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Manipur: 50 साल पीछे जा चुके मणिपुर की ओर कब देखेगी सरकार? वरिष्ठ अफसर का छलका दर्द

Mon, 08 Jan 2024 09:54 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 08 Jan 2024 09:54 PM IST
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When will the government look at Manipur which has gone back 50 years senior officers pain Know all
Manipur Violence - फोटो : सोशल मीडिया

आदमी को जन्मभूमि, अपनी मिट्टी से लगाव होता है। यह लगाव भारतीय विदेश सेवा के एक अधिकारी को खाए जा रहा है। विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी का मूल राज्य मणिपुर है। कई देशों में राजदूत रह चुके हैं। मणिपुर में ही उनका बचपन बीता, खेले और कहते हैं कि आज जो भी हूं, मणिपुर ने बनाया है। हमारा राज्य रो रहा है। वहां की जनता घुट-घुट कर जी रही है। हमारे रिश्तेदार और करीबी वहां हैं और दिल्ली में रहकर हमारा भी दिल बैठा जा रहा है। विदेश सेवा के अधिकारी कई देशों में राजदूत रह चुके हैं। कहते हैं विदेश सेवा का अधिकारी होने के कारण हमारे पास मणिपुर के लिए आवाज नहीं है, लेकिन वहां का दर्द है।

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विदेश मंत्रालय के एक कार्यक्रम में मिले सूत्र का कहना है कि केंद्र सरकार हमारे राज्य की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। राज्य सरकार के बस का कुछ भी नहीं है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह कठपुतली की भूमिका में हैं। वह बताते हैं कि हमारा राज्य काफी फल-फूल रहा था। विकास की रफ्तार में था, लेकिन अब वहां के हालात हर दिन बद से बदतर हो रहे हैं।
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'50 साल पीछे चला गया मणिपुर'
वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि वह वहां के समुदाय और लोगों के संपर्क में हैं। उन्हें जमीनी स्थिति काफी दर्द दे रही है। बताते हैं तमाम युवा दिल्ली में थे। रोजगार करते थे। हालात बिगड़े तो वह किसी तरह परिजनों का हाल जानने मणिपुर पहुंच गए। अब वहां उनकी जिंदगी फंसी हुई है। उनके पास दिल्ली या मणिपुर से बाहर निकलने के अब न तो संसाधन (पैसा) है और न रूट। जिसके पास जो रुपया पैसा, साधन था, वह खत्म हो गया है। इसी तरह से तमाम वहां युवा हैं, जो रोजगार और अपनी जिंदगी को राह देने के लिए छटपटा रहे हैं। उनके सामने परिवार पालने और परिवार बसाने की चुनौती है। तमाम ऐसे भी प्रतिभाशाली हैं जो खेल के क्षेत्र में, शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली समेत अन्य स्थानों पर भी आना चाहते हैं। भविष्य का सपना देख रहे हैं और उनके सपनों पर पानी फिर रहा है। सूत्र का कहना है कि मणिपुर 50 साल पीछे चला गया है। वहां मंहगाई चरम पर है। पाबंदियां भी हैं। खतरा भी और डर भी।
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'नहीं लगता कि सरकार के पास कोई दृषिटकोण है?'
यह वरिष्ठ अधिकारी अपना दर्द कुछ इस तरह बयान करते हैं 'आप पत्रकार हैं। बिना नाम छापे मेरा दर्द छाप दीजिए।' मणिपुर के बारे में पूछने पर कहते हैं कि मुझे नहीं लगता कि सरकार जो कदम उठा रही है, वह काफी है। सकारात्मक दृष्टिकोण का कोई संकेत नहीं दिखता। मेरे विचार में केन्द्र सरकार ने मणिपुर को उसके हाल पर छोड़ दिया है। राज्य सरकार के बारे में पूछने पर कहते हैं कि एन बीरेन सिंह राज्य के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकते। पावर विहीन मुख्यमंत्री हैं। 

सूत्र का कहना है कि सरकार को मणिपुर और भारत के हित में फैसला लेना चाहिए। वहां प्रधानमंत्री को जाना चाहिए। मणिपुर के युवाओं को रोजगार, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में जाने के लिए सहायता देनी चाहिए। देश के दूसरे हिस्सें में जाने के लिए विशेष सहायता और सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। हजारों युवाओं को आज इसकी जरूरत है। 

सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री मणिपुर जाएंगे और वहां के लोगों का दर्द सुनकर आगे बढऩे का मंत्र देंगे तो राज्य को बड़ी संजीवनी मिलने की संभावना है। सूत्र का कहना है कि मणिपुर के लोग बड़े मेहनती हैं। उन्हें आगे बढऩे का रास्ता पता है, लेकिन यहां तो रास्ते में ही खाई खोदी हुई है।


भारत जोड़ो न्याय यात्रा में राहुल का दौरा
वह कहते हैं कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी 6700 किमी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में मणिपुर जाएंगे। वह अरुणाचल भी जाएंगे, लेकिन इससे क्या होगा? मणिपुर फिर कुछ दिन चर्चा में आ जाएगा। इससे तो कोई बदलाव होगा नहीं। हमारे राज्य में लोकसभा की बहुत सीटें भी नहीं है कि राजनीतिक पार्टियां बहुत चिंतित होंगी? लेकिन कहना चाहता हूं कि मणिपुर देश का प्रमुख राज्य है। आज वहां हिंसा और तनाव का वातावरण पिछले छह महीने से अधिक समय से है। हमें  केवल राज्य के लोगों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। सरकार की तो जिम्मेदारी बड़ी है। उसे अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। 

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