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आईटीओ पर आखिर हुआ क्या- राहुल संपाल की आंखों देखी

Tue, 26 Jan 2021 07:38 PM IST
सुरेंद्र जोशी राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली।
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 26 Jan 2021 07:38 PM IST
सार

आखिर वहीं हुआ जैसी आशंका थी, गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली ने राजधानी की सड़कों पर शर्मनाक दृश्य पैदा किए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के वादे से शुरू हुई ट्रैक्टर रैली देखते-देखते उपद्रव व अराजकता में बदल गई। बैरिकेड तोड़ कर ट्रैक्टर रैली दिल्ली के अंदरुनी इलाकों में पहुंच गई।पहले आईटीओ यानी दिल्ली पुलिस के मुख्यालय के सामने डेरा जमाया गया, यहां उपद्रव व बवाल की शुरुआत हुई। इसके बाद कुछ वाहनों में सवार लोग ऐतिहासिक लालकिले की प्राचीर पर पहुंच गए। वहां भी बवाल हुआ। जानिए अमर उजाला रिपोर्टर  की आईटीओ से आंखों देखी: 

 

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What happened on ITs - saw the eyes of Rahul Sampal
आईटीओ में सड़क पर बैठे किसान - फोटो : पीटीआई

विस्तार

गणतंत्र दिवस यानी मंगलवार सुबह 11 बजे का वक्त था। चूंकि आईटीओ दिल्ली का प्रमुख जंक्शन है और गाजीपुर व नोएडा से आने-जाने का मुख्य रास्ता है और इस रास्ते से आंदोलनकारी किसानों के दिल्ली में घुसने की आशंका थी, इसलिए मैं वहां चौकस होकर तैनात था। 

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सबसे पहले यमुना ब्रिज के बैरिकेड तोड़े
गाजीपुर और नोएडा से आने वाले किसानों के ट्रैक्टरों के जत्थों नेे सबसे पहले यमुना ब्रिज पर लगे पुलिस बैरिकेड को तोड़ा। इसके बाद वे धीरे-धीरे आईटीओ की तरफ बढ़े। करीब 11 बजे होंगे, यानी ट्रैक्टर रैली के तय वक्त दोपहर 12 बजे से काफी पहले किसानों के ट्रैक्टर आईटीओ पहुंच चुके थे। जबकि बैरिकेडिंग से पुलिस जवान निश्चिंत होकर सुस्त बैठे थे कि किसानों के ट्रैक्टर इधर तो नहीं ही आएंगे, लेकिन अचानक बड़ी तादाद में ट्रैक्टर व किसानों के आईटीओ तक पहुंचने से जवान हतप्रभ रह गए। 
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शुरू हो गया बवाल
जवानों ने किसानों व ट्रैक्टरों को रोकने की कोशिश शुरू की। इसमें विफल रहने पर उन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, इससे तनाव व अफरातफरी की स्थिति बन गई। इसी बीच एक किसान की मौत भी हो गई। 
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लहराई गईं तलवारें और लाठियां 
पुलिस की कार्रवाई से और उग्र किसानों ने वहां लगे बैरिकेड तोड़ते हुए तलवारे और लाठियां लहराईं और पथराव किया। पुलिस वाहनों व बसों के कांच फोड़ दिए। बस पलटाने का प्रयास हुआ। उपद्रव  में कई किसान घायल हो गए। यहां सरकारी संपत्तियों को भी भारी नुकसान हुआ।

किसान की मौत के बाद दिया रास्ता
आईटीओ पर उत्पात के दौरान एक किसान की मौत हो गई। इससे भड़क उठे किसानों को देखकर पुलिस नरम पड़ गई और उन्हें लाल किले की ओर जाने का रास्ता दे दिया। किसानों ने दूसरी ओर से राजीव चौक और संसद की तरफ जाने की कोशिश की, इसके लिए किसानों ने रास्तें में खड़ी दो बसों में तोड़फोड भी की, लेकिन मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने किसानों को काबू कर लिया।

पुलिस ने बलप्रयोग किया, इसलिए जवाबी हमले किए : मनजीत सिंह
आईटीओ पर घायल हुए किसान मनजीत सिंह ने बताया कि, हम लोग पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करते हुए आगे बढ़ रहे थे। पुलिस ने रोकने की कोशिश की, लेकिन जब हम नहीं रुके तो पुलिस ने बलप्रयोग शुरु कर दिया। इसके जवाब में हमने भी हमला किया। इस बीच पुलिसकर्मियों ने कुछ किसानों को घेर लिया और उन पर लाठी चार्ज शुरु कर दिया।

परेड में तलवार और लाठियां लाने के सवाल पर उन्होंने कहा, कई किसानों को दिल्ली के रास्तों का पता नहीं था। लेकिन आंदोलन में कुछ ऐसे किसान थे जो दिल्ली के रास्ते से परिचित थे। वे परेड को लीड करने लगे। जैसे जैसे वे कहते गए हम लोग उनके निर्देशों का पालन करने लगे। जब हम दिल्ली की सीमाओं के अंदर आए और पुलिस के साथ मारपीट हुई तब कुछ किसानों को पता लगा कि हम लाल किले तक पहुंचने वाले हैं।

बेहद कम थे पुलिसकर्मी, भारी पड़े किसान
नाम न छापने के शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने बताया कि, हम लोग गणतंत्र दिवस की सुरक्षा में आईटीओ पर तैनात थे। तभी अचानक से किसानों का जत्था आईटीओं की पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए लाल किले की तरफ बढ़ने लगे।किसानों की तुलना में आईटीओं पर पुलिस की संख्या बेहद कम थी। मौजूद पुलिसकर्मियों के पास सुरक्षा इंतजाम भी नहीं था। हमने जैसे ही किसानों को रोकने की कोशिश की वैसे ही वे उपद्रव करने लगे। आखिरकार लाचार होकर पुलिस को किसानों को लाल किले जाने का रास्ता देना पड़ा। 


संसद मार्ग पहुंचने की कोशिश
किसानों की कोशिश थी कि वे दीनदयाल उपाध्याय मार्ग से राजीव चौक पर प्रवेश कर जाएं और मंडी हाउस के रास्ते संसद तक पहुंच सकें। मंडी हाउस जाने वाले रास्ते पर खड़ी बस को भी उन्होंने निशाना बनाया। 

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