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एसआईआर पर कपिल सिब्बल का बड़ा आरोप: 'यह भाजपा को चुनाव जिताने की कोशिश', सुप्रीम कोर्ट से क्या की अपील?
Wed, 02 Sep 2026 03:28 PM IST
पवन पांडेय
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 02 Sep 2026 03:28 PM IST
सार
कपिल सिब्बल का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चुनाव आयोग और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने चुनाव आयोग को ‘भाजपा कुर्सी बचाओ आयोग’ और ‘वोट चोरी आयोग’ तक कहा था।
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कपिल सिब्बल, राज्यसभा सांसद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग की ओर से कई राज्यों में चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची में हेरफेर की कोशिश हो रही है और इसका मकसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनाव जिताने में मदद करना है। सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से इस प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के नाम थोक में हटाए जाने पर रोक लगाने की मांग की है। सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि यह ‘बहिष्कार की राजनीति’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के एजेंट मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाकर उनके नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म जमा कर रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस तरह की ‘बल्क डिलीशन’ यानी बड़ी संख्या में नाम हटाने की प्रक्रिया रोकने की अपील की।
यह भी पढ़ें- शुद्धिकरण विवाद: 'कांग्रेस संविधान विरोधी', इंद्रेश कुमार ने साधा निशाना; बोले- आरएसएस ने छुआछूत को पाप माना
झारखंड के गोड्डा का मामला उठाया
कपिल सिब्बल ने अपने आरोपों के समर्थन में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के गोड्डा जिले में भाजपा से जुड़े लोगों की ओर से कुछ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आवेदन दिए जाने का दावा किया गया है। इनमें बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शामिल होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) ने भी कुछ मामलों को लेकर आपत्ति जताई। बीएलओ आम तौर पर सरकारी कर्मचारी होते हैं, जिन्हें चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां दी जाती हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर मतदाता सूची से ऐसे लोगों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है जो वर्षों से उसी जगह रह रहे हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का सही होना बेहद जरूरी है।
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'एक साथ सैकड़ों नाम हटाने के लिए फॉर्म जमा किए जा सकते हैं'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने फॉर्म-7 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-7 एक साथ जमा किए जा सकते हैं। उनके मुताबिक, कोई व्यक्ति 45, 100 या 400 तक फॉर्म लेकर यह मांग कर सकता है कि इतने मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाएं। कपिल सिब्बल ने दावा किया कि इस तरह के आवेदन में नाम हटाने की मांग की जा सकती है और बाद में अगर शिकायत गलत साबित होती है तो भी कोई खास असर नहीं पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के गोड्डा में जिन लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए, उनमें कई मुस्लिम मतदाता थे। उन्होंने कहा कि जांच में ऐसे लोगों से बात की गई, जिन्होंने बताया कि वे और उनके परिवार लंबे समय से वहां रह रहे हैं। सिब्बल के मुताबिक, कुछ परिवार तो कई पीढ़ियों से वहां रह रहे हैं।
'अगर कोर्ट ने ध्यान नहीं दिया तो लोकतंत्र मुश्किल में पड़ेगा'
कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर अदालत यह मानकर चलती है कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग की निगरानी में हो रही है और इसलिए इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो सकती, तो यह चिंता का विषय होगा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर चुनाव में वोट डालने के अधिकार पर पड़ता है। इसलिए इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है।
दिल्ली और उत्तर प्रदेश का भी किया जिक्र
कपिल सिब्बल ने दावा किया कि एसआईआर के दौरान कई राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में करीब 45 से 47 लाख नाम हटाए गए, जो उनके मुताबिक दिल्ली के कुल मतदाताओं का लगभग 23-24 प्रतिशत है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी करीब 2.05 करोड़ नाम हटाए गए हैं। सिब्बल ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक अलग-अलग राज्यों में कुल मिलाकर करीब 5 से 6 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। हालांकि, ये आंकड़े कपिल सिब्बल के बयान में किए गए दावों के तौर पर सामने आए हैं।
'हर चुनाव वाले राज्य में हो सकता है ऐसा'
राज्यसभा सांसद ने कहा कि उन्हें चिंता है कि जिन राज्यों में आगामी चुनाव होने हैं, वहां भी इसी तरह की प्रक्रिया देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि झारखंड में विपक्षी दलों की सरकार होने के कारण वहां कुछ बीएलओ ने आपत्तियां उठाईं, लेकिन जहां संबंधित दल सत्ता में हैं, वहां ऐसे मामलों पर सवाल कौन उठाएगा? उन्होंने बीएलओ की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ये कर्मचारी अक्सर सरकारी स्कूलों के शिक्षक या दूसरे सरकारी कर्मचारी होते हैं। उन पर दबाव बनाया जाना संभव है।
यह भी पढ़ें- युद्ध के बीच कल यूक्रेन जाएंगे एस जयशंकर: पोलैंड से भी होगी अहम बातचीत, विदेश मंंत्री का यह दौरा क्यों है खास?
