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कोरोना मरीजों को क्यों नहीं मिल पाती पर्याप्त ऑक्सीजन? इस कमी को कैसे दूर करते हैं डॉक्टर

Sun, 31 May 2020 04:49 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sun, 31 May 2020 04:49 PM IST
सार

  • पांच जून तक दिल्ली में उपलब्ध हो जाएंगे 9500 कोरोना बेड्स,
  • 3180 बेड्स पर ऑक्सीजन चढ़ाने की सुविधा उपलब्ध,
  • जीटीबी के कोविड डेडीकेटेड करने पर काम जारी, सभी 2000 बेड्स होंगे ऑक्सीजन सपोर्टेड

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Why don't corona patients get enough oxygen? How do doctors overcome this deficiency
उपचार करता स्वास्थ्य कर्मी - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

कोरोना वायरस नाक, गले और फेफड़ों पर सबसे ज्यादा आक्रमण करता है। वायरस के प्रभाव से फेफड़ों में सूजन हो जाती है, जिसके कारण यह पर्याप्त वायु अपने अंदर नहीं ले पाता है।
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संक्रमित व्यक्ति को दर्द भी होता है जिसके कारण वह सांस लेने में तकलीफ महसूस करता है। इससे खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। हालत गंभीर होने पर मरीज को ऑक्सीजन मास्क लगााकर ऑक्सीजन की कमी पूरी की जाती है।

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स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर होने पर उसे वेंटीलेटर का सपोर्ट देना पड़ता है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉक्टर एसके पोद्दार ने अमर उजाला को बताया कि कोविड वायरस फेफड़ों को संक्रमित कर रक्त में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित कर देता है।
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ऑक्सीजन की कमी के कारण व्यक्ति की सांस फूलने लगती है। इससे व्यक्ति को बहुत अधिक दर्द और कमजोरी का अहसास होता है।

अगर ऑक्सीजन की कमी को समय से पूरा कर दिया जाए तो व्यक्ति को आराम महसूस होता है।

यही कारण है कि स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टर मरीज को तुरंत ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं।

लगभग 80 फीसदी मामलों में ऑक्सीजन मास्क से शरीर को आवश्यक मात्रा में ऑक्सीजन की पूर्ति हो जाती है। व्यक्ति की हालत स्थिर होने पर दवाओं के प्रभाव से वह स्वस्थ होने लगता है।

लेकिन जब किसी व्यक्ति में संक्रमण बहुत अधिक हो जाता है और वह बिल्कुल सांस लेने की स्थिति में नहीं होता, तब उसे वेंटीलेटर पर रखना पड़ता है।

यही कारण है कि कोरोना काल में आईसीयू बेड और वेंटीलेटर की उपलब्धता पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

दिल्ली में कितने बेड्स पर ऑक्सीजन उपलब्ध

डॉ. एसके पोद्दार के मुताबिक ऑक्सीजन सिलेंडर अब हर अस्पताल की मूल आवश्यकता में शामिल हैं। यही कारण है कि दिल्ली के लगभग सभी प्रमुख अस्पतालों, प्राइवेट अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है।

दिल्ली सरकार ने जिन पांच अस्पतालों को समर्पित कोविड अस्पताल घोषित किया है, उनमें भी आईसीयू, ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटीलेटर्स की पर्याप्त उपलब्धता है।

सरकार यह संख्या लगातार बढ़ाने पर काम कर रही है।

दिल्ली में 6600 कोविड बेड बनाए जा चुके हैं। इनमें 3180 बेड्स ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ उपलब्ध हैं। दिल्ली सरकार ने गुरु तेग बहादुर अस्पताल को भी पूरी तरह कोविड अस्पताल में बदल दिया है।

इस समय यहां 500 बेड हैं जिसे इसी हफ्ते 2000 तक बढ़ाए जाने की योजना है। इन सभी बेड्स पर ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है।

इसके बाद ऑक्सीजन सपोर्टेड बिस्तरों की संख्या में दो हजार की वृद्धि हो जाएगी।

दिल्ली सरकार के मुताबिक पांच जून तक कोरोना बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 9500 तक कर दी जाएगी। प्राइवेट अस्पतालो में भी ऑक्सीजन सपोर्टेड बिस्तरों की पर्याप्त संख्या उपलब्ध है।



राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में इस समय लगभग 320 वेंटीलेटर्स उपलब्ध हैं। इनमें सरकारी अस्पतालों में 250 वेंटीलेटर्स तो बाकी प्राइवेट अस्पतालों के पास हैं।

इनकी उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम चल रहा है।

 

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