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सियासत का संग्राम: बंगाल के काला जादू के आगे 'तोता' बना मुर्गा
Mon, 04 Feb 2019 08:51 PM IST
शशिधर पाठक
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Published by: शशिधर पाठक
Updated Mon, 04 Feb 2019 08:51 PM IST
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mamta
- फोटो : PTI
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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रविवार को एक के बाद एक तीन ऐसी घटनाएं हुईं, जिसने संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा कर दी। पहली घटना-केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के अफसरों को खींचकर पुलिस थाने ले जाना। दूसरी घटना-सीबीआई द्वारा बिना कोरम पूरा किए कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई जैसा कदम उठाना। और तीसरी घटना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा खुद सीबीआई के इस हस्तक्षेप पर धरने पर बैठ जाना।
केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद और प्रसाद जावड़ेकर इसे केंद्र के काम में सीधा हस्तक्षेप करार दे रहे हैं। असर सीबीआई की साख पर भी पड़ा है। इसे लेकर सोशल मीडिया में टिप्पणी चल रही है कि पश्चिम बंगाल के काला जादू के सामने तोता(सीबीआई) मुर्गा बन गया है।
क्या कहते हैं प्रकाश सिंह
प्रकाश सिंह उ.प्र. पुलिस के पूर्व महानिदेशक, बीएसएफ के महानिदेशक रह चुके हैं। प्रतिष्ठित आईपीएस अफसर रहे हैं। प्रकाश सिंह को सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव, पश्चिम बंगाल के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काम करने का तरीका बिल्कुल रास नहीं आ रहा है।
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प्रकाश सिंह का कहना है कि तीनों ने अपने-अपने स्तर पर कामकाज, प्रशासन की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। जो बचा है उसे अब आगे केन्द्र और राज्य के टकराव की राजनीति खराब कर रही है।
एम. नागेश्वर राव
प्रकाश सिंह का कहना है कि एम नागेश्वर राव ने पुलिस कमिश्नर के खिलाफ जांच, उनके घर की तलाशी या गिरफ्तारी जैसा कदम उठाया। यह कोई मामूली बात नहीं है। उन्हें ऐसा करने के पहले संयम बरतना चाहिए था। कोरम पूरा करना चाहिए था। भारत सरकार, राज्य सरकार से अनुमति लेनी चाहिए थी। प्रकाश सिंह का कहना है कि सीबीआई को नया निदेशक मिल चुका है।
ऋषि कुमार शुक्ला ने नए निदेशक के तौर पर चार फरवरी को ज्वाइन कर लिया है। ऐसे में एम नागेश्वर राव को उनके ज्वाइन करने का इंतजार करना चाहिए था। नागेश्वर राव को निदेशक की अनुमति लेनी चाहिए थी, लेकिन सीबीआई के अंतरिम निदेशक ने किसी को खुश करने के लिए अदालत का सहारा लेकर ऐसा गलत कदम उठा लिया।
ममता बनर्जी
प्रकाश सिंह के अनुसार एम नागेश्वर राव से बड़ी गड़बड़ी राज्य की मुख्यमंत्री ने कर दिया है। वह मुख्यमंत्री होकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरह धरने पर बैठ गई हैं। अब कौन समझाए कि एक मुख्यमंत्री की पद और उसकी गरिमा होती है।
इस तरह की राजनीति हमेशा प्रशासनिक और सरकारों की छवि पर विपरीत असर डालती हैं। प्रकाश सिंह के अनुसार ममता बनर्जी का यह कृत्य मानसिक संतुलन खोने जैसा है। एक मुख्यमंत्री कभी भी केन्द्र के कामकाज में इस तरह से रोड़ा नहीं अटका सकता। इसके कई और विकल्प, तरीके हैं।
राजीव कुमार
पुलिस कमिश्नर हैं। आईपीएस अफसर हैं। उनकी जिम्मेदारी सुरक्षा की है, लेकिन धरना स्थल के आस-पास उनका मौजूद रहना असंवैधानिक और गलत है। पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को मुख्यमंत्री के साथ इस तरह से न तो बैठना चाहिए था और न ही जांच में बैठना चाहिए था।
एक आईपीएस अफसर और जिम्मेदार पद को संभालने के बाद मैं यही कह सकता हूं कि इतिहास की अनोखी घटना है। राजीव कुमार ने आईपीएस अफसर की मर्यादा का ख्याल नहीं रखा।
कार्रवाई तो राज्य करेगा, डायरेक्शन कोर्ट देगा
प्रकाश सिंह के अनुसार अब सुई सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है। शीर्ष अदालत ही मौजूदा संवैधानिक संकट का समाधान निकालेगी। उसके निर्णय के आधार पर गाड़ी आगे बढ़ेगी। रहा सवाल आईपीएस अफसर राजीव कुमार के विरुद्ध कार्रवाई का तो इस मामले में भी या तो अदालत के दिशा निर्देश सबकुछ तय करेंगे या फिर राज्य सरकार का निर्णय।