कांग्रेस पहले भी लगा चुकी है चुनाव आयोग पर आरोप
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में एसआईआर के बाद 2.06 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के बाहर होने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग अपनी रणनीति बदलते रहते हैं, लेकिन उनका लक्ष्य किसी भी कीमत पर भाजपा को चुनाव जिताना है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, एसआईआर चुनाव आयोग की मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
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झारखंड के गोड्डा का मामला उठाया
कपिल सिब्बल ने अपने आरोपों के समर्थन में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के गोड्डा जिले में भाजपा से जुड़े लोगों की ओर से कुछ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आवेदन दिए जाने का दावा किया गया है। इनमें बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शामिल होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) ने भी कुछ मामलों को लेकर आपत्ति जताई। बीएलओ आम तौर पर सरकारी कर्मचारी होते हैं, जिन्हें चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां दी जाती हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर मतदाता सूची से ऐसे लोगों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है जो वर्षों से उसी जगह रह रहे हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का सही होना बेहद जरूरी है।
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'एक साथ सैकड़ों नाम हटाने के लिए फॉर्म जमा किए जा सकते हैं'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने फॉर्म-7 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-7 एक साथ जमा किए जा सकते हैं। उनके मुताबिक, कोई व्यक्ति 45, 100 या 400 तक फॉर्म लेकर यह मांग कर सकता है कि इतने मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाएं। कपिल सिब्बल ने दावा किया कि इस तरह के आवेदन में नाम हटाने की मांग की जा सकती है और बाद में अगर शिकायत गलत साबित होती है तो भी कोई खास असर नहीं पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के गोड्डा में जिन लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए, उनमें कई मुस्लिम मतदाता थे। उन्होंने कहा कि जांच में ऐसे लोगों से बात की गई, जिन्होंने बताया कि वे और उनके परिवार लंबे समय से वहां रह रहे हैं। सिब्बल के मुताबिक, कुछ परिवार तो कई पीढ़ियों से वहां रह रहे हैं।
'अगर कोर्ट ने ध्यान नहीं दिया तो लोकतंत्र मुश्किल में पड़ेगा'
कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर अदालत यह मानकर चलती है कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग की निगरानी में हो रही है और इसलिए इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो सकती, तो यह चिंता का विषय होगा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर चुनाव में वोट डालने के अधिकार पर पड़ता है। इसलिए इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है।
दिल्ली और उत्तर प्रदेश का भी किया जिक्र
कपिल सिब्बल ने दावा किया कि एसआईआर के दौरान कई राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में करीब 45 से 47 लाख नाम हटाए गए, जो उनके मुताबिक दिल्ली के कुल मतदाताओं का लगभग 23-24 प्रतिशत है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी करीब 2.05 करोड़ नाम हटाए गए हैं। सिब्बल ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक अलग-अलग राज्यों में कुल मिलाकर करीब 5 से 6 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। हालांकि, ये आंकड़े कपिल सिब्बल के बयान में किए गए दावों के तौर पर सामने आए हैं।
'हर चुनाव वाले राज्य में हो सकता है ऐसा'
राज्यसभा सांसद ने कहा कि उन्हें चिंता है कि जिन राज्यों में आगामी चुनाव होने हैं, वहां भी इसी तरह की प्रक्रिया देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि झारखंड में विपक्षी दलों की सरकार होने के कारण वहां कुछ बीएलओ ने आपत्तियां उठाईं, लेकिन जहां संबंधित दल सत्ता में हैं, वहां ऐसे मामलों पर सवाल कौन उठाएगा? उन्होंने बीएलओ की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ये कर्मचारी अक्सर सरकारी स्कूलों के शिक्षक या दूसरे सरकारी कर्मचारी होते हैं। उन पर दबाव बनाया जाना संभव है।
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कांग्रेस पहले भी लगा चुकी है चुनाव आयोग पर आरोप
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में एसआईआर के बाद 2.06 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के बाहर होने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग अपनी रणनीति बदलते रहते हैं, लेकिन उनका लक्ष्य किसी भी कीमत पर भाजपा को चुनाव जिताना है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, एसआईआर चुनाव आयोग की मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।