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Chopper Crash: कौन थे शेन यी मिंग, जनरल रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश से उनकी मौत की तुलना पर क्यों भड़का चीनी मीडिया
Thu, 09 Dec 2021 05:29 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 09 Dec 2021 05:29 PM IST
सार
जब यह घटना हुई तब 62 वर्षीय जनरल और उनका दल पूर्वोत्तर यिलान काउंटी में सैनिकों से मिलने के लिए एक नियमित मिशन पर थे। शेन को उत्कृष्ट 'कमांडर’ माना जाता था जिन्होंने देश की वायु शक्ति को बढ़ाने में मदद की थी।
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जनरल बिपिन रावत-ताइवान के जनरल प्रमुख रहे शेन यी मिंग
- फोटो : Social Media
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विस्तार
तमिलनाडु के कुन्नूर में वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर क्रैश होने सीडीएस रावत और उनकी पत्नी मधुलिका समेत 13 लोगों का निधन हो गया। पूरा देश इस घटना से स्तब्ध है। जनरल रावत, उनकी पत्नी और बाकी लोगों का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंच गया है। इस हादसे को लेकर विशेषज्ञ और जानकार अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और हथियार नियंत्रण के मुद्दों के विशेषज्ञ और ब्रहमा चेलानी ने भी एक ट्वीट किया जिसके बाद चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स नाराज हो गया और उसने कहा कि इस क्रैश के पीछे अमेरिका का हाथ है।
चेलानी ने क्या ट्वीट किया
सीडीएस रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश को लेकर प्रोफेसर ब्रहमा चेलानी ने कई ट्वीट्स किए थे। उन्होंने अपने ट्वीट्स के जरिए सीडीएस रावत और ताइवान के जनरल स्टाफ के प्रमुख शेन यी मिंग के हेलीकॉप्टर क्रैश में समानताएं बताईं। 2002 में हुए इस दुर्घटना में शेन यी मिंग समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, चेलानी ने ये भी कहा कि वो दोनों घटनाओं में कोई कड़ी जोड़ने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। अपने एक दूसरे ट्वीट में चेलानी ने सफाई देते हुए लिखा, 'इस अजीब समानता का ये मतलब नहीं है कि दोनों हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में कोई कनेक्शन है या किसी बाहरी ताकत का हाथ है।
जनरल रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश की घटना को ताइवान के जनरल प्रमुख के हेलीकॉप्टर क्रैश के समान बताने पर चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स भड़क गया। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा , 'भारत के शीर्ष सैन्य अधिकारी की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन भारत में एक तथाकथित विद्वान ब्रह्म चेलानी ने चीन-भारत संबंधों में नए तनाव पैदा करने का प्रयास करके फायदा उठाया।
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कौन थे शेन यी मिंग
पिछले साल दो जनवरी को ताइवान के शीर्ष सैन्य प्रमुख की एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। रक्षा मंत्रालय के तब के बयान के मुताबिक नए राष्ट्रपति का चुनाव होने से कुछ दिन पहले यह घटना हुई। जब यह घटना हुई तब 62 वर्षीय जनरल और उनका दल पूर्वोत्तर यिलान काउंटी में सैनिकों से मिलने के लिए एक नियमित मिशन पर थे। शेन को उत्कृष्ट 'कमांडर’ माना जाता था जिन्होंने देश की वायु शक्ति को बढ़ाने में मदद की थी।
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चेलानी ने क्या ट्वीट किया
