लद्दाख में चीनियों को गच्चा देकर उनसे पहले पोस्ट पर पहुंच जाते हैं भारतीय सैनिक, देखती रह जाती है 'लाल' सेना
लद्दाख में लंबे समय तक तैनात रहे आईटीबीपी के पूर्व डीआईजी जेवीएस चौधरी के अनुसार, दरअसल, यह समझ कोई दो चार महीने में विकसित नहीं हुई है, इसके लिए हमारे जवानों ने दशकों की कड़ी मेहनत एवं जज्बे से दुर्गम रास्तों पर पैदल चलते हुए अपना एक मैप तैयार किया है...
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चीन यदि एक रास्ता बंद करता है तो हमारे जवान चार नए मार्गों पर चल पड़ते हैं। ऐसा कई बार होता है कि चीनी सैनिक हमारे जवानों को यह कहकर रोकते हैं कि ये रास्ता तो उनके इलाके से होकर जाता है।
कुछ घंटे बाद वही चीनी सैनिक जब भारतीय जवानों को आगे वाली पोस्ट या प्वाइंट पर खुद से पहले पाते हैं, तो उनकी आंखें खुली रह जाती हैं।
लद्दाख में लंबे समय तक तैनात रहे आईटीबीपी के पूर्व डीआईजी जेवीएस चौधरी के अनुसार, दरअसल, यह समझ कोई दो चार महीने में विकसित नहीं हुई है, इसके लिए हमारे जवानों ने दशकों की कड़ी मेहनत एवं जज्बे से दुर्गम रास्तों पर पैदल चलते हुए अपना एक मैप तैयार किया है।
उन्हें लद्दाख की हर पहाड़ी की पूरी जानकारी है।
पूर्व डीआईजी जेवीएस चौधरी बताते हैं, हमारे जवान कई बातों में चीनी सैनिकों से अधिक दम रखते हैं। सबसे पहली बात तो उच्च मनोबल होने की है। इसमें हमारे जवान सदैव चीनी सैनिकों पर भारी पड़ते रहे हैं।
चीनी सैनिकों को वहां के पोलित ब्यूरो से कई तरह के आदेश आते रहते हैं। हमारे यहां तो जूनियर कमांडर के पास भी खुद निर्णय लेने की क्षमता होती है। लद्दाख में जहां हमारे जवान तैनात हैं, उस इलाके को मुश्किल माना जाता है।
वजह, अधिकांश इलाका पहाड़ी और बर्फीला है। इसके बावजूद भारतीय जवानों ने लद्दाख के हर प्वाइंट पर जाकर उसके कई विकल्प मार्ग तैयार किए हैं। छोटे-मोटे विवाद के चलते चीनी सैनिक कई बार किसी रास्ते पर अड़ जाते हैं।
वे कहते हैं कि ये तो हमारी सीमा से होकर जाता है। हालांकि उस वक्त दोनों देशों के सैनिक गश्त पर ही होते हैं। भारतीय जवानों की अच्छी बात ये है कि वे सीमा उल्लंघन नहीं करते। ऐसी स्थिति में उनके पास एक नहीं, बल्कि कई विकल्प मौजूद रहते हैं।
वे तुरंत दूसरे मार्ग से टारगेट प्वाइंट पर पहुंच जाते हैं।
भारतीय सैनिकों को लद्दाख के मौसम, भौगोलिक क्षेत्र और रास्तों की बहुत अच्छी जानकारी है। जवानों के हाथ में हर समय ऐसे नक्शे होते हैं, जिसकी मदद से वे बहुत ही कम समय में एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी तक पहुंच जाते हैं।
जेवीएस चौधरी के मुताबिक, हमारे जवान कभी रास्ता नहीं भटकते। वे चाहें तो सामने वाले को गुमराह कर सकते हैं। हर पहाड़ी का एक ऐसा मैप तैयार किया गया है कि वह चीनी सैनिकों को इतनी आसानी से समझ नहीं आता।
एलएसी पर कई बार चीनी सैनिक अड़ जाते हैं, तो बॉर्डर पर्सनल मीटिंग बुलाकर मामला सुलझाया जाता है। वहां भी दोनों पक्षों की ओर से वीडियो दिखाकर यह दावा किया जाता है कि तुमने एलएसी पार की है।
हमारे जवान 24 घंटे गश्त करते रहते हैं। उन्होंने सभी इलाकों की इतनी साफ रेकी की होती है कि वे किसी भी वक्त वैकल्पिक मार्ग के जरिए दूसरी जगह पर पहुंच सकते हैं।
चौधरी कहते हैं कि भारत आज चीन की किसी भी हरकत का माकूल जवाब देने की स्थिति में है।