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Wheat Procurement: पंजाब, हरियाणा में अधिक खरीद से टूटा गेहूं की बिक्री का रिकॉर्ड, MP में हुई बड़ी गिरावट?

Sat, 25 May 2024 09:57 PM IST
राहुल संपाल डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल संपाल Updated Sat, 25 May 2024 09:57 PM IST
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सार
गेहूं की खरीद आम तौर पर अप्रैल से मार्च तक चलती है, लेकिन केंद्र ने इस साल राज्यों को फसल की आवक के आधार पर खरीद करने की अनुमति दी है। अधिकांश राज्यों में, खरीद मार्च की शुरुआत में शुरू हुई।
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wheat procurement record in punjab haryana downfall in mp
गेहूं खरीद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस साल गेहूं की खरीद पिछले साल के 262.02 लाख टन से अधिक हो गई है। पिछले साल की समान अवधि में 261.6 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। इसमें सबसे खास बात यह है कि पंजाब और हरियाणा में हुई जोरदार खरीद के कारण इस सत्र में पहली बार पिछले साल से अधिक खरीदी हुई है। सरकार ने अपने एक बयान में कहा कि केंद्रीय भंडारण के लिए 262.48 लाख टन रबी मौसम का अनाज पहले ही खरीदा जा चुका है। इससे 59,715 करोड़ रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ 22.31 लाख किसानों को लाभ हुआ है। खरीदारी करने वाले राज्यों की बात करें, तो सबसे अव्वल पंजाब रहा। इसके बाद हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का नंबर रहा है।


पंजाब, हरियाणा में इतनी हुई गेहूं की खरीद
अभी तक पंजाब में 12.4 मिलियन टन, हरियाणा में 71.49 लाख टन, मध्यप्रदेश में 47.78 लाख टन, राजस्थान में 9.66 लाख टन और उत्तरप्रदेश में 9.07 लाख टन गेहूं की खरीदी हुई है। गेहूं की खरीद आम तौर पर अप्रैल से मार्च तक चलती है, लेकिन केंद्र ने इस साल राज्यों को फसल की आवक के आधार पर खरीद करने की अनुमति दी है। अधिकांश राज्यों में, खरीद मार्च की शुरुआत में शुरू हुई। सरकार ने विपणन वर्ष 2024-25 के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य 30 से 32 मिलियन टन निर्धारित किया है।


विशेषज्ञों का कहना है कि इस सीजन में कुल खरीद 270 से 290 लाख टन के बीच रह सकती है, जो पिछले साल के 261.9 लाख टन से मामूली अधिक होगी। लेकिन यह वित्त वर्ष 2025 के लिए 300 से 320 लाख टन खरीद के लक्ष्य की तुलना में बहुत कम है। इसका यह भी मतलब है कि लगातार तीसरे साल केंद्रीय पूल में भारत की आधिकारिक गेहूं खरीद लक्ष्य से कम रहेगी, जिसका इस्तेमाल गरीबों को अनाज देने के लिए किया जाता है। 

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद में गिरावट
खरीद में गिरावट की प्राथमिक वजह यह है कि किसान अपना उत्पाद ज्यादा दामों पर निजी खरीदारों को बेचना पसंद कर रहे हैं। गेहूं का स्टॉक उम्मीद से कम रहने पर कीमत बढ़ने की स्थिति में सरकार के हाथ बंधे रह सकते हैं और वह बाजार में प्रभावी तरीके से हस्तक्षेप नहीं कर पाएगी। इस साल गेहूं खरीद में गिरावट की बड़ी वजह मध्यप्रदेश से कम खरीद है। मध्यप्रदेश से 80 लाख टन खरीदने का लक्ष्य था, जबकि करीब 48 लाख टन खरीदा गया है, जो पिछले साल हुई खरीद का करीब 33 फीसदी है। ज्यादातर कारोबारियों का कहना है कि मध्यप्रदेश में गेहूं की फसल अनुमान से कम है।
 
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