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MUDA Scam: मुडा ने कर्नाटक की राजनीति में क्यों मचाया भूचाल, कानूनी पेंच में कैसे फंसा मुख्यमंत्री का परिवार?
Wed, 14 Aug 2024 08:00 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 14 Aug 2024 08:00 PM IST
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मुडा भूमि मामला
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
कर्नाटक का मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) भूमि घोटाला चर्चा में है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती बीएम और अन्य के खिलाफ मुडा से जुड़े एक मामले में अदालत ने मंगलवार अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। विशेष अदालत अब 20 अगस्त को शिकायत की वैधता पर फैसला सुनाएगी।दूसरी ओर राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री के खिलाफ एक और नई शिकायत दर्ज की गई है। इसके बाद मुख्यमंत्री की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। जबकि मुख्यमंत्री लगातार सारे आरोपों को झूठा बता रहे हैं। इन तमाम घटनाक्रमों के बीच आइये जानते हैं कि आखिर मुडा भूमि घोटाला क्या है? इस मामले में किस पर और क्या आरोप लगे हैं? मामले की शुरुआत कैसे हुई? राज्यपाल की तरफ से इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है? अदालत में क्या हो रहा है? विपक्ष क्या आरोप लगा रहा है? कर्नाटक के सीएम आरोपों पर क्या कह रहे हैं?
सबसे पहले जानिए, आखिर मुडा क्या है?
मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण या मुडा कर्नाटक की एक राज्य स्तरीय विकास एजेंसी है, जिसका गठन मई 1988 में किया गया था। मुडा का काम शहरी विकास को बढ़ावा देना, गुणवत्तापूर्ण शहरी बुनियादी ढांचे को उपलब्ध कराना, किफायती आवास उपलब्ध कराना, आवास आदि का निर्माण करना है।
मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण या मुडा कर्नाटक की एक राज्य स्तरीय विकास एजेंसी है, जिसका गठन मई 1988 में किया गया था। मुडा का काम शहरी विकास को बढ़ावा देना, गुणवत्तापूर्ण शहरी बुनियादी ढांचे को उपलब्ध कराना, किफायती आवास उपलब्ध कराना, आवास आदि का निर्माण करना है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
- फोटो :
ANI
कथित मुडा भूमि घोटाला क्या है?
मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया।
सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया।
मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया।
सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री की पत्नी का 50:50 योजना से क्या संबंध?
आरोप है कि मुख्यमंत्री की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके केसारे में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी।
मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री की पार्वती ने आवेदन किया जिसके आधार पर, मुडा ने विजयनगर III और IV फेज में 14 साइटें आवंटित कीं। यह आवंटन राज्य सरकार की 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि पार्वती को मुडा द्वारा इन साइटों के आवंटन में अनियमितता बरती गई है।
आरोप है कि मुख्यमंत्री की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके केसारे में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी।
मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री की पार्वती ने आवेदन किया जिसके आधार पर, मुडा ने विजयनगर III और IV फेज में 14 साइटें आवंटित कीं। यह आवंटन राज्य सरकार की 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि पार्वती को मुडा द्वारा इन साइटों के आवंटन में अनियमितता बरती गई है।
विपक्ष अनियमितता के क्या आरोप लगा रहा है?
आरोप है कि विजयनगर में जो साइटें आवंटित की गई हैं उनका बाजार मूल्य केसारे में मूल भूमि से काफी अधिक है। विपक्ष ने अब मुआवजे की निष्पक्षता और वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, यह भी दिलचस्प है कि 2021 में भाजपा शासन के दौरान ही विजयनगर में सीएम की पत्नी पार्वती को नई साइट आवंटित की गई थी।
आरोप है कि विजयनगर में जो साइटें आवंटित की गई हैं उनका बाजार मूल्य केसारे में मूल भूमि से काफी अधिक है। विपक्ष ने अब मुआवजे की निष्पक्षता और वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, यह भी दिलचस्प है कि 2021 में भाजपा शासन के दौरान ही विजयनगर में सीएम की पत्नी पार्वती को नई साइट आवंटित की गई थी।
कर्नाटक के सीएम
- फोटो :
एएनआई
आरोपों पर सीएम का क्या कहना है?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आवंटन का बचाव करते हुए कहा कि यह 2021 में भाजपा सरकार के तहत किया गया था। उन्होंने कहा कि विजयनगर में साइटें इसलिए दी गईं क्योंकि केसारे में देवनूर फेज 3 इलाके में साइटें उपलब्ध ही नहीं थीं। सिद्धारमैया के कानूनी सलाहकार एएस पोन्नन्ना ने दावा किया कि विजयनगर में मुआवजे वाली जगह का मूल्य केसारे में मूल जमीन से बहुत कम है।
उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार, पार्वती सरकार से 57 करोड़ रुपये अधिक पाने की हकदार हैं, क्योंकि उन्हें मुआवजे के रूप में मिली भूमि की कीमत महज 15-16 करोड़ रुपये है, जो कि केसारे में उनकी मूल जमीन से बहुत कम है। पोन्नन्ना ने आगे बताया कि मुआवजा स्थल का क्षेत्रफल 38,284 वर्ग फीट है जबकि मूल भूमि 1,48,104 वर्ग फीट की थी। उन्होंने दावा किया कि पार्वती ने देरी से बचने के लिए विजयनगर साइट को चुना, भले ही इसका बाजार मूल्य कम था।
आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी जमीन अधिग्रहित कर पार्क बना दिया गया और उन्हें मुआवजे के तौर पर एक प्लॉट दिया गया। आवंटन 2021 में भाजपा के कार्यकाल के दौरान किया गया था। सिद्धारमैया ने कहा, 'अगर उन्हें लगता है कि यह कानून के खिलाफ है, तो उन्हें बताना चाहिए कि यह कैसे सही है। अगर जमीन की कीमत 62 करोड़ रुपये है, तो उन्हें प्लॉट वापस ले लेना चाहिए और हमें उसी के अनुसार मुआवजा देना चाहिए।'
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आवंटन का बचाव करते हुए कहा कि यह 2021 में भाजपा सरकार के तहत किया गया था। उन्होंने कहा कि विजयनगर में साइटें इसलिए दी गईं क्योंकि केसारे में देवनूर फेज 3 इलाके में साइटें उपलब्ध ही नहीं थीं। सिद्धारमैया के कानूनी सलाहकार एएस पोन्नन्ना ने दावा किया कि विजयनगर में मुआवजे वाली जगह का मूल्य केसारे में मूल जमीन से बहुत कम है।
उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार, पार्वती सरकार से 57 करोड़ रुपये अधिक पाने की हकदार हैं, क्योंकि उन्हें मुआवजे के रूप में मिली भूमि की कीमत महज 15-16 करोड़ रुपये है, जो कि केसारे में उनकी मूल जमीन से बहुत कम है। पोन्नन्ना ने आगे बताया कि मुआवजा स्थल का क्षेत्रफल 38,284 वर्ग फीट है जबकि मूल भूमि 1,48,104 वर्ग फीट की थी। उन्होंने दावा किया कि पार्वती ने देरी से बचने के लिए विजयनगर साइट को चुना, भले ही इसका बाजार मूल्य कम था।
आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी जमीन अधिग्रहित कर पार्क बना दिया गया और उन्हें मुआवजे के तौर पर एक प्लॉट दिया गया। आवंटन 2021 में भाजपा के कार्यकाल के दौरान किया गया था। सिद्धारमैया ने कहा, 'अगर उन्हें लगता है कि यह कानून के खिलाफ है, तो उन्हें बताना चाहिए कि यह कैसे सही है। अगर जमीन की कीमत 62 करोड़ रुपये है, तो उन्हें प्लॉट वापस ले लेना चाहिए और हमें उसी के अनुसार मुआवजा देना चाहिए।'
इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और अन्य के खिलाफ दायर दो निजी शिकायतों पर सांसदों/विधायकों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत ने मंगलवार को सुनवाई की। यह शिकायत मैसूर निवासी स्नेहमयी कृष्णा द्वारा दायर की गई है। विशेष अदालत के न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने शिकायत की स्वीकार्यता पर 20 अगस्त, 2024 तक आदेश सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता टीजे अब्राहम द्वारा दो शिकायतें दायर की गई थीं जिस पर अदलात ने आगे की सुनवाई स्थगित कर दी है।
अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए और धारा 19 के तहत पूर्व मंजूरी के सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता शेहमयी की ओर से पेश वकील ने कहा कि आईपीसी के तहत अपराधों पर अदालत विचार कर सकती है। दोनों शिकायतें मुख्य रूप से मैसूर शहर के प्रमुख स्थानों पर सिद्धारमैया की पत्नी के पक्ष में नियमों का उल्लंघन करते हुए 14 स्थलों के आवंटन से संबंधित हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और अन्य के खिलाफ दायर दो निजी शिकायतों पर सांसदों/विधायकों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत ने मंगलवार को सुनवाई की। यह शिकायत मैसूर निवासी स्नेहमयी कृष्णा द्वारा दायर की गई है। विशेष अदालत के न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने शिकायत की स्वीकार्यता पर 20 अगस्त, 2024 तक आदेश सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता टीजे अब्राहम द्वारा दो शिकायतें दायर की गई थीं जिस पर अदलात ने आगे की सुनवाई स्थगित कर दी है।
अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए और धारा 19 के तहत पूर्व मंजूरी के सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता शेहमयी की ओर से पेश वकील ने कहा कि आईपीसी के तहत अपराधों पर अदालत विचार कर सकती है। दोनों शिकायतें मुख्य रूप से मैसूर शहर के प्रमुख स्थानों पर सिद्धारमैया की पत्नी के पक्ष में नियमों का उल्लंघन करते हुए 14 स्थलों के आवंटन से संबंधित हैं।
राज्य सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाया?
जुलाई के मध्य में राज्य सरकार ने मुडा द्वारा जमीन के आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था। यह न्यायिक आयोग कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पीएन देसाई की अध्यक्षता में बनाया गया था। आयोग को अपनी जांच पूरी करने और सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।
जुलाई के मध्य में राज्य सरकार ने मुडा द्वारा जमीन के आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था। यह न्यायिक आयोग कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पीएन देसाई की अध्यक्षता में बनाया गया था। आयोग को अपनी जांच पूरी करने और सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।