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कोरोना संक्रमण: प्लाज्मा लेने वालों को तीन महीने से पहले वैक्सीन नहीं

Wed, 19 May 2021 03:09 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 19 May 2021 03:09 AM IST
सार

  • राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी सिफारिश
  • कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को छह से नौ माह के बाद ही लगे वैक्सीन

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who have taken plasma, they may have to wait at least three months for the vaccine
कोरोना टीका - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कोरोना संक्रमण के दौरान जो लोग प्लाज्मा ले चुके हैं उन्हें वैक्सीन के लिए कम से कम तीन माह का इंतजार करना पड़ सकता है। इसके अलावा कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद स्वस्थ्य हुए व्यक्तियों के लिए छह से नौ माह बाद ही वैक्सीन दिया जाए। राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने यह सुझाव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा है।

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कोविड उपचार प्रोटोकॉल से प्लाज्मा थेरेपी को हटाने के बाद टीकाकरण को लेकर गठित राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने संक्रमण से ठीक होने वालों को वैक्सीन कब तक दिए जाने को लेकर समीक्षा बैठक की थी जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययनों पर भी लंबी चर्चा की।
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एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद एक व्यक्ति में एंटीबॉडी नौ माह तक मिल रही हैं। ऐसे में इन व्यक्तियों को वैक्सीन लेने की आवश्यकता इस अवधि तक नहीं है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन की एक खुराक लेने के बाद किसी भी व्यक्ति में एंटीबॉडी बनने लगती हैं।
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दूसरी खुराक लेने के बाद यह एंटीबॉडी बूस्ट हो जाती हैं और इनका स्तर 100 फीसदी तक पहुंच जाता है। अगर कोई कोरोना संक्रमण से ठीक हुआ है तो उसके शरीर में पहले से ही एंटीबॉडी होती हैं जोकि छह से नौ माह बाद कम होने लगती हैं। तब उस व्यक्ति को वैक्सीन लगाना ज्यादा और लंबे समय तक असरदार हो सकता है।

हालांकि संक्रमण से ठीक होने के बाद वैक्सीन लेने की अवधि को लेकर अब तक सरकार के विशेषज्ञ सटीक जानकारी नहीं दे पाए हैं। पिछले माह नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा था कि संक्रमण से ठीक होने के छह से आठ सप्ताह बाद वैक्सीन ली जा सकती है लेकिन पिछले सप्ताह उन्होंने कहा कि अगर कोई कोरोना संक्रमित है तो स्वस्थ्य होने के छह माह बाद वैक्सीन ले सकता है।

नई दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के भी यह बयान सामने आए थे। जबकि वर्तमान स्थिति यह है कि संक्रमण से रिकवर होने के चार से आठ सप्ताह बाद लोगों को वैक्सीन दी जा रही है।

कोविशील्ड की दो खुराक के बीच 12 से 16 सप्ताह का अंतर रखने की सिफारिश करने वाली राष्ट्रीय टास्क फोर्स का कहना है कि पहली लहर के दौरान दोबारा संक्रमण की दर 4.5 फीसदी तक थी। यह भी देखने को मिल चुका है कि संक्रमण से ठीक होने के तीन माह बाद लोगों में एंटीबॉडी कम होने लगती हैं।

आईसीएमआर का ही एक अध्ययन है कि कोरोना से रिकवर होने वाले व्यक्ति में छह महीने तक एंटीबॉडी मिल रही हैं लेकिन सबसे अधिक एंटीबॉडी शुरूआती तीन महीने में दिखाई दे रही हैं। सीएसआईआर भी इसे लेकर एक अध्ययन कर चुका है जिसके परिणाम भी लगभग एक जैसे हैं।


इसके अलावा राष्ट्रीय टास्क फोर्स में मौजूद सदस्यों ने यह भी सिफारिश की है कि अगर कोई व्यक्ति पहले से बीमार है या अस्वस्थ्य महसूस कर रहा है तो उन्हें वैक्सीन तब तक नहीं लेनी चाहिए जब तक कि वे खुद को पूरी तरह से स्वस्थ्य महसूस न कर लें। हालांकि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के वैक्सीन को लेकर अभी तक विशेषज्ञों ने फैसला नहीं लिया है।

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