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Nehru Memorial: सरकार ने क्यों बदला नेहरू मेमोरियल का नाम? जानें पूर्व पीएम के घर की कहानी और इससे जुड़े विवाद
Wed, 16 Aug 2023 07:44 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 16 Aug 2023 07:44 PM IST
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नेहरू मेमोरियल
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
देश में स्थानों, स्मारकों और भवनों के नाम पर एक बार फिर सियासत शुरू हो गई है। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली स्थित नेहरू मेमोरियल का नाम बदल दिया है। अब नेहरू मेमोरियल को पीएम मेमोरियल के नाम से जाना जाएगा। नाम बदलने पर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। विपक्षी पार्टी ने मोदी सरकार पर नेहरू की विरासत को नष्ट करने का आरोप लगाया है।नेहरू मेमोरियल अभी चर्चा में है। ऐसे में जानना जरूरी है कि नेहरू मेमोरियल का इतिहास क्या है? इसकी विशेषता क्या है? इस पर अभी विवाद क्या हो रहा है? पहले भी क्या इससे जुड़ा कोई विवाद रहा है? आइये समझते हैं...
प्रधानमंत्री संग्रहालय।
- फोटो :
अमर उजाला
पहले जानते हैं हुआ क्या है?
सोमवार यानी 14 अगस्त को नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय (NMML) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) कर दिया गया। इसी दिन से इसका आधिकारिक रूप से नाम बदल गया।
इससे पहले 15 जून को नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी की एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी। इसमें नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय और लाइब्रेरी सोसाइटी’ करने का प्रस्ताव लाया गया था। विशेष बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की थी, जो सोसाइटी के उपाध्यक्ष भी हैं।
तब संस्कृति मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, 'कार्यकारी परिषद ने महसूस किया कि संस्थान के नाम में वर्तमान गतिविधियों को प्रतिबिंबित होना चाहिए, जहां अब एक ऐसा संग्रहालय भी शामिल है जो स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र की सामूहिक यात्रा को दर्शाता है और प्रत्येक प्रधानमंत्री के राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रदर्शित करता है।'
सोमवार यानी 14 अगस्त को नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय (NMML) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) कर दिया गया। इसी दिन से इसका आधिकारिक रूप से नाम बदल गया।
इससे पहले 15 जून को नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी की एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी। इसमें नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय और लाइब्रेरी सोसाइटी’ करने का प्रस्ताव लाया गया था। विशेष बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की थी, जो सोसाइटी के उपाध्यक्ष भी हैं।
तब संस्कृति मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, 'कार्यकारी परिषद ने महसूस किया कि संस्थान के नाम में वर्तमान गतिविधियों को प्रतिबिंबित होना चाहिए, जहां अब एक ऐसा संग्रहालय भी शामिल है जो स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र की सामूहिक यात्रा को दर्शाता है और प्रत्येक प्रधानमंत्री के राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रदर्शित करता है।'
नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी (फाइल फोटो)
- फोटो :
social media
क्या है नेहरू मेमोरियल का इतिहास?
एडविन लुटियंस की इंपीरियल कैपिटल का हिस्सा रहा तीन मूर्ति भवन अंग्रेजी शासन में भारत के कमांडर इन चीफ का आधिकारिक आवास था। ब्रिटिश भारत के अंतिम कमांडर इन चीफ के जाने के बाद 1948 में तीन मूर्ति भवन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का आधिकारिक आवास बन गया। पंडित नेहरू 16 साल तक इस घर में रहे और यहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके बाद इस तीन मूर्ति भवन को पंडित नेहरू की याद में उन्हें समर्पित कर दिया गया और इसे पंडित नेहरू म्यूजियम एंड मेमोरियल के नाम से जाना जाने लगा। अब केंद्र सरकार ने इसका नाम नेहरू मेमोरियल से बदलकर पीएम म्यूजियम एंड सोसाइटी कर दिया है। 14 नवंबर, 1964 को जवाहरलाल नेहरू की 75वीं जयंती पर भारत के राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने औपचारिक रूप से तीन मूर्ति भवन राष्ट्र को समर्पित किया और नेहरू स्मारक संग्रहालय का उद्घाटन किया।
एडविन लुटियंस की इंपीरियल कैपिटल का हिस्सा रहा तीन मूर्ति भवन अंग्रेजी शासन में भारत के कमांडर इन चीफ का आधिकारिक आवास था। ब्रिटिश भारत के अंतिम कमांडर इन चीफ के जाने के बाद 1948 में तीन मूर्ति भवन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का आधिकारिक आवास बन गया। पंडित नेहरू 16 साल तक इस घर में रहे और यहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके बाद इस तीन मूर्ति भवन को पंडित नेहरू की याद में उन्हें समर्पित कर दिया गया और इसे पंडित नेहरू म्यूजियम एंड मेमोरियल के नाम से जाना जाने लगा। अब केंद्र सरकार ने इसका नाम नेहरू मेमोरियल से बदलकर पीएम म्यूजियम एंड सोसाइटी कर दिया है। 14 नवंबर, 1964 को जवाहरलाल नेहरू की 75वीं जयंती पर भारत के राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने औपचारिक रूप से तीन मूर्ति भवन राष्ट्र को समर्पित किया और नेहरू स्मारक संग्रहालय का उद्घाटन किया।
Nehru Memorial Museum and Library in delhi
- फोटो :
ANI
वर्तमान में शोध और अध्ययन का केंद्र है
वर्तमान में यहां व्याख्यान और सेमिनार नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं और विद्वानों के विचार-विमर्श प्रकाशित होते हैं। NMML ने हाल के दिनों में अपने शैक्षणिक संसाधनों में काफी विस्तार किया है। आज, पुस्तकालय में न केवल आधुनिक और समकालीन इतिहास का एक संपूर्ण संग्रह है, बल्कि एक प्रभावशाली और विविध अभिलेखीय भंडार भी है। विभिन्न विषयों और रुचि के भारतीय और विदेशी विद्वानों के लिए यह प्रचलित केंद्र है।
वर्तमान में यहां व्याख्यान और सेमिनार नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं और विद्वानों के विचार-विमर्श प्रकाशित होते हैं। NMML ने हाल के दिनों में अपने शैक्षणिक संसाधनों में काफी विस्तार किया है। आज, पुस्तकालय में न केवल आधुनिक और समकालीन इतिहास का एक संपूर्ण संग्रह है, बल्कि एक प्रभावशाली और विविध अभिलेखीय भंडार भी है। विभिन्न विषयों और रुचि के भारतीय और विदेशी विद्वानों के लिए यह प्रचलित केंद्र है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो :
ट्विटर/नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री मोदी हैं सोसाइटी के अध्यक्ष
जनरल काउंसिल और नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के अध्यक्ष हैं, जबकि राजनाथ सिंह इसके उपाध्यक्ष हैं। इनके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, धर्मेंद्र प्रधान, वी. मुरली धरण, जी किशन रेड्डी, अनुराग ठाकुर समेत 29 सदस्य इस सोसाइटी में शामिल हैं।
NMML के कार्यकारी परिषद में आठ सदस्य हैं। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा भी शामिल हैं। NMML की वित्तीय समिति पांच सदस्यीय है जिसके अध्यक्ष पूर्व राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे हैं।
जनरल काउंसिल और नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के अध्यक्ष हैं, जबकि राजनाथ सिंह इसके उपाध्यक्ष हैं। इनके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, धर्मेंद्र प्रधान, वी. मुरली धरण, जी किशन रेड्डी, अनुराग ठाकुर समेत 29 सदस्य इस सोसाइटी में शामिल हैं।
NMML के कार्यकारी परिषद में आठ सदस्य हैं। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा भी शामिल हैं। NMML की वित्तीय समिति पांच सदस्यीय है जिसके अध्यक्ष पूर्व राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे हैं।
प्रेस ब्रीफिंग करते जयराम रमेश
- फोटो :
संवाद न्यूज एजेंसी
इस पर अभी विवाद क्या हो रहा है?
विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र के नेहरू मेमोरियल के नाम बदलने वाले फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव और पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने कहा, 'एक प्रतिष्ठित संस्थान को एक नया नाम मिला है। विश्वभर में प्रसिद्ध नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी अब प्राइम मिनिस्टर्स मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के नाम से जाना जाएगा।'
मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा नेहरू और उनकी विरासत को नकारना, बदनाम और नष्ट करना है। वह 'एन' शब्द हटाकर उसके स्थान पर 'पी' शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। जयराम ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और उदारवादी नींव रखने में नेहरू की योगदान को हम नहीं भूलने देंगे। नेहरू ने देश की आजादी के लिए अहम योगदान दिया है।
विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र के नेहरू मेमोरियल के नाम बदलने वाले फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव और पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने कहा, 'एक प्रतिष्ठित संस्थान को एक नया नाम मिला है। विश्वभर में प्रसिद्ध नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी अब प्राइम मिनिस्टर्स मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के नाम से जाना जाएगा।'
मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा नेहरू और उनकी विरासत को नकारना, बदनाम और नष्ट करना है। वह 'एन' शब्द हटाकर उसके स्थान पर 'पी' शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। जयराम ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और उदारवादी नींव रखने में नेहरू की योगदान को हम नहीं भूलने देंगे। नेहरू ने देश की आजादी के लिए अहम योगदान दिया है।
Rajnath Singh
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Social Media
संस्था और सरकार का क्या पक्ष है?
