फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Why does PM have so much love for Pasmanda Muslims and Speculations about Uniform Civil Code

Pasmanda Muslim: PM को पसमांदा मुसलमानों से इतना प्यार क्यों है? समान नागरिक संहिता की चर्चा से अटकलें तेज

Tue, 27 Jun 2023 05:19 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 27 Jun 2023 05:19 PM IST
सार

भाजपा ने सबसे पहले हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पसमांदा मुसलमानों का मुद्दा उठाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं को पसमांदा मुसलमानों तक पहुंच बनाने की सलाह दी थी। 

विज्ञापन
Why does PM have so much love for Pasmanda Muslims and Speculations about Uniform Civil Code
PM Modi - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' कार्यक्रम के दौरान पसमांदा मुसलमानों, तीन तलाक और यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा उठाया। लखनऊ की एक कार्यकर्ता के प्रश्नों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक ही घर में रहने वाले अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग कानून क्यों होने चाहिए। मोदी के इस बयान के बाद एक बार फिर लोकसभा चुनाव 2024 के पहले समान नागरिक संहिता का कानून लाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्या सरकार यूसीसी को लाने का मन बना चुकी है? बड़ा प्रश्न है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार मुसलमानों और खास कर पसमांदा मुसलमानों का मुद्दा क्यों उठाते हैं? क्या इससे भाजपा को कोई चुनावी लाभ मिल सकता है?
विज्ञापन


भाजपा ने सबसे पहले हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पसमांदा मुसलमानों का मुद्दा उठाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं को पसमांदा मुसलमानों तक पहुंच बनाने की सलाह दी थी। इसके बाद पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा द्वारा कई कार्यक्रम चलाए गए और पसमांदा मुसलमानों के बीच पैठ बनाने की कोशिश की गई। 
विज्ञापन


भाजपा के 300 से ज्यादा लोकसभा सांसद होने के बाद भी उनमें एक भी मुसलमान न होने को लेकर कई बार प्रश्न खड़े किए जाते रहे हैं। पार्टी ने किसी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा था। लेकिन बीजेपी ने अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में 395 मुसलमानों को टिकट देकर यह संदेश देने की कोशिश की कि उसे जिताऊ उम्मीदवारों को टिकट देने में कोई परहेज नहीं है। पार्टी की इस रणनीति का यह असर हुआ कि भाजपा ने कई मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी जीत हासिल की। यह मुसलमान मतदाताओं के समर्थन के बिना नहीं हो सकता था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

Why does PM have so much love for Pasmanda Muslims and Speculations about Uniform Civil Code
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा बात करते हुए। - फोटो : अमर उजाला
मुसलमानों के बिना लक्ष्य प्राप्त करना कठिन
पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव में यूपी की सभी 80 सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन उसका यह लक्ष्य मुसलमानों के साथ के बिना आसानी से पूरा नहीं हो सकता। एक सीमित संख्या में भी यदि उसे मुसलमान मतदाताओं का वोट मिल जाता है तो उसकी बढ़त निर्णायक हो सकती है। यही कारण है कि पार्टी लगातार मुसलमानों के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनावों और निकाय चुनाव के परिणामों का विश्लेषण बताता है कि एक सीमित संख्या में ही सही, भाजपा को मुसलमानों का वोट मिलना शुरू हुआ है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे एक बड़ी राजनीतिक बदलाव की आहट मानते हैं।

पसमांदा मामलों की विशेषज्ञ डॉ फैयाज अहमद फैजी ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सच्चे मायने में पहले सेकुलर प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने केंद्रीय योजनाओं का लाभ पहुंचाते समय केवल अंत्योदय की भावना को ध्यान में रखा। योजनाओं का लाभ पहुंचाते समय लोगों के धर्म या जाति की कोई पहचान नहीं की गई। इसके आधार पर कोई भेद नहीं किया गया और योग्य लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया। सही मायने में इसी को सेकुलर होना कहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके पहले की सरकारें धार्मिक आधार पर योजनाएं चलाती थी जो कि गलत था।

फैयाज अहमद फैजी ने कहा कि तीन तलाक का कानून सबसे ज्यादा पसमांदा मुसलमानों के हक में था। इसका बड़ा कारण है कि मुसलमानों में पसमांदा मुसलमानों में तीन तलाक होने से पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है।  केवल महिलाओं को ही इसका दुष्परिणाम नहीं भुगतना पड़ता, बल्कि पुरुषों को भी दूसरा विवाह करने में मुश्किल आती है। भारतीय हिंदू संस्कृति से प्रभावित होने के कारण पसमांदा मुस्लिम समुदाय के बच्चे अक्सर दूसरी मां को स्वीकार नहीं कर पाते जिससे परिवार की परेशानियां बढ़ जाती हैं। 

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता पूरी तरह देश की भावना के अनुरूप है एक ही देश में अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग कानून क्यों होने चाहिए। यदि मुस्लिम समुदाय देश के आर्थिक और दंड विधान को स्वीकार करता है, और इसमें उसका धर्म आड़े नहीं आता तो यूसीसी को स्वीकार करने से भी कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग अलग कानून होने से लोगों में भेदभाव की भावना बढ़ती है, जबकि सबके लिए एक समान कानून होने से सबके एक बराबर होने का संदेश जाएगा जो कि बहुत आवश्यक है।
 
उन्होंने कहा कि कश्मीर में धारा 370 की समाप्ति भी पसमांदा मुसलमानों के पक्ष में उठाया गया बड़ा कदम था। कश्मीर की कुल आबादी में 90% आबादी पसमांदा मुसलमानों की है। इस कानूनी बदलाव से इन मुसलमानों की जिंदगी को बेहतर बनाने का रास्ता तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed