महाराष्ट्र: डिजिटल आईकार्ड में न अफसर का ओहदा, न एक्सपायरी डेट; इसी चूक से खुली पकड़े गए संदिग्धों की पोल
मुंबई के जियो वर्ल्ड प्लाजा में फर्जी पीएमओ आईकार्ड दिखाकर हथियार के साथ घुसे रोहन पारिख और दिलीप कुंदे गिरफ्तार हुए। आईकार्ड की दो खामियों से पुलिस को शक हुआ। आखिर तीसरा आरोपी कौन है? फर्जी आईकार्ड कैसे बना? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
मुंबई के जियो वर्ल्ड प्लाजा में फर्जी पीएमओ आईकार्ड दिखाकर हथियार के साथ घुसे रोहन पारिख और दिलीप कुंदे गिरफ्तार हुए। आईकार्ड की दो खामियों से पुलिस को शक हुआ। आखिर तीसरा आरोपी कौन है? फर्जी आईकार्ड कैसे बना? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
मुंबई के अति-सुरक्षित बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का फर्जी पहचान पत्र दिखाकर हथियार के साथ प्रवेश करने वाले गिरोह का मुंबई क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि उनका एक साथी फरार है। आरोपियों के पास मौजूद डिजिटल आईकार्ड की दो बड़ी खामियों ने पुलिस को शक करने पर मजबूर किया। आईकार्ड पर जारी करने वाले अधिकारी का पदनाम दर्ज नहीं था और जारी होने की तारीख होने के बावजूद उसकी वैधता खत्म होने की तारीख नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, यही विसंगतियां फर्जी पीएमओ अधिकारी बनकर घूम रहे आरोपियों तक पहुंचने में अहम सुराग साबित हुईं।
गार्ड के साथ जियो वर्ल्ड सेंटर में घुसा रोहन पारिख
घटना 7 सितंबर की शाम 4:50 बजे की है। सफारी सूट पहने एक व्यक्ति अपने दो साथियों के साथ जियो वर्ल्ड प्लाजा के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचा। वहां तैनात निजी सुरक्षा गार्ड सनी प्रमोद सिंह (36) ने रूटीन जांच के दौरान उसके पास हथियार देखा। गार्ड ने उन्हें रोकते हुए बताया कि मॉल परिसर में हथियार ले जाना प्रतिबंधित है। आरोप है कि इस पर तीनों ने खुद को भारत सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी बताते हुए सुरक्षा कर्मियों पर रौब जमाया। उन्होंने मोबाइल फोन पर डिजिटल आईकार्ड दिखाया और सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए हथियार के साथ मॉल के भीतर प्रवेश कर गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शाम करीब छह बजे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद सहायक पुलिस निरीक्षक किशोर अण्णा परकाळे की शिकायत पर बीकेसी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जांच क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) को सौंपी गई। पुलिस निरीक्षक अमोल शिंदे के नेतृत्व में टीम ने तत्काल मॉल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। फुटेज में तीनों संदिग्ध मॉल में घूमते और बाद में उसी कार से जाते दिखाई दिए, जिससे वे वहां पहुंचे थे। पुलिस ने कार का रजिस्ट्रेशन नंबर हासिल कर वाहन मालिक तक पहुंचने के लिए टेक्निकल मॉनिटरिंग निगरानी शुरू की।
डिजिटल आईकार्ड के बारे में नहीं दे पाया जवाब
तकनीकी जांच के आधार पर सीआईयू की टीम खार पश्चिम की 12वीं रोड स्थित नीलिमा बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 601 पहुंची। वहां रोहन प्रेमल पारिख (24) मिला। पुलिस ने जब उससे पीएमओ में उसकी कथित तैनाती और मोबाइल में दिखाए गए डिजिटल आईकार्ड के बारे में पूछताछ की तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद पुलिस ने आईकार्ड की बारीकी से जांच की। इसमें जारीकर्ता अधिकारी का पदनाम नहीं था। इसके अलावा आईकार्ड पर जारी होने की तारीख तो थी, लेकिन उसकी वैधता समाप्त होने की तारीख दर्ज नहीं थी। इन खामियों से पुलिस का संदेह पुख्ता हो गया और पूछताछ के बाद आईकार्ड के फर्जी होने का खुलासा हुआ।
फर्जी पहचान के जरिए जमाते थे रौब
रोहन से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसके दूसरे साथी दिलीप राजाराम कुंदे (49), निवासी नासिक ग्रामीण, को भी हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान दिलीप के पास से काले रंग की एक रिवॉल्वर, छह जिंदा कारतूस और चॉकलेट रंग का होल्स्टर बरामद हुआ। रिवॉल्वर पर IOF, NP A 1477/04 और NP MPF 32" MK-1 अंकित है। पुलिस का कहना है कि जांच में तीनों आरोपियों का प्रधानमंत्री कार्यालय से किसी तरह का संबंध नहीं मिला। वे पीएमओ में न तो अधिकारी थे और न ही वहां से उन्हें कोई वेतन या मानदेय मिलता था। आरोप है कि सार्वजनिक और संवेदनशील स्थानों पर सरकारी अधिकारी होने का रौब जमाने और सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने के लिए उन्होंने फर्जी पहचान का सहारा लिया।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराओं 204, 205, 3(5), 319(2), 335, 336, 337 और 340 के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(अ) और 135 के तहत भी कार्रवाई की गई है। सीआईयू ने कार्रवाई के दौरान करीब एक लाख रुपये कीमत की रिवॉल्वर, जिंदा कारतूस, होल्स्टर और करीब 90 हजार रुपये कीमत का वीवो स्मार्टफोन जब्त किया है। मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी पीएमओ आईकार्ड किस तरह तैयार किया गया?
तीसरा आरोपी फरार, पुलिस रिमांड पर दोनों आरोपी
गिरफ्तार दोनों आरोपियों रोहन पारिख और दिलीप कुंदे को सीआईयू ने मुंबई की किला कोर्ट में 37वें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले का तीसरा आरोपी वर्ली निवासी प्रथमेश गणेश बागुल (26) अभी फरार है और उसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, फर्जी आईकार्ड तैयार करने वाले लोगों तक पहुंचने, बरामद रिवॉल्वर की वैधता और उसके स्रोत का पता लगाने तथा मॉल में हथियार लेकर प्रवेश करने के पीछे आरोपियों की असली मंशा जानने के लिए दोनों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने पुलिस की दलीलों को स्वीकार करते हुए दोनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया।