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WHO Report: टीबी, टीकाकरण व एचआईवी की निगरानी पटरी पर लौटी, महामारी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार
Sat, 06 May 2023 05:19 AM IST
Jeet Kumar
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 06 May 2023 05:19 AM IST
सार
रिपोर्ट के अनुसार, 125 देशों की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में बदलाव आ रहा है। इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं में आई बाधा 50 फीसदी तक दूर हुई है। टीबी, टीकाकरण, एचआईवी, मच्छर जनित रोग, इन्फ्लूएंजा की निगरानी में काफी तेजी से सुधार हो रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
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विस्तार
कोरोना महामारी के तीन साल में बुरी तरह से प्रभावित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पटरी पर लौट रही है। महामारी के बाद दुनिया भर में स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार हो रहा है। दुनिया के 125 देशों में इसके बेहतर संकेत मिले हैं। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की जारी चौथी ग्लोबल पल्स सर्वेक्षण (अंतरिम रिपोर्ट) में सामने आई है। दक्षिण पूर्वी एशिया के 11 में से नौ देश इसमें शामिल हैं। हालांकि भारत का नाम सूची में नहीं है।
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रिपोर्ट के अनुसार, 125 देशों की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में बदलाव आ रहा है। अगर आंकड़ों की बात करें तो 2021 की तुलना में दिसंबर 2022 तक इन देशों की इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं में आई बाधा 50 फीसदी तक दूर हुई है। टीबी, टीकाकरण, एचआईवी, मच्छर जनित रोग, इन्फ्लूएंजा की निगरानी में काफी तेजी से सुधार हो रहा है।
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सर्वेक्षण में शामिल 125 देशों की प्रतिक्रिया के आधार पर डब्ल्यूएचओ ने निष्कर्ष निकाला है कि 2022 की अंतिम तिमाही (अक्तूबर से दिसंबर) में औसतन 23% स्वास्थ्य सेवा ट्रैसर बाधित हुए जबकि 2020 की तीसरी तिमाही में यह रुकावट 56% तक दर्ज की गई थी। इनमें से कुछ ट्रैसर में 24 घंटे की आपातकालीन देखभाल, आपातकालीन सर्जरी, पुनर्वास सेवाएं, परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक, प्रसव पूर्व देखभाल और नियमित सुविधा-आधारित टीकाकरण सेवाएं शामिल हैं।
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इससे पहले फरवरी 2022 में डब्ल्यूएचओ ने तीसरी वैश्विक पल्स सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा था कि महामारी के कारण 90% से अधिक देश अपने लोगों को इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाएं देने में निरंतर बाधाओं का सामना कर रहे हैं। 2021 और 2022 में लगभग 53% देशों ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करने में बाधाओं की सूचना दी थी। साथ ही, 38% देशों ने सामुदायिक देखभाल सेवाओं के वितरण में व्यवधानों की सूचना दी।
भारत के प्रयासों को सराहा
साल 2022 में बीएमजे मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन के प्रो. गोपाल कृष्ण नेटुवेली ने कहा, लॉकडाउन और संक्रमण प्रसार के चलते भारत में भी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ा। 2021 की दूसरी लहर में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से लड़खड़ा गईं थी लेकिन यह स्थिति सिर्फ कुछ महीनों तक ही देखने को मिली। दूसरी लहर निकलने के बाद भारत ने काफी हद तक खुद को वापस पटरी पर लाने के सराहनीय प्रयास किए।
डिजिटल हेल्थ में तेजी से आगे बढ़ा भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के दौर में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र ने डिजिटल रूप से खूब तरक्की की है। बीते तीन साल में ही टेलीमेडिसिन का इस्तेमाल कई गुना बढ़ा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण बताते हैं कि केंद्र सरकार के टेलीमेडिसिन कार्यक्रम के तहत अब तक 10 लाख से ज्यादा मरीज घर बैठे चिकित्सा सलाह का लाभ ले चुके हैं।
इसी तरह, नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि डिजिटल के साथ मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी भारत ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। मौजूदा समय में, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो 140 करोड़ लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए निशुल्क हेल्पलाइन संचालित कर रहा है।