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महिलाओं को शांति से जीने का हक, प्यार के लिए मजबूर नहीं कर सकते : सुप्रीम कोर्ट

Mon, 24 Apr 2017 03:36 AM IST
amarujala.com- Presented by: संदीप भ्ाट्ट
amarujala.com- Presented by: संदीप भ्ाट्ट Updated Mon, 24 Apr 2017 03:36 AM IST
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Why can’t a woman live in peace in India, no one can force her to love: SC
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सवाल किया कि क्या इस देश में महिलाओं को शांति से जीने का अधिकार नहीं है? शीर्ष अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी महिला को प्रेम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता क्योंकि महिला की खुद की स्वतंत्र पसंद होती है। 
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति एमएम शांता नागोंदर की पीठ ने एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 16 वर्षीय एक लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ करने और आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर करने के एक मामले में सात साल की कारावास की सजा सुनाई है। याचिकाकर्ता ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है।
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आरोपी की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, ‘यह किसी भी महिला की अपनी पसंद है कि वह किसी व्यक्ति से प्रेम करना चाहती है या नहीं। महिला पर कोई भी किसी से प्रेम करने का दबाव नहीं बना सकता। प्रेम की अवधारणा होती है और पुरुषों को यह स्वीकार करना चाहिए।’ 
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बहस के दौरान व्यक्ति की ओर से पेश अधिवक्ता ने लड़की के मृत्यु पूर्व बयान पर संदेह जताते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान वह बोलने या लिखने में सक्षम नहीं थी। अधिवक्ता ने कहा, ‘चिकित्सकों ने बताया कि वह 80 फीसदी जल चुकी थी और मृत्यु पूर्व बयान लिखना उसके लिए संभव नहीं था। वह बोल भी नहीं सकती थी।

उसके दोनों हाथ जल चुके थे। वह इस स्थिति में नहीं थी कि कुछ लिख या कह सके।’ इस पर पीठ ने व्यक्ति से कहा कि लड़की के मृत्यु पूर्व बयान के मुताबिक ‘तुमने ऐसे हालात बना दिए कि उसे आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा।’ उक्त व्यक्ति को जुलाई 2010 में ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।


पुलिस के अनुसार लड़की के पिता ने उक्त व्यक्ति पर अपहरण और बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। इस मामले में वह बरी हो गया था। आरोप के अनुसार इसके बाद उक्त व्यक्ति  लड़की से छेड़छाड़ करने लगा और उसे धमकियां देने लगा, जिससे तंग आकर उसने जुलाई 2008 में खुद को आग लगा ली। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 
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