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शराब और मौतें : किस राज्य में जहरीली शराब से होती हैं सबसे ज्यादा मौतें, शराबबंदी वाले राज्यों का क्या हाल?
सार
किस राज्य में जहरीली शराब से कितनी मौतें होती हैं? जहां-जहां शराबबंदी का कानून लागू है, वहां की क्या स्थिति है? शराब पर रोक के बावजूद बिहार में कैसे इसकी वजह से लोगों की जान जाती है? और ये शराब शराबबंदी वाले बिहार में पहुंचती कैसे है?
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बिहार में जहरीली शराब से मौतें।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार में पिछले तीन दिन के अंदर जहरीली शराब के चलते 66 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 61 मौतें छपरा और पांच सीवान में हुईं। इसके बाद से शराब को लेकर सियासत गर्म हो गई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में बयान दिया कि जहरीली शराब पीकर जिन लोगों की मौत हुई है, उनसे कोई हमदर्दी नहीं है। जो पीएगा, वो मरेगा। अब विपक्ष इसको लेकर बिहार सरकार को घेरने में जुटा है।
सवाल ये है कि किस राज्य में जहरीली शराब से कितनी मौतें होती हैं? जहां-जहां शराबबंदी का कानून लागू है, वहां की क्या स्थिति है? शराब पर रोक के बावजूद बिहार में कैसे इसकी वजह से लोगों की जान जाती है? और ये शराब शराबबंदी वाले बिहार में पहुंचती कैसे है?
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सवाल ये है कि किस राज्य में जहरीली शराब से कितनी मौतें होती हैं? जहां-जहां शराबबंदी का कानून लागू है, वहां की क्या स्थिति है? शराब पर रोक के बावजूद बिहार में कैसे इसकी वजह से लोगों की जान जाती है? और ये शराब शराबबंदी वाले बिहार में पहुंचती कैसे है?
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पहले जानिए बिहार में अभी क्या-क्या हुआ?
बिहार के छपरा में मंगलवार को जहरीली शराब पीने से कई लोगों की हालत गंभीर हो गई थी। इसकी वजह से 17 लोगों ने दम तोड़ दिया। ये आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अब तक 61 लोगों की यहां मौत हो चुकी है। इसी तरह शुकवार को सीवान में भी जहरीली शराब का तांडव देखने को मिला। यहां थाने के एक चौकीदार समेत पांच लोगों की मौत हो गई।
इसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा, 'शराब से मौत पर कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। शराब पीकर मृत्यु पर हम उसे सहायता राशि देंगे? ये सवाल ही नहीं पैदा होता...इसलिए यह बातें सही नहीं है। जब हम संसद का चुनाव लड़ते थे तब पार्टियां हमारे साथ नहीं थी फिर भी CPI-CPM के लोग हमारा साथ देते थे।' नीतीश ने आगे कहा कि जो भी शराब पिएगा वो मरेगा ही। उसके साथ हमारी कोई हमदर्दी नहीं है। अब इस बयान को लेकर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया है। भाजपा ने सीएम का इस्तीफा मांगा। कहा कि जो मुख्यमंत्री अपने राज्य के लोगों के बारे में ऐसी सोच रखता हो, उसे पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है।
बिहार के छपरा में मंगलवार को जहरीली शराब पीने से कई लोगों की हालत गंभीर हो गई थी। इसकी वजह से 17 लोगों ने दम तोड़ दिया। ये आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अब तक 61 लोगों की यहां मौत हो चुकी है। इसी तरह शुकवार को सीवान में भी जहरीली शराब का तांडव देखने को मिला। यहां थाने के एक चौकीदार समेत पांच लोगों की मौत हो गई।
इसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा, 'शराब से मौत पर कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। शराब पीकर मृत्यु पर हम उसे सहायता राशि देंगे? ये सवाल ही नहीं पैदा होता...इसलिए यह बातें सही नहीं है। जब हम संसद का चुनाव लड़ते थे तब पार्टियां हमारे साथ नहीं थी फिर भी CPI-CPM के लोग हमारा साथ देते थे।' नीतीश ने आगे कहा कि जो भी शराब पिएगा वो मरेगा ही। उसके साथ हमारी कोई हमदर्दी नहीं है। अब इस बयान को लेकर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया है। भाजपा ने सीएम का इस्तीफा मांगा। कहा कि जो मुख्यमंत्री अपने राज्य के लोगों के बारे में ऐसी सोच रखता हो, उसे पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है।
शराब बंदी वाले राज्यों में मौतें
- फोटो : अमर उजाला
आइए जानते हैं कि शराब से किस-किस राज्य में सबसे ज्यादा मौतें हुईं?