तमाम आरोपों के बीच पीएमएमएल के कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश का बयान आया है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी को महसूस हुआ कि देश में पीएम का एक संग्रहालय होना चाहिए। फिर सवाल उठा कि यह कहां बनाया जा सकता है। इस पर फैसला लिया गया कि नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सही जगह है।
प्रकाश ने कहा कि एनएमएमएल को चुनने का कारण यह है कि हमारे पास 28 एकड़ की संपत्ति है। वह आदर्श स्थान है क्योंकि वहां पहले से ही नेहरू संग्रहालय स्थित है। उन्होंने कहा कि हम सबका एक ही विचार था कि भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के काम को प्रदर्शित करना।
इससे पहले जून में रक्षा मंत्री और सोसाइटी के उपाध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नाम में परिवर्तन के प्रस्ताव का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि अपने नए रूप में यह संस्थान जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान और उनके सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों से निपटने की उनकी रणनीति को प्रदर्शित करता है। तब रक्षा मंत्री ने कहा था कि हमारे सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों को सम्मान देने के लिए इस प्रस्ताव के द्वारा इसे नया नाम दिया गया है और यह लोकतांत्रिक भी है।
तमाम आरोपों के बीच पीएमएमएल के कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश का बयान आया है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी को महसूस हुआ कि देश में पीएम का एक संग्रहालय होना चाहिए। फिर सवाल उठा कि यह कहां बनाया जा सकता है। इस पर फैसला लिया गया कि नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सही जगह है।
प्रकाश ने कहा कि एनएमएमएल को चुनने का कारण यह है कि हमारे पास 28 एकड़ की संपत्ति है। वह आदर्श स्थान है क्योंकि वहां पहले से ही नेहरू संग्रहालय स्थित है। उन्होंने कहा कि हम सबका एक ही विचार था कि भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के काम को प्रदर्शित करना।
इससे पहले जून में रक्षा मंत्री और सोसाइटी के उपाध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नाम में परिवर्तन के प्रस्ताव का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि अपने नए रूप में यह संस्थान जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान और उनके सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों से निपटने की उनकी रणनीति को प्रदर्शित करता है। तब रक्षा मंत्री ने कहा था कि हमारे सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों को सम्मान देने के लिए इस प्रस्ताव के द्वारा इसे नया नाम दिया गया है और यह लोकतांत्रिक भी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
- फोटो :
Agency (File Photo)
पहले भी क्या इससे जुड़ा कोई विवाद रहा है?
साल 2016 में पीएम मोदी ने एक प्रस्ताव रखा था कि तीन मूर्ति परिसर में देश के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। उसी साल 25 नवंबर को NMML की 162वीं बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बीते साल 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री संग्रहालय को जनता के लिए खोल दिया गया था।
प्रधानमंत्री संग्रहालय नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी का ही एक भाग है। जब 2018 में इसकी नींव रखी गई थी तब भी विवाद हुआ था। उस वक्त NMML के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया था कि नया संग्रहालय नेहरू की विरासत को कमजोर करेगा। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा था और NMML की प्रकृति को नहीं बदलने का आग्रह किया था। इसे सत्तारूढ़ सरकार का एजेंडा बताते हुए, पूर्व पीएम ने लिखा था 'कोई भी बदलाव नेहरू के योगदान को समाप्त नहीं कर सकता है।'
साल 2016 में पीएम मोदी ने एक प्रस्ताव रखा था कि तीन मूर्ति परिसर में देश के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। उसी साल 25 नवंबर को NMML की 162वीं बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बीते साल 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री संग्रहालय को जनता के लिए खोल दिया गया था।
प्रधानमंत्री संग्रहालय नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी का ही एक भाग है। जब 2018 में इसकी नींव रखी गई थी तब भी विवाद हुआ था। उस वक्त NMML के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया था कि नया संग्रहालय नेहरू की विरासत को कमजोर करेगा। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा था और NMML की प्रकृति को नहीं बदलने का आग्रह किया था। इसे सत्तारूढ़ सरकार का एजेंडा बताते हुए, पूर्व पीएम ने लिखा था 'कोई भी बदलाव नेहरू के योगदान को समाप्त नहीं कर सकता है।'