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Chandrayaan-3: चंद्र सतह का तापमान मापने में जुटा चंद्रयान-3, आखिर यह अहम क्यों; जानें इससे NASA क्या सीखेगा
Tue, 29 Aug 2023 06:04 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 29 Aug 2023 06:04 PM IST
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चंद्रयान-3
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
चांद की सतह पर ऐतिहासिक लैंडिंग के बाद चंद्रयान-3 अपने मिशन में जुटा हुआ है। चंद्रयान-3 अभियान के उद्देश्यों में तीन चीजों को शामिल किया गया था। यान की सॉफ्ट लैंडिंग, रोवर प्रज्ञान को लैंडर विक्रम से अलग कर चंद्र सतह पर चलाना और मिशन में शामिल सात उपकरणों से काम लेना।अब तीसरे हिस्से के तहत असली काम जारी है। इसमें उपकरणों से विभिन्न प्रयोग हो रहे हैं, विश्लेषण और डाटा जुटाया जा रहा है। इस बीच हमें जानना जरूरी है कि चंद्रयान-3 क्या है? यह चांद की सतह पर कब उतरा? चंद्रयान-3 चांद की सतह पर अभी क्या कर रहा है? अभी तक इसने क्या-क्या डाटा जुटाए हैं? इन आंकड़ों के मायने क्या हैं? आइये समझते हैं...
चंद्रयान 3
- फोटो :
social media
चंद्रयान-3 क्या है?
चंद्रयान-3 मिशन चंद्रयान-2 का ही अगला चरण है, जो चंद्रमा की सतह पर उतरकर परीक्षण कर रहा है। यह चंद्रयान-2 की तरह ही दिखता है, जिसमें एक लैंडर और एक रोवर शामिल किए गए हैं। चंद्रयान-3 का फोकस चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंड करने पर रहा। मिशन की सफलता के लिए नए उपकरण बनाए गए। एल्गोरिदम को बेहतर किया गया। जिन वजहों से चंद्रयान-2 मिशन चंद्रमा की सतह नहीं उतर पाया था, उन पर फोकस किया गया।
चंद्रयान-3 मिशन चंद्रयान-2 का ही अगला चरण है, जो चंद्रमा की सतह पर उतरकर परीक्षण कर रहा है। यह चंद्रयान-2 की तरह ही दिखता है, जिसमें एक लैंडर और एक रोवर शामिल किए गए हैं। चंद्रयान-3 का फोकस चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंड करने पर रहा। मिशन की सफलता के लिए नए उपकरण बनाए गए। एल्गोरिदम को बेहतर किया गया। जिन वजहों से चंद्रयान-2 मिशन चंद्रमा की सतह नहीं उतर पाया था, उन पर फोकस किया गया।
चंद्रयान 3
- फोटो :
सोशल मीडिया
यह चांद की सतह पर कब उतरा?
मिशन ने 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा केन्द्र से उड़ान भरी थी और योजना के अनुसार 23 अगस्त को चंद्रमा पर उतर गया। इस मिशन से भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके साथ ही चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत पहला देश बन गया।
मिशन ने 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा केन्द्र से उड़ान भरी थी और योजना के अनुसार 23 अगस्त को चंद्रमा पर उतर गया। इस मिशन से भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके साथ ही चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत पहला देश बन गया।
चंद्रयान-3
- फोटो :
इसरो
चंद्रयान-3 चांद की सतह पर अभी क्या कर रहा है?
इसरो ने शनिवार को बताया था कि चंद्रयान-3 मिशन के तीन उद्देश्यों में से दो हासिल कर लिए गए हैं, जबकि तीसरे पर काम चल रहा है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने यह भी कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के सभी पेलोड सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। दरअसल, मिशन में शामिल सात उपकरणों से काम लेना और चांद की सतह से डाटा इकट्ठा करना ही इसका तीसरा उद्देश्य है।
जानकारी के मुताबिक, अंतरिक्ष यान ने अपने उपकरणों द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयोगों से महत्वपूर्ण डाटा जारी करना शुरू कर दिया है। रविवार को इसरो ने ChaSTE (चंद्रमा का सतही तापीय प्रयोग) उपकरण द्वारा किए गए अवलोकनों से अपनी तरह का पहला डाटा जारी किया।
इसरो ने शनिवार को बताया था कि चंद्रयान-3 मिशन के तीन उद्देश्यों में से दो हासिल कर लिए गए हैं, जबकि तीसरे पर काम चल रहा है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने यह भी कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के सभी पेलोड सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। दरअसल, मिशन में शामिल सात उपकरणों से काम लेना और चांद की सतह से डाटा इकट्ठा करना ही इसका तीसरा उद्देश्य है।
जानकारी के मुताबिक, अंतरिक्ष यान ने अपने उपकरणों द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयोगों से महत्वपूर्ण डाटा जारी करना शुरू कर दिया है। रविवार को इसरो ने ChaSTE (चंद्रमा का सतही तापीय प्रयोग) उपकरण द्वारा किए गए अवलोकनों से अपनी तरह का पहला डाटा जारी किया।
Chandrayaan 3
- फोटो :
Istock
अभी तक इसने क्या-क्या डाटा जुटाए हैं?