सीडीएस रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश को लेकर प्रोफेसर ब्रहमा चेलानी ने कई ट्वीट्स किए थे। उन्होंने अपने ट्वीट्स के जरिए सीडीएस रावत और ताइवान के जनरल स्टाफ के प्रमुख शेन यी मिंग के हेलीकॉप्टर क्रैश में समानताएं बताईं। 2002 में हुए इस दुर्घटना में शेन यी मिंग समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, चेलानी ने ये भी कहा कि वो दोनों घटनाओं में कोई कड़ी जोड़ने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। अपने एक दूसरे ट्वीट में चेलानी ने सफाई देते हुए लिखा, 'इस अजीब समानता का ये मतलब नहीं है कि दोनों हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में कोई कनेक्शन है या किसी बाहरी ताकत का हाथ है।
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जनरल रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश की घटना को ताइवान के जनरल प्रमुख के हेलीकॉप्टर क्रैश के समान बताने पर चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स भड़क गया। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा , 'भारत के शीर्ष सैन्य अधिकारी की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन भारत में एक तथाकथित विद्वान ब्रह्म चेलानी ने चीन-भारत संबंधों में नए तनाव पैदा करने का प्रयास करके फायदा उठाया।
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कौन थे शेन यी मिंग
पिछले साल दो जनवरी को ताइवान के शीर्ष सैन्य प्रमुख की एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। रक्षा मंत्रालय के तब के बयान के मुताबिक नए राष्ट्रपति का चुनाव होने से कुछ दिन पहले यह घटना हुई। जब यह घटना हुई तब 62 वर्षीय जनरल और उनका दल पूर्वोत्तर यिलान काउंटी में सैनिकों से मिलने के लिए एक नियमित मिशन पर थे। शेन को उत्कृष्ट 'कमांडर’ माना जाता था जिन्होंने देश की वायु शक्ति को बढ़ाने में मदद की थी।
ताइवान के जनरल स्टाफ प्रमुख शेन यी मिंग
- फोटो : Social Media
वायु सेना के आधुनिकीकरण का प्रयास किया था
62 वर्षीय शेन जनरल स्टाफ के प्रमुख के रूप में नियुक्त होने से पहले ताइवान के वायु सेना प्रमुख और उप रक्षा मंत्री के रूप में काम कर चुके थे। उन्होंने द्वीप की वायु सेना के आधुनिकीकरण के प्रयासों की कोशिश की थी जिसमें अपने लड़ाकू जेट विमानों को अपग्रेड करना और यूएएस से अत्याधुनिक F-16V विमान खरीदने की योजना थी। उन्होंने वायु सेना प्रमुख के तौर पर यमन के एक गुप्त मिशन में भाग लिया था और बाद में लड़ाकू विमानों के बेड़े को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
शेन ताइवान की सैन्य ताकत इसलिए बढ़ा रहे थे क्योंकि स्व-शासित ताइवान पर चीन अपना दावा करता है और बल प्रयोग करने की धमकी देता है। ताइवान का कहना है कि वह चीन के दबाव के आगे नहीं झुकेगा। हालांकि द्वीप का स्वघोषित नाम ‘चीन गणराज्य’ (रिपब्लिक ऑफ चाइना) है जो उसके शासकों ने दिया।
चीन नहीं चाहता कोई विदेशी दखल
ताइवान की रक्षा के लिए अमेरिका उसे सैन्य उपकरण बेचता है, जिसमें ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी शामिल है। ओबामा प्रशासन ने 6.4 अरब डॉलर के हथियारों के सौदे के तहत 2010 में ताइवान को 60 ब्लैक हॉक्स बेचने की मंजूरी दी थी। इसके जवाब में, चीन ने अमेरिका के साथ कुछ सैन्य संबंधों को अस्थायी रूप से तोड़ दिया। अमेरिका के साथ ताइवान के बीच टकराव 1996 से चला आ रहा है। चीन ताइवान के मुद्दे पर किसी तरह का विदेशी दखल नहीं चाहता है।
62 वर्षीय शेन जनरल स्टाफ के प्रमुख के रूप में नियुक्त होने से पहले ताइवान के वायु सेना प्रमुख और उप रक्षा मंत्री के रूप में काम कर चुके थे। उन्होंने द्वीप की वायु सेना के आधुनिकीकरण के प्रयासों की कोशिश की थी जिसमें अपने लड़ाकू जेट विमानों को अपग्रेड करना और यूएएस से अत्याधुनिक F-16V विमान खरीदने की योजना थी। उन्होंने वायु सेना प्रमुख के तौर पर यमन के एक गुप्त मिशन में भाग लिया था और बाद में लड़ाकू विमानों के बेड़े को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
