। अब सरकार के पास इतना समय ही नहीं है।
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बजट को स्टेंडिंग कमेटी के पास कब भेजा जाएगा, छंटनी कमेटी उसे कब देखेगी, स्थायी समिति की रिपोर्ट कब आएगी और इन सबके बाद वह बजट पेश होगा। इस दौरान वोट ऑन अकाउंट में जो प्रक्रियाएं होती हैं, वे कब पूरी की जाएंगी।मसलन, खर्च का ब्यौरा, कितना राजस्व एकत्रित हुआ और नए वित्तीय संसाधन, कॉंटेजेन्सी फंड जैसी औपचारिकताओं का क्या होगा। कांग्रेस नेता ने कहा, सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है।