विक्रम लैंडर में लगे ChaSTE उपकरण का उद्देश्य चंद्रमा की सतह की तापीय चालकता का अध्ययन करना है। इसके साथ ही उपकरण चंद्रमा की सतह पर और नीचे अलग-अलग जगहों पर तापमान में अंतर को भी माप रहा है। ChaSTE लैंडर मॉड्यूल के चार उपकरणों में से एक है। इसे तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला और अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला द्वारा विकसित किया गया है।
ChaSTE उपकरण ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के बारे में इसरो को एक अहम जानकारी दी है। इस उपकरण से मिली रीडिंग ने में बताया है कि चांद की सतह और उसके नीचे के तापमान में काफी ज्यादा अस्थिरता है।
इसरो द्वारा साझा किए ग्राफ में देख जा सकता है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर तापमान 50 से लेकर 60 डिग्री सेल्सियस तक है। वहीं सतह के 10 सेंटीमीटर नीचे का तापमान -10 डिग्री सेल्सियस है। उपकरण द्वारा लिए गए मापों से पता चला कि चंद्र सतह की ऊपरी मिट्टी बहुत अच्छी तरह से गर्मी का वहन नहीं करती है और उप-सतह को गर्मी से बचाती है। यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट ऊपरी मिट्टी और उपमृदा के तापमान का पहला प्रत्यक्ष माप है।
विक्रम लैंडर में लगे ChaSTE उपकरण का उद्देश्य चंद्रमा की सतह की तापीय चालकता का अध्ययन करना है। इसके साथ ही उपकरण चंद्रमा की सतह पर और नीचे अलग-अलग जगहों पर तापमान में अंतर को भी माप रहा है। ChaSTE लैंडर मॉड्यूल के चार उपकरणों में से एक है। इसे तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला और अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला द्वारा विकसित किया गया है।
ChaSTE उपकरण ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के बारे में इसरो को एक अहम जानकारी दी है। इस उपकरण से मिली रीडिंग ने में बताया है कि चांद की सतह और उसके नीचे के तापमान में काफी ज्यादा अस्थिरता है।
इसरो द्वारा साझा किए ग्राफ में देख जा सकता है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर तापमान 50 से लेकर 60 डिग्री सेल्सियस तक है। वहीं सतह के 10 सेंटीमीटर नीचे का तापमान -10 डिग्री सेल्सियस है। उपकरण द्वारा लिए गए मापों से पता चला कि चंद्र सतह की ऊपरी मिट्टी बहुत अच्छी तरह से गर्मी का वहन नहीं करती है और उप-सतह को गर्मी से बचाती है। यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट ऊपरी मिट्टी और उपमृदा के तापमान का पहला प्रत्यक्ष माप है।
Chandrayaan-3
- फोटो :
Amar Ujala
इन आंकड़ों के मायने क्या हैं?
चांद की सतह के तापमान प्रोफाइल से आगामी चंद्र मिशनों को काफी मदद मिलेगी। नासा का आर्टेमिस-3 मिशन 2025 में भेजा जाना है। जब मिशन में शामिल लोग यहां उतरेंगे तो उन्हें किस प्रकार का अनुभव होगा और यहां पर किस प्रकार की सामग्रियों का उपयोग किया जा सकता है, यह सब कुछ तापमान प्रोफाइल से ही संभव होगा।
इसी तरह, वैज्ञानिक चंद्रमा की तात्विक संरचना, विकिरण के स्तर और कंपन गतिविधियों का सटीक अंदाजा लगाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां बर्फ के बीच जमे हुए पानी की संभावित मौजूदगी भी वैज्ञानिकों की एक बड़ी दिलचस्पी बनी है। पानी न केवल मनुष्य के लंबे समय तक रहने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ईंधन के रूप में इसकी उपयोगिता के दृष्टिकोण से भी अहम है।
अंततः तमाम मिशनों का उद्देश्य यह है कि चांद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की तरह एक स्थायी स्टेशन के रूप में काम करे जिसमें वैज्ञानिक प्रयोग लगातार चल सकें और अंतरिक्ष यात्री नियमित रूप से वहां जा सकें। यह तभी संभव होगा जब वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए चंद्रमा पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर पाएंगे।
चांद की सतह के तापमान प्रोफाइल से आगामी चंद्र मिशनों को काफी मदद मिलेगी। नासा का आर्टेमिस-3 मिशन 2025 में भेजा जाना है। जब मिशन में शामिल लोग यहां उतरेंगे तो उन्हें किस प्रकार का अनुभव होगा और यहां पर किस प्रकार की सामग्रियों का उपयोग किया जा सकता है, यह सब कुछ तापमान प्रोफाइल से ही संभव होगा।
इसी तरह, वैज्ञानिक चंद्रमा की तात्विक संरचना, विकिरण के स्तर और कंपन गतिविधियों का सटीक अंदाजा लगाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां बर्फ के बीच जमे हुए पानी की संभावित मौजूदगी भी वैज्ञानिकों की एक बड़ी दिलचस्पी बनी है। पानी न केवल मनुष्य के लंबे समय तक रहने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ईंधन के रूप में इसकी उपयोगिता के दृष्टिकोण से भी अहम है।
अंततः तमाम मिशनों का उद्देश्य यह है कि चांद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की तरह एक स्थायी स्टेशन के रूप में काम करे जिसमें वैज्ञानिक प्रयोग लगातार चल सकें और अंतरिक्ष यात्री नियमित रूप से वहां जा सकें। यह तभी संभव होगा जब वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए चंद्रमा पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर पाएंगे।