...जब शहीदों की माओं से मंत्री की तरह नहीं एक मां की तरह मिली थीं सुषमा स्वराज
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कुशाग्र बुद्धि, सौम्य-हंसमुख चेहरा और मिलनसार स्वभाव के चलते सुषमा स्वराज करोड़ों लोगों के दिलों में बसी हुई थीं। वे जिससे भी मिलती थीं, उसके दिल में अपने लिए विशेष जगह बना लेती थीं। कारगिल जंग में शहीद हुए कैप्टन शशिकांत शर्मा के परिवार से जब वे मिलीं, तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। वे काफी देर तक उनका दुख बांटने की कोशिश करती रहीं और उन्हें ढांढस बंधाती रहीं। उनकी आत्मीय बातों से भावविभोर हुआ शहीद परिवार सुषमा स्वराज की मौत की खबर सुनकर स्तब्ध है।
मां की तरह समझा दुख
कैप्टन शशिकांत शर्मा की मां सुदेश शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि बेटे की शहादत 5 अक्टूबर 1998 को सियाचिन की बाना पोस्ट (कायदे-आजम पोस्ट) पर हुई थी। बेटे के शहादत की खबर आने के बाद जार्ज फर्नांडिस सबसे पहले उनके घर पर उनसे मिलने आये थे। उसके बाद एक कार्यक्रम के दौरान सुषमा स्वराज से उनकी भेंट हुई थी। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने बेटे से जुड़ी यादों को जानने-समझने की कोशिश की। शहीद कैप्टन का मां का कहना था कि मुझे अहसास था कि एक मां होने के नाते जो दर्द मैं महसूस कर रही थी, वही दर्द उनकी आंखों में भी झलक रहा था।
...लगा परिवार की ही सदस्य हैं
फ्लाइट लेफ्टिनेंट जेपी शर्मा की पत्नी सुदेश वर्मा ने कहा कि सुषमा स्वराज ने हमारे साथ बेहद आत्मीय तरीके से व्यवहार किया। उनसे मुलाकात के दौरान मैं एक पल को भी यह नहीं समझ पाई कि वे कोई बड़ी नेता या मंत्री हैं। वे केवल एक मां थीं और एक परिवार से मिलकर वे एक मां के दर्द को महसूस कर रही थीं। लग रहा था कि परिवार का ही कोई सदस्य हमारे गम में शरीक हो रहा है। लेकिन बुधवार सुबह जब उनके देहावसान की खबर मिली, तो लगा मेरा कोई अपना हमेशा के लिए हमसे दूर चला गया है।