2021 : पिछले साल जहरीली शराब के चलते देशभर में 782 लोगों की मौत हुई। सबसे ज्यादा 137 लोगों ने उत्तर प्रदेश में जान गंवाई। पंजाब में 127, मध्य प्रदेश में 108, कर्नाटक में 104, झारखंड में 60 आौर राजस्थान में 51 मौतें हुईं।
2021 : पिछले साल जहरीली शराब के चलते देशभर में 782 लोगों की मौत हुई। सबसे ज्यादा 137 लोगों ने उत्तर प्रदेश में जान गंवाई। पंजाब में 127, मध्य प्रदेश में 108, कर्नाटक में 104, झारखंड में 60 आौर राजस्थान में 51 मौतें हुईं।
2020 : कोरोनाकाल के दौरान भी जहरीली शराब से मौत का तांडव देखने को मिला था। तब देशभर में कुल 931 जहरीली शराब के मामले सामने आए थे। इसके चलते 947 लोगों की मौत हो गई थी। सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में 214, झारखंड में 139, पंजाब में 133, कर्नाटक में 99 और छत्तीसगढ़ में 67 लोगों ने जहरीली शराब के चलते दम तोड़ दिया।
2019 : देश में साल 2019 में 1296 लोगों की मौत जहरीली शराब की वजह से हुई। सबसे ज्यादा 268 लोगों की मौत कर्नाटक में जहरीली शराब पीने से हुई। पंजाब में 191, मध्य प्रदेश में 190, छत्तीसगढ़ और झारखंड में 115-115, असम में 98 और राजस्थान में 88 लोगों ने दम तोड़ दिया था।
2018: एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में जहरीली शराब से मौत के कुल 1365 मामले सामने आए थे। इसमें सबसे ज्यादा 410 मौतें मध्य प्रदेश में हुईं थीं। कर्नाटक में 218, हरियाणा में 162, पंजाब में 159, उत्तर प्रदेश में 78, छत्तीसगढ़ में 77 और राजस्थान में 64 लोगों की मौत हुई।
2017 : देश में साल 2017 में जहरीली शराब के कुल 1497 मामले सामने आए थे, इसमें 1510 लोगों ने दम तोड़ दिया था। सबसे ज्यादा मौतें कर्नाटक में हुईं थीं। यहां 256 लोगों ने दम तोड़ दिया था। इसके अलावा मध्य प्रदेश में 216, आंध्र प्रदेश में 183, पंजाब में 170, हरियाणा में 135, पुडुचेरी में 117 और छत्तीसगढ़ में 104 लोगों की मौत हो गई थी।
2016 : कुल 1073 मामले सामने आए थे, जिसमें 1054 लोगों की मौत हो गई थी। सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में 184 लोगों ने दम तोड़ दिया था। हरियाणा में 169, छत्तीसगढ़ में 142, पंजाब में 72, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 68-68 लोगों की मौत हुई थी।
2015 : कुल 1624 मामले सामने आए थे। इसमें 1522 लोगों की मौत हुई थी। सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 278 लोगों ने दम तोड़ दिया था। पुडुचेरी में 149, मध्य प्रदेश में 246, छत्तीसगढ़ में 140, उत्तर प्रदेश में 125 और हरियाणा में 115 लोगों की मौत हुई थी।
शराब बंदी वाले राज्यों का क्या हाल है?
अभी बिहार के अलावा गुजरात, मिजोरम, नगालैंड और लक्षद्वीप में शराब बंदी कानून लागू है। यहां शराब पीने पर रोक है।
अभी बिहार के अलावा गुजरात, मिजोरम, नगालैंड और लक्षद्वीप में शराब बंदी कानून लागू है। यहां शराब पीने पर रोक है।
| राज्य | 2016 | 2017 | 2018 | 2019 | 2020 |
| गुजरात | 25 | 11 | 01 | 03 | 10 |
| बिहार | 06 | 00 | 00 | 09 | 06 |
| मिजोरम | 10 | 07 | 02 | 00 | 01 |
| नगालैंड | 00 | 01 | 00 | 00 | 00 |
| लक्षद्वीप | 00 | 00 | 00 | 00 | 00 |
बिहार में रोक के बावजूद कैसे मिलती है शराब?
इसे समझने के लिए हमने बिहार के वरिष्ठ पत्रकार पंकज मिश्र से बात की। उन्होंने कहा, 'प्रशासनिक अनदेखी के चलते आज भी धड़ल्ले से बिहार के अंदर शराब बिक रही है। अफसर सबकुछ जानते हैं, फिर भी कुछ नहीं करते हैं। कई जगहों पर तो प्रशासनिक अफसर और नेता भी इसमें शामिल रहते हैं। यही कारण है कि शराबबंदी के बावजूद राज्य में इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। इन घटनाओं के बाद जिम्मेदार अफसरों पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।'
पंकज आगे कहते हैं, 'बिहार में एक तरफ झारखंड तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश से शराब आती है। बॉर्डर पर शराब तस्करों को रोकने के लिए कोई खास व्यवस्था भी नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार में बैठे बहुत से नेता-मंत्री खुद इससे जुड़े रहते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी तो कई बार बोल चुके हैं कि शराबबंदी कानून गलत है। इसे हटाया जाना चाहिए।'
इसे समझने के लिए हमने बिहार के वरिष्ठ पत्रकार पंकज मिश्र से बात की। उन्होंने कहा, 'प्रशासनिक अनदेखी के चलते आज भी धड़ल्ले से बिहार के अंदर शराब बिक रही है। अफसर सबकुछ जानते हैं, फिर भी कुछ नहीं करते हैं। कई जगहों पर तो प्रशासनिक अफसर और नेता भी इसमें शामिल रहते हैं। यही कारण है कि शराबबंदी के बावजूद राज्य में इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। इन घटनाओं के बाद जिम्मेदार अफसरों पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।'
पंकज आगे कहते हैं, 'बिहार में एक तरफ झारखंड तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश से शराब आती है। बॉर्डर पर शराब तस्करों को रोकने के लिए कोई खास व्यवस्था भी नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार में बैठे बहुत से नेता-मंत्री खुद इससे जुड़े रहते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी तो कई बार बोल चुके हैं कि शराबबंदी कानून गलत है। इसे हटाया जाना चाहिए।'