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Manmohan Singh: जब मनमोहन सिंह ने फोन कॉल पर खत्म करा दिया था MP के तत्कालीन सीएम का अनशन, जानिए रोचक किस्सा

Fri, 27 Dec 2024 11:11 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Fri, 27 Dec 2024 11:11 AM IST
सार

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह नहीं रहे। 92 साल की उम्र में उनका दिल्ली एम्स में निधन हो गया। मनमोहन सिंह प्रखर अर्थशास्त्री थे। 2004 से 2014 तक वे प्रधानमंत्री रहे। पूर्व सीएम और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए एक किस्सा साझा किया है। 

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When Manmohan Singh ended the fast of the then CM of MP on a phone call, know the interesting story
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के साथ शिवराज सिंह चौहान। - फोटो : एक्स/@ChouhanShivraj

विस्तार

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आर्थिक सुधार के जनक माने ही जाते हैं। मगर उनकी विनम्रता ने भी हर किसी को उनका कायल बनाया। प्रधानमंत्री के तौर पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से रिश्ते ऐसे रहे कि उनकी बात को सीएम टाल नहीं पाते थे। एक बार तो ऐसा हुआ कि उन्होंने मध्य प्रदेश के तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह का एक फोन कॉल पर अनशन खत्म करा दिया था। पूर्व सीएम और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए यह किस्सा साझा किया। 
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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह आज हमारे बीच नहीं रहे। उनका जाना देश के लिए अपूरणीय क्षति है। वे अत्यंत विनम्र, सहज और सरल थे। मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे कई विषयों पर सदैव उनका मार्गदर्शन मिला। डॉ. साहब शुचितापूर्ण राजनीति के पर्याय थे। 90 के दशक में उनकी उदारीकरण की नीतियां भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।


शिवराज सिंह ने लिखा कि डॉ. साहब ने सदैव दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राज्यों को हरसंभव सहयोग दिया। एक बार मैं मध्यप्रदेश में किसानों की समस्या को लेकर अनशन पर बैठा तो यह उनका बड़प्पन था कि उन्होंने फोन पर तुरंत अनशन तोड़ने को कहा और समस्या के निवारण का आश्वासन दिया। डॉ. साहब का व्यक्तित्व विजनरी था। मेरे मन में सदैव उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान रहा। एक बार वॉशिंगटन दौरे पर एक पत्रकार ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जी को अंडर अचीवर कहा तो मैंने तुरंत प्रतिकार किया और सम्मान पूर्वक कहा कि हमारे प्रधानमंत्री कभी अंडर अचीवर नहीं हो सकते।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने लिखा कि मुझे एक संस्मरण याद आता है। पहले पाला को राष्ट्रीय आपदा नहीं माना जाता था और इस समस्या को लेकर मैं संघर्षरत था। यह विषय मैंने तत्कालीन प्रधानमंत्री के समक्ष रखा तो उन्होंने एक कमेटी बनाई और श्रद्धेय प्रणब मुखर्जी, शरद पवार के साथ मुझे भी उसमें स्थान दिया। कमेटी ने पाला को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया। सचमुच वह महान थे। निश्चय ही उनका जाना भारतीय राजनीति की बड़ी क्षति है। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। विनम्र श्रद्धांजलि।

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