शेन ताइवान की सैन्य ताकत इसलिए बढ़ा रहे थे क्योंकि स्व-शासित ताइवान पर चीन अपना दावा करता है और बल प्रयोग करने की धमकी देता है। ताइवान का कहना है कि वह चीन के दबाव के आगे नहीं झुकेगा। हालांकि द्वीप का स्वघोषित नाम ‘चीन गणराज्य’ (रिपब्लिक ऑफ चाइना) है जो उसके शासकों ने दिया।
चीन नहीं चाहता कोई विदेशी दखल
ताइवान की रक्षा के लिए अमेरिका उसे सैन्य उपकरण बेचता है, जिसमें ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी शामिल है। ओबामा प्रशासन ने 6.4 अरब डॉलर के हथियारों के सौदे के तहत 2010 में ताइवान को 60 ब्लैक हॉक्स बेचने की मंजूरी दी थी। इसके जवाब में, चीन ने अमेरिका के साथ कुछ सैन्य संबंधों को अस्थायी रूप से तोड़ दिया। अमेरिका के साथ ताइवान के बीच टकराव 1996 से चला आ रहा है। चीन ताइवान के मुद्दे पर किसी तरह का विदेशी दखल नहीं चाहता है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- फोटो : Amar
चीन ताइवान पर दावा क्यों करता है?
1644 में चीन में चिंग वंश का शासन था। तब ताइवान चीन का हिस्सा था। 1895 में चीन ने ताइवान को जापान को सौंप दिया। कहा जाता है कि विवाद यहीं से शुरू हुआ 1949 से। चीन में गृहयुद्ध के दौरान माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्टों ने चियांग काई शेक के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कॉमिंगतांग पार्टी को हरा दिया। हार के बाद कॉमिंगतांग पार्टी ताइवान पहुंच गई और वहां जाकर अपनी सरकार बना ली। इस बीच दूसरे विश्वयुद्ध में जापान की हार हुई तो उसने कॉमिंगतांग को ताइवान का नियंत्रण सौंप दिया। विवाद इस बात पर शुरू हुआ कि जब कम्युनिस्टों ने जीत हासिल की है ताइवान पर उनका अधिकार है।
जबकि कॉमिंगतांग की दलील थी कि वे चीन के कुछ ही हिस्सों में हारे हैं लेकिन वे ही आधिकारिक रूस से चीन का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए ताइवान पर उनका अधिकार है। चीन रणनीतिक और प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण इस द्वीप को फिर से अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान और चीन के पुन: एकीकरण की जोरदार वकालत करते हैं। हालांकि ताइवान खुद को संप्रभू राष्ट्र मानता है।
1644 में चीन में चिंग वंश का शासन था। तब ताइवान चीन का हिस्सा था। 1895 में चीन ने ताइवान को जापान को सौंप दिया। कहा जाता है कि विवाद यहीं से शुरू हुआ 1949 से। चीन में गृहयुद्ध के दौरान माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्टों ने चियांग काई शेक के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कॉमिंगतांग पार्टी को हरा दिया। हार के बाद कॉमिंगतांग पार्टी ताइवान पहुंच गई और वहां जाकर अपनी सरकार बना ली। इस बीच दूसरे विश्वयुद्ध में जापान की हार हुई तो उसने कॉमिंगतांग को ताइवान का नियंत्रण सौंप दिया। विवाद इस बात पर शुरू हुआ कि जब कम्युनिस्टों ने जीत हासिल की है ताइवान पर उनका अधिकार है।
जबकि कॉमिंगतांग की दलील थी कि वे चीन के कुछ ही हिस्सों में हारे हैं लेकिन वे ही आधिकारिक रूस से चीन का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए ताइवान पर उनका अधिकार है। चीन रणनीतिक और प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण इस द्वीप को फिर से अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान और चीन के पुन: एकीकरण की जोरदार वकालत करते हैं। हालांकि ताइवान खुद को संप्रभू राष्ट्र मानता है।