ओबीसी क्रीमी लेयर: जानिए क्या है ये और क्यों सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से इसे फिर से परिभाषित करने को कहा
ओबीसी क्रीमी लेयर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार की एक अधिसूचना को रद्द कर दिया है और राज्य सरकार से इसे फिर से परिभाषित करने को कहा है। इस रिपोर्ट में जानिए कि यह ओबीसी क्रीमी लेयर क्या है और सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला क्यों लिया।
विस्तार
सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा था कि ओबीसी क्रीमी लेयर को केवल आर्थिक आधार पर नहीं तय किया जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने क्रीमी लेयर को लेकर तय किए गए मानकों से संबंधित हरियाणा सरकार की 17 अगस्त 2016 को जारी अधिसूचना भी रद्द कर दी थी। अदालत ने कहा था कि यह इंद्रा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी निर्देशों का उल्लंघन है और हरियाणा सरकार ओबीसी क्रीमी लेयर को फिर से परिभाषित करे।
क्रीमी लेयर, अति पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की एक श्रेणी है, जो उन लोगों और परिवारों से संबंधित है जो उच्च आय वर्ग में आते हैं। इस श्रेणी में आने वाले लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। इसके चलते वह ओबीसी के लिए नौकरियों और शिक्षा में 27 फीसदी आरक्षण का हिस्सा बनने के भी हकदार नहीं हैं। वर्तमान नियम के अनुसार आठ लाख रुपये सालाना से अधिक कमाने वाले परिवार क्रीमी लयर में आते हैं और इन्हें आरक्षण की व्यवस्था का लाभ नहीं मिलता है।
इस तरह किया जाता है क्रीमी लेयर का निर्धारण
ओबीसी क्रीमी लेयर को निर्धारित करने के लिए कुछ नियम हैं। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने 1993 में इसे लेकर एक आधिकारीक ज्ञापन जारी किया था। इसके अनुसार आठ लाख रुपये प्रति वर्ष से कम आय वाले ओबीसी परिवार ही आरक्षण का लाभ पाने के पात्र होंगे। वेतन और कृषि से होने वाली आय को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इसके अनुसार क्रीमी लेयर का निर्धारण 'वेतन' और 'कृषि आय' के अलावा अन्य स्रोतों से आय के आधार पर तय की गई है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने सिफारिश की है कि ओबीसी क्रीमी लेयर की इस श्रेणी में जोड़ी जाने वाली आय में वेतन को भी जोड़ दिया जाए और आय की सीमा आठ लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी जाए। हालांकि, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे ओबीसी वर्ग को लोगों को लाभ होगा। लेकिन, एनसीबीसी के अनुसार यह फैसला पिछड़े वर्ग के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला है।