पाकिस्तान में कौन 'बे-ईमान'?: इमरान खान ने अमेरिका का नाम तो लिया, तो चहेते चीन को क्यों छोड़ दिया?
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विस्तार
पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान की कुर्सी बचेगी या जाएगी, रविवार को इसका फैसला हो सकता है। हालांकि विपक्षी पार्टी 'पीपीपी' के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो कह चुके हैं, हम समझते हैं कि इमरान खान ने जिम्मेदारी नहीं दिखाई। पीएम के पास कोई विकल्प नहीं रहा। 'वजीर ए आजम' नहीं रहे। इस्तीफा देना है, इतनी देर नहीं भाग सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) का कहना है, पाकिस्तान में कोई तो बे-ईमान' हो उठा है। इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा के बीच 'धन' को लेकर विवाद रहा है। दरअसल, इस कहानी की स्क्रिप्ट के पीछे जो अहम किरदार है, इमरान खान ने उसका नाम उजागर नहीं किया। उन्होंने 'अमेरिका' का नाम तो ले लिया, लेकिन अपने चहेते 'चीन' को क्यों छोड़ दिया।
इमरान खान और सेना प्रमुख बाजवा के बीच संबंध तनाव भरे
पाकिस्तान में जब कभी इस तरह का राजनीतिक संकट पैदा हुआ है तो उसके पीछे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर फौज की भूमिका नजर आती रही है। ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) बताते हैं, पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के 'वजीर ए आजम' यानी प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख बाजवा के बीच संबंध तनाव भरे रहे हैं। हालांकि जब बाजवा को सेवा विस्तार दिया गया, तो उसमें इमरान खान की बड़ी भूमिका थी। इन दोनों के बीच अर्थव्यवस्था को लेकर बात बिगड़ गई। सेना को पैसा नहीं मिल पा रहा था। चीन का दबाव सेना पर था कि इमरान खान को हटाया जाए। हालांकि इस बीच पीएम इमरान खान, चीनी राष्ट्रपति से भी मिल आए थे। उसके बावजूद मामला नहीं सुलझ सका।
सेना के मामलों में होने लगा था हस्तक्षेप!
इमरान खान ने भी सेना के मामलों में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया। अक्तूबर 2021 में पाकिस्तानी सेना ने आईएसआई के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद, जिन्हें इमरान का विश्वस्त माना जाता है, उन्हें पद से हटा दिया। हमीद को पेशावर कोर का कमांडर नियुक्त किया गया। हमीद ने अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता तक पहुंचाने में मदद की थी। लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अहमद अंजुम को आईएसआई की कमान सौंप दी गई। लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आमिर को गुजरांवाला कोर का कमांडर नियुक्त करने के साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर को सेना का क्वार्टर मास्टर जनरल (क्यूएमजी) नियुक्त कर दिया गया। यहां तक इमरान और बाजवा में तनाव देखा गया। जब पाकिस्तानी फौज के 16वें सेनाध्यक्ष बाजवा को 2019 में सेवा विस्तार देने की बात आई, तो इमरान खान ने कहा था, अभी समय है, देख लेंगे। उस वक्त दोनों के बीच कुछ ऐसा हुआ कि जब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बाजवा के सेवा विस्तार पर रोक लगाई तो इमरान खान ने बावजा के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए डिफेंस एक्ट में बदलाव करा दिया।
चीन का दबाव पाकिस्तान को कर रहा था परेशान
ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) के अनुसार, इमरान को हटाने के लिए सेना के शीर्ष अधिकारियों पर चीन का दबाव पड़ रहा था। दूसरी ओर इमरान ने सेना के खर्चों में कटौती की थी। पाकिस्तान में गत वर्ष एक पनबिजली परिजयोजना पर आतंकी हमला हो गया। करीब तीन दर्जन लोग उसकी चपेट में आ गए। कई चीनी इंजीनियर व दूसरे कर्मी मारे गए। पाकिस्तान को भारी मुआवजा राशि देनी पड़ी।
यहां पर इमरान खान कुछ ढिलाई बरत रहे थे। कई वर्षों से पाकिस्तान में चीन के बड़े प्रोजेक्ट पर स्थानीय हस्तक्षेप बढ़ रहा था। भ्रष्टाचार के मामले खुलने लगे। सेना के पास मौजूद 50 से ज्यादा बड़े कारोबार कमजोर पड़ रहे थे। गत वर्षों में पाक सेना का बिजनेस करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये आंका गया था। सेना के दो दर्जन अफसर जो अब रिटायर हो गए हैं, उनके स्विस बैंक में खाते हैं। इनमें अघोषित तौर पर लगभग 89 हजार करोड़ रुपये (भारतीय रुपये के हिसाब से) जमा थे। पाकिस्तानी सेना के बिजनेस ग्रुप में फौजी फाउंडेशन भी है। इसमें बिजली, हैवी व्हीकल, निर्माण कार्य, मॉल्स और दूसरे कारोबार शामिल हैं। यहां पर इमरान खान का हस्तक्षेप बढ़ने लगा था। अनेक प्रोजेक्ट में चीन का पैसा लगा था। इससे चीनी कंपनियां पीछे हटने लगी। यहीं से सेना पर दबाव बढ़ता चला गया।
पाक सेना मार्शल लॉ नहीं लगाना चाहती
विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक अस्थिरता के दौर में पाक सेना मार्शल लॉ लगाने का जोखिम नहीं उठाएगी। इससे दुनिया में सेना की बदनामी हो सकती है। इस बार सेना, सामने नहीं आएगी। इमरान खान बहुमत नहीं जुटा पाते, तो असेंबली भंग कर दी जाएगी। जनरल बाजवा, भारत से अच्छे संबंध चाहते हैं। वह अर्थ जगत पर सोच रहे हैं। नई रणनीति में उन्हें अतीत की कई बातें पीछे छोड़नी पड़ेंगी। शहबाज शरीफ, नेता प्रतिपक्ष पाकिस्तान ने कहा, संसद में पीएम भरोसा खो बैठे हैं, वे इस्तीफा देकर एक नई परंपरा स्थापित करें।
मौलाना फजलुर रहमान, अध्यक्ष, पीडीएम, का कहना था, अब सब कुछ हाथ से निकल चुका है। पानी, पुल के नीचे से भी गुजर चुका है। तेरे लिए एक बूंद भी नहीं बचा है। इमरान खान, इस साल बाजवा को दूसरा सेवा विस्तार देने के पक्ष में नहीं हैं। बाजवा ने खान के विश्वस्त पूर्व आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद, जिसे वे सेना प्रमुख बनाना चाहते थे, उन्हें अब मुख्य लाइन से दूर कर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि जनरल बाजवा के इशारे पर इमरान खान के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इमरान खान, चाहते हुए भी चीन का नाम नहीं ले सके। वजह, पाकिस्तान में भारी पैमाने पर चीनी प्रोजेक्ट पर काम शुरू होना है।