केन्द्र सरकार केवल राजीव कुमार के आचरण अशोभनीय होने और राज्य सरकार से उनके खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध ही कर सकता है।
प्रकाश सिंह का कहना है कि पहले केन्द्र और राज्य सरकार संघीय मर्यादा का पालन करते हुए काम करते थे। यह परंपरा अच्छी तरह से निभ रही थी। इस तरह का टकराव नहीं था, लेकिन केन्द्र में मई 2014 में नई सरकार के गठन के बाद से समस्या शुरू हुई है। केन्द्रीय जांच एजेंसी से लेकर राज्य सरकारों तक टकराव खुलकर सामने आ रहे हैं।
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केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद और प्रसाद जावड़ेकर इसे केंद्र के काम में सीधा हस्तक्षेप करार दे रहे हैं। असर सीबीआई की साख पर भी पड़ा है। इसे लेकर सोशल मीडिया में टिप्पणी चल रही है कि पश्चिम बंगाल के काला जादू के सामने तोता(सीबीआई) मुर्गा बन गया है।
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क्या कहते हैं प्रकाश सिंह
प्रकाश सिंह उ.प्र. पुलिस के पूर्व महानिदेशक, बीएसएफ के महानिदेशक रह चुके हैं। प्रतिष्ठित आईपीएस अफसर रहे हैं। प्रकाश सिंह को सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव, पश्चिम बंगाल के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काम करने का तरीका बिल्कुल रास नहीं आ रहा है।
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प्रकाश सिंह का कहना है कि तीनों ने अपने-अपने स्तर पर कामकाज, प्रशासन की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। जो बचा है उसे अब आगे केन्द्र और राज्य के टकराव की राजनीति खराब कर रही है।
एम. नागेश्वर राव
प्रकाश सिंह का कहना है कि एम नागेश्वर राव ने पुलिस कमिश्नर के खिलाफ जांच, उनके घर की तलाशी या गिरफ्तारी जैसा कदम उठाया। यह कोई मामूली बात नहीं है। उन्हें ऐसा करने के पहले संयम बरतना चाहिए था। कोरम पूरा करना चाहिए था। भारत सरकार, राज्य सरकार से अनुमति लेनी चाहिए थी। प्रकाश सिंह का कहना है कि सीबीआई को नया निदेशक मिल चुका है।
ऋषि कुमार शुक्ला ने नए निदेशक के तौर पर चार फरवरी को ज्वाइन कर लिया है। ऐसे में एम नागेश्वर राव को उनके ज्वाइन करने का इंतजार करना चाहिए था। नागेश्वर राव को निदेशक की अनुमति लेनी चाहिए थी, लेकिन सीबीआई के अंतरिम निदेशक ने किसी को खुश करने के लिए अदालत का सहारा लेकर ऐसा गलत कदम उठा लिया।
ममता बनर्जी
प्रकाश सिंह के अनुसार एम नागेश्वर राव से बड़ी गड़बड़ी राज्य की मुख्यमंत्री ने कर दिया है। वह मुख्यमंत्री होकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरह धरने पर बैठ गई हैं। अब कौन समझाए कि एक मुख्यमंत्री की पद और उसकी गरिमा होती है।
इस तरह की राजनीति हमेशा प्रशासनिक और सरकारों की छवि पर विपरीत असर डालती हैं। प्रकाश सिंह के अनुसार ममता बनर्जी का यह कृत्य मानसिक संतुलन खोने जैसा है। एक मुख्यमंत्री कभी भी केन्द्र के कामकाज में इस तरह से रोड़ा नहीं अटका सकता। इसके कई और विकल्प, तरीके हैं।
राजीव कुमार
पुलिस कमिश्नर हैं। आईपीएस अफसर हैं। उनकी जिम्मेदारी सुरक्षा की है, लेकिन धरना स्थल के आस-पास उनका मौजूद रहना असंवैधानिक और गलत है। पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को मुख्यमंत्री के साथ इस तरह से न तो बैठना चाहिए था और न ही जांच में बैठना चाहिए था।
एक आईपीएस अफसर और जिम्मेदार पद को संभालने के बाद मैं यही कह सकता हूं कि इतिहास की अनोखी घटना है। राजीव कुमार ने आईपीएस अफसर की मर्यादा का ख्याल नहीं रखा।
कार्रवाई तो राज्य करेगा, डायरेक्शन कोर्ट देगा
प्रकाश सिंह के अनुसार अब सुई सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है। शीर्ष अदालत ही मौजूदा संवैधानिक संकट का समाधान निकालेगी। उसके निर्णय के आधार पर गाड़ी आगे बढ़ेगी। रहा सवाल आईपीएस अफसर राजीव कुमार के विरुद्ध कार्रवाई का तो इस मामले में भी या तो अदालत के दिशा निर्देश सबकुछ तय करेंगे या फिर राज्य सरकार का निर्णय।
केन्द्र सरकार केवल राजीव कुमार के आचरण अशोभनीय होने और राज्य सरकार से उनके खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध ही कर सकता है।
प्रकाश सिंह का कहना है कि पहले केन्द्र और राज्य सरकार संघीय मर्यादा का पालन करते हुए काम करते थे। यह परंपरा अच्छी तरह से निभ रही थी। इस तरह का टकराव नहीं था, लेकिन केन्द्र में मई 2014 में नई सरकार के गठन के बाद से समस्या शुरू हुई है। केन्द्रीय जांच एजेंसी से लेकर राज्य सरकारों तक टकराव खुलकर सामने आ रहे